इंदौर। अपना इंदौर नगर निगम भी गजब है। नगर निगम के अपने विभाग नगरीय प्रशासन मंत्री इंदौर के ही हैं, लेकिन सीएम के कार्यक्रम वाले होर्डिगों से उनका ही फोटो गायब कर देता है। अरे, नगर निगम को तो कैलाश विजयवर्गीय के होर्डिंग पूरे शहर में परमानेंट लगवा देना चाहिए।
बेचारे मध्यप्रदेश के इतने बड़े नेता हैं। सीएम पद के ख्बाव देखते रहते हैं। यह अलग बात है कि पार्टी उनको सीएम के लायक नहीं समझती, इसलिए हर सीएम से पंगा लेते रहते हैं। ऐसे बड़े नेता का इस तरह अपमान शोभा नहीं देता। नगर निगम के पढ़े-लिखे महापौर तथा अधिकारी इस बात को क्यों नहीं समझ पाते?
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सीएम के प्रभारी होने से क्या हुआ?
शायद अधिकारी इस बात से डरते हैं कि सीएम इंदौर के प्रभारी हैं और उनके रहते कैलाशजी को ज्यादा महत्व कैसे दें? सबको यह भी पता है कि मंत्रीजी से सीएम के कितने मधुर संबंध हैं। यह भी पता है कि मंत्रीजी सीएम के पीठ पीछे और कई बार तो सामने भी क्या-क्या कर चुके हैं। हो सकता है ऐसे में बेचारे अपनी नौकरी बचाने के लिए मंत्रीजी का फोटो गायब कर देते होंगे?
अपने ही जिले से बेदखल करने का दर्द अलग
मंत्रीजी को इंदौर की राजनीति में दखलअंदाजी की पुरानी आदत है। हर पद पर अपने पट्ठे बिठाने के लिए मंत्रीजी हद से भी गुजर जाते हैं। अपनी विधानसभा को बेटे के हवाले कर वे दूसरी विधानसभाओं में ज्यादा ध्यान लगाते हैं। शायद यही वजह है कि मंत्रीजी को इंदौर जिले का प्रभार नहीं सौंपा गया।
मंत्रीजी खुद जाहिर कर चुके हैं अपना दर्द
मंत्रीजी को धार-सतना का प्रभार दिए जाने की भाजपा की राजनीति में भी खूब चर्चा होती है। इसका मलाल मंत्रीजी को भी है। एक कार्यक्रम में विजयवर्गीय ने तंज कसते हुए सीएम से यहां तक कह दिया था कि गजट में तो आप प्रभारी हैं, इसलिए अफसर आपके नाम से हमें चमकाते थे।
मंत्रीजी के खास मनीष मामा का दर्द सही तो है
गुरुवार को हुई महापौर परिषद की बैठक में मंत्रीजी के खास समर्थक मनीष शर्मा मामा का दर्द जाग उठा। उन्होंने महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगम कमिश्नर के सामने सीधे सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में नगर निगम के पोस्टरों में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का फोटो क्यों नहीं लगाया जा रहा। मनीष मामा का कहना है कि कैलाश विजयवर्गीय इंदौर के कद्दावर नेता और प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री हैं। बावजूद इसके सीएम मोहन यादव के इंदौर में होने वाले नगर निगम के कार्यक्रमों के पोस्टर-बैनर में उनका फोटो नजर नहीं आता। उन्होंने महापौर और कमिश्नर से इस पर स्पष्टीकरण मांगा है। मनीष मामा का दर्द जायज है और कैलाश विजयवर्गीय जैसे वरिष्ठ नेता के लिए अब महापौर और निगम कमिश्नर को कोई बड़ा फैसला लेना चाहिए। अच्छा तो यह होगा कि पूरे शहर में मंत्रीजी के परमानेंट होर्डिंग लगा दिए जाएं।



