US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष जारी है । अब इस युद्ध का असर खाड़ी क्षेत्र के साथ-साथ इराक और लाल सागर तक भी फैलता नजर आ रहा है। ईरान ने इराक के इरबिल में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया, जबकि अमेरिका की ओर से भी ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रहे।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि युद्ध के दौरान जहाजों और मालवाहक पोतों को हुए नुकसान की भरपाई ईरान की विदेशों में जब्त संपत्ति से की जाएगी। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहा है और फिलहाल युद्धविराम या शांति वार्ता पर विचार नहीं किया जा रहा है।
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इरबिल में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर जोरदार हमला
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को इराक के इरबिल शहर में कम से कम सात धमाकों की आवाज सुनी गई। अमेरिकी बलों ने विस्फोटक से लदे पांच ड्रोन को मार गिराने का दावा किया। एक अन्य ड्रोन फसलों के बीच गिरा, जिसके बाद वहां आग लग गई।
इरबिल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास स्थित सैन्य अड्डे के नजदीक कई स्थानों से काले धुएं का गुबार उठता देखा गया। हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक हमले में किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
इराक में अमेरिका के करीब 2,500 सैनिक मौजूद हैं। हमले के बाद कुछ समय के लिए उड़ानें रोकी गईं, लेकिन बाद में एयरपोर्ट का संचालन फिर से शुरू कर दिया गया।

अमेरिकी जहाज पर हमला, 30 नाविकों ने मांगी मदद
इस बीच अमेरिकी बलों ने ईरानी बंदरगाह की ओर बढ़ रहे ‘दिशा’ नाम के एक जहाज को भी निशाना बनाया। जहाज पर करीब 30 नाविक सवार थे और हमले में उसके इंजन रूम को नुकसान पहुंचने की खबर है।
हमले के बाद जहाज की ओर से डिस्ट्रेस कॉल के जरिए मदद मांगी गई। इस घटना ने खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
लाल सागर में हूती का दबदबा, जहाज कंपनियां सतर्क
लाल सागर में भी तनाव लगातार बढ़ रहा है। हूती समूह ने दावा किया है कि बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला है और नाकेबंदी केवल सऊदी अरब के लिए लागू है।
हालांकि, हूती के इस बयान के बावजूद अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां बेहद सतर्कता बरत रही हैं। कई जहाज संभावित हमलों से बचने के लिए अपने रूट में बदलाव कर रहे हैं।

बहरीन और कुवैत में भी हमलों का दावा
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि बहरीन में अमेरिकी पांचवें बेड़े के एक सर्विलांस टावर को हमले में नुकसान पहुंचा है।
इसके अलावा कुवैत स्थित कैंप बुहरिंग, कैंप अरिफजान और कैंप दोहा पर भी हमले किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।
बहरीन ने भी कुछ ईरानी हमलों को नाकाम करने का दावा किया है।
ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर अमेरिका का हमला
दूसरी ओर, अमेरिकी बलों ने ईरान के कई इलाकों में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। इनमें केशम द्वीप के नौसैनिक ठिकाने, इश्फहान, खुजेश्तान, पीरानशहर और गिलान प्रांत के कुछ इलाके शामिल हैं।
ईरानी सरकारी प्रसारक IRIB के मुताबिक, अहवाज में हुए हमलों में चार लोगों की मौत हुई है।
ट्रंप की बड़ी चेतावनी- जब्त ईरानी संपत्ति से होगी नुकसान की भरपाई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि युद्ध के दौरान जहाजों, माल और उनसे जुड़े किसी भी नुकसान की भरपाई ईरान की जब्त संपत्ति से की जाएगी।
हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका इस नुकसान की भरपाई के लिए किस कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल करेगा।

होर्मुज स्ट्रेट में 6,000 से ज्यादा नाविक फंसे
अमेरिका-ईरान तनाव का सबसे बड़ा असर वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता दिखाई दे रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट में करीब 400 जहाजों पर सवार 6,000 से अधिक नाविक फंसे हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने उनकी सुरक्षा और सहायता के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की है।
वहीं, पिछले तीन दिनों से होर्मुज स्ट्रेट से हर दिन केवल करीब तीन जहाजों के गुजरने की खबर है। फारस की खाड़ी में बड़ी संख्या में तेल और गैस से लदे टैंकरों के फंसे होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी में 253 पूरी तरह लदे टैंकर खड़े हैं। इनमें 102 तेल, 64 LNG और 66 LPG से लदे जहाज शामिल हैं।
कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के करीब
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में भी उथल-पुथल जारी है। कच्चे तेल की कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं।
अगर होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर में समुद्री यातायात लंबे समय तक बाधित रहता है, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, शिपिंग लागत और महंगाई पर पड़ सकता है।
अमेरिका-ईरान युद्ध का अगला असर दुनिया पर कितना बड़ा होगा?
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रह गया है। इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले, लाल सागर में हूती का प्रभाव और होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों ने वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
आपको क्या लगता है—अगर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध और लंबा खिंचता है, तो क्या इसका सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों, भारत समेत एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था और वैश्विक महंगाई पर पड़ेगा? क्या इस संकट का जल्द कोई कूटनीतिक समाधान निकलना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



