इंदौर। जब सरकारी विभाग ही समन्वय से काम नहीं करते तो गलत काम करने वालों के लिए सारे रास्ते खुल जाते हैं। इसका सबसे ज्यादा फायदा भूमाफिया उठाते हैं। हाल ही में स्वतिक ग्रैंड कॉलोनी के मामले में कलेक्टर शिवम वर्मा ने सारी अनुमतियां निरस्त कर दी थीं, लेकिन संभागायुक्त सुदाम खाड़े ने कलेक्टर के आदेश पर ही रोक लगा दी।
और कितनी गलतियां करेंगे विभाग
उल्लेखनीय है कि8 जनवरी 2025 को कॉलोनी सेल ने इस कॉलोनी को विकास की अनुमति दे दी। इतना ही नहीं, कुछ महीने बाद जून 2025 में रेरा ने भी इस प्रोजेक्ट को पंजीकृत कर दिया। यानी एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग सरकारी जांच से यह मामला बिना किसी रोक-टोक के गुजर गया। ना कॉलोनी सेल ने भूमि का पुराना इतिहास खंगाला, ना रेरा ने।
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फाइलों में ही दबा रहता मामला
यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। यह पूरा मामला तब खुला, जब स्वस्तिक ग्रैंड कॉलोनी के ठीक बगल की जमीन पर मेसर्स ल्यूमिनियस इंफ्रास्ट्रक्चर के मेहुल पिता नवीन मेहता ने भी कॉलोनी सेल से अलग से विकास अनुमति मांगी। इसी प्रक्रिया के दौरान भूमि रिकॉर्ड खंगाले गए, और तब जाकर सीलिंग जमीन का यह पूरा मामला रोशनी में आया। यानी अगर पड़ोस में किसी और बिल्डर ने आवेदन नहीं किया होता, तो यह जमीन शायद आज भी निजी संपत्ति की तरह ही बिकती-बंटती रहती।
कलेक्टर की मेहनत पर फेरा पानी
शिकायत और जांच रिपोर्ट के आधार पर इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने कॉलोनी सेल विभाग के प्रभारी अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य को अनुमति निरस्त करने के निर्देश दिए। इसके बाद एडीएम रिंकेश वैश्य ने स्वस्तिक ग्रैंड कॉलोनी की विकास अनुमति को औपचारिक रूप से निरस्त कर दिया, और रेरा तथा पंजीयन विभाग को पत्र लिखकर वहां रजिस्ट्री रोकने के निर्देश दिए। साथ ही, नीलेश चौधरी और उनसे जुड़े डेवलपर की अन्य कॉलोनियों को भी अब जांच के दायरे में ले लिया गया। इसके बाद संभागायुक्त सुदाम खाड़े ने अपनी ताकत दिखाते हुए कलेक्टर के आदेश पर ही रोक लगा दी।
गलत को सही बता रहे संभागायुक्त
संभागायुक्त सुदाम खाड़े ने 21 जुलाई को कलेक्टर के आदेश पर रोक लगा दी। संभागायुक्त ने अपने आदेश में लिखा कि अपीलार्थी अधिवक्ता तथा केवियटकर्ता के तर्क श्रवण एवं अधीनस्थ कार्यालय के आदेश एवं अपीलार्थी द्वारा अपील मेमो के संलग्न दस्तावेजों के अवलोकन पश्चात सुविधा का संतुलन में अधीनस्थ अपर कलेक्टर कॉलोनी सेल जिला इन्दौर के प्रकरण कमांक 0105/अ-89(13)/2026-27 पत्र कमांक 2111/रीडर/कॉ.से. / 2026 में पारित आदेश दिनांक 03.07.2026 संबंध में कियान्वयन को आगामी पेशी तक स्थगित किया जाता है। संभागायुक्त के इस आदेश पर सबको आश्चर्य हो रहा है। एक तो पहले ही विभाग गलती कर चुके हैं, जब कलेक्टर ने सख्ती दिखाते हुए रोक लगा दी, तब संभागायुक्त को पता न क्या हुआ कि वे गलत को ही सही बताने लगे।



