नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी के वीडियो डिलीट करने के मामले पर संसदीय समिति ने कड़ा रुख दिखाया है। संसदीय मामलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के नियमन को लेकर आज हुई संसदीय स्थायी समिति की बैठक में मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को भारतीय प्रतिनिधियों के कड़े सवालों का सामना करना पड़। संसदीय सीमिति के चेयरमैन निशिकांत दुबे ने कहा कि इस मामले में मेटा के ग्लोबल चीफ मार्क जुकरबर्ग को माफी मांगनी चाहिए।
समिति की बैठक के दौरान एक वरिष्ठ सांसद ने मेटा के अधिकारियों के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाए जाने का मुद्दा उठाया। वहीं आईटी मामलों की संसदीय सीमिति के चेयरमैन निशिकांत दुबे ने बेहद तल्ख लहजे में सवाल पूछे कि प्लेटफॉर्म से प्रधानमंत्री का वीडियो आखिर क्यों हटाया गया? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? सांसद ने कि एक तरफ जब मेटा के प्लेटफॉर्म्स पर ढेरों आपत्तिजनक सामग्री मौजूद रहती है और उन्हें नहीं हटाया जाता, तो ऐसे में देश के प्रधानमंत्री का वीडियो हटाने का फैसला किसने और क्यों लिया? इसकी अंतिम जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
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दुबे ने कहा-यह बहुत ही गंभीर मामला
निशिकांत दुबे ने कहा कि सवाल यह है कि मेटा इंडिया ने प्रधानमंत्री का कंटेट हटा दिया. हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब मेटा इंडिया ने ऐसा किया है। अगर आपको याद हो, तो मेटा के मालिक मार्क जुकरबर्ग ने खुद जनवरी में 2024 के चुनावों के बारे में बयान दिया था और बाद में माफी मांगी थी। इससे पता चलता है कि उनका इरादा देश को अस्थिर करने का है। उन्होंने कहा कि जब भारत के प्रधानमंत्री का वीडियो हटाया जा सकता है और उन्होंने खुद माना कि कंटेंट पांच घंटे- रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक तक गायब था, तो यह बहुत गंभीर मामला है। हमारी समिति ने दो बातें साफ तौर पर कही है कि माफी मार्क जुकरबर्ग की तरफ से आनी चाहिए, अगर जुकरबर्ग ऐसा नहीं करते हैं, तो उनसे सेक्शन 79 के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा वापस ले ली जानी चाहिए।
मेटा ने जताया गहरा खेद
बताया जाता है कि मेटा के प्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले पर गहरा खेद जताया और कहा कि वे इस भूल के लिए औपचारिक रूप से माफी मांगने को तैयार हैं? निशिकांत दुबे ने बैठक के बाद कहा कि पीएम मोदी के वीडियो को डिलीट करने के मामले में मेटा के ग्लोबल चीफ मार्क जुकरबर्ग को माफी मांगनी होगी। इसके अलावा उन्होंने कहा कि अगर वह माफी नहीं मांगते हैं तो सोशल मीडिया कंपनियों को जो सेफ हॉर्बर का प्रोटेक्शन मिलता है उसे वापस ले लिया जाएगा।
कई कंपनियों के प्रतिनिधि हुए शामिल
इस बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और गृह मंत्रालय के अधिकारियों के अलावा टेक जगत की तमाम दिग्गज कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। समिति के सामने अपनी बात रखने के लिए स्नैपचैट, गूगल, एक्स, मेटा (फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम) और यूट्यूब जैसी प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद थे।



