भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा का दंगल शुरू हो चुका है। भाजपा खेमे में भी भारी उठापटक है, क्योंकि कई नेता राज्यसभा के दरवाजे से दिल्ली जाने की आस लगाए बैठे हैं। इसके बावजूद किसी को भरोसा नहीं है, सबको डर है कि पिछली बार की तरह अंत समय दिल्ली से दूसरे राज्य का कोई नाम न टपक जाए। इधर, कांग्रेस में भी कई दावेदार हैं, लेकिन दिग्विजय सिंह के इनकार के बाद सबसे ज्यादा जोर कमलनाथ लगा रहे हैं।
प्रदेश के एक मंत्री भी लगा रहे हैं जोर
भाजपा से जिन नेताओं के नामों पर चर्चा है, उनमें पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया, नरोत्तम मिश्रा, अखंड प्रताप सिंह, जीएस डामोर, लाल सिंह आर्य, रंजना बघेल सहित कुछ और नेता शामिल हैं। इन सबसे अलग एक मंत्रीजी भी दिल्ली जाने के लिए लगातार कसमसा रहे हैं, वो हैं कैलाश विजयवर्गीय। सीएम डॉ.मोहन यादव के आगे अपनी दाल नहीं गलने से परेशान विजयवर्गीय कई बार दिल्ली में अमित शाह से लेकर कई वरिष्ठ नेताओं के यहां हाजिरी लगा चुके हैं।
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सबसे ज्यादा डर कांग्रेस से आए नेताओं से
भाजपा नेताओं को सबसे ज्यादा दर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए नेताओं से लग रहा है। कांग्रेस के कई नेताओं को भाजपा में अभी कोई पद नहीं मिला है। इस कारण इनकी छटपटाहट भी बढ़ रही है। इनमें से सबसे बड़ा नाम सुरेश पचौरी का है, जो बिना पद के काफी निराश हैं।अगर ऐसा होता है तो भाजपा के कई नेताओं को निराशा हाथ लगेगी
कहीं दक्षिण से न टपक जाए नाम
इस कवायद के बीच भाजपा में डर इस बात का भी है कि कहीं अंत में आलाकमान पिछली बार की तरह दक्षिण से कोई नाम न टपका दे। अभी जॉर्ज कुरियन राज्यसभा के सदस्य हैं। कुरियन का कार्यकाल 21 जून को पूरा हो रहा है। चूंकि मध्यप्रदेश में भाजपा लंबे समय से सत्ता में है, इसलिए भाजपा यहां से दक्षिण के नेताओं को राज्यसभा भेजना सबसे सुरक्षित समझती है। ऐसे में हो सकता है कि इस बार भी कोई नाम दक्षिण से आ जाए।
दिग्गी के हटने के बाद कमलनाथ की उम्मीदें बढ़ीं
इधर, कांग्रेस अपनी एक सीट के लिए दिग्विजय सिंह के इनकार के बाद नए नाम पर विचार कर रही है। इसमें सबसे आगे पूर्व सीएम कमलनाथ का नाम है। बताया जा रहा है कि वे आलाकमान से अपनी इच्छा भी जता चुके हैं, लेकिन अंतिम निर्णय दिल्ली से ही होगा। कांग्रेस में अरुण यादव, कमलेश्वर पटेल और सज्जन सिंह वर्मा जैसे नेताओं की भी चर्चा है। महिला नेताओं में शोभा ओझा और मीनाक्षी नटराजन के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि भले ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने को इस दौर से बाहर बता चुके हैं, लेकिन उनका नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल है। अब देखना है कि आलाकमान क्या फैसला लेता है।


