इंदौर। शहर के पुराने कई इलाकों का भूगोल अब इतिहास बन गया है। अब वह गलियां, वे चौबारे और वे झरोखे गायब हैं। सैकड़ों साल का इतिहास समेटे शहर की इस पहचान को विकास की भेंट चढ़ाया जाता रहा है। ताजा मामला छावनी का है। यहां लोगों के सैकड़ों साल पुराने घर और दुकानों को नगर निगम द्वारा अब मलबा बनाया जा चुका है।
आज हमारी, कल तुम्हारी बारी
नगर निगम की भूकंपी कार्रवाई के बाद छावनी क्षेत्र के व्यापारियों और रहवासियों ने जगह-जगह पोस्टर लगाए हैं। जो शहर ही नहीं, पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए हैं। इन पोस्टरों पर लिखा है-हमें जिंदा छोड़ देने के लिए इंदौर नगर निगम और प्रशासन का धन्यवाद। इसके अलावा एक पोस्टर पर लिखा है-छावनी की बर्बादी का तमाशा देखने वालों का स्वागत है। आज हमारी, कल तुम्हारी बारी है और रोड के लिए घर-दुकान तोड़ दो, यह किस नियम में लिखा है, जैसे संदेश भी लिखे गए।
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जिन्हें जिताया वे आंसू पोछने नहीं आए
यह छावनी नहीं, पूरे शहर का दर्द है। इंदौर में भाजपा के 9 विधायक हैं। सांसद और महापौर भाजपा के हैं। लंबे समय से निगम में भाजपा की परिषद है। इसके बाद भी जब भी ऐसी कोई कार्रवाई होती है, ये सारे जीते हुए अंडरग्राउंड हो जाते हैं। छावनी के मामले में भी ऐसा ही हुआ, एक भी चुना हुआ नेता व्यापारियों और रहवासियों के आंसू पोंछने नहीं गया। और चुनाव आते ही यही चंदा और वोट मांगने जरूर पहुंच जाएंगे।
कार्रवाई में जिसका सिर फोड़ा, उसे भी देखने नहीं गए
22 मई को हुई कार्रवाई में छावनी निवासी डॉ. कपिल दीक्षित गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बिजली का पोल उनके सिर पर जा लगा और सिर फूट गया। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ा जहां उनकी मेजर सर्जरी हुई। बताया जाता है कि निगम का पोकलेन चालक लापरवाही से मशीन चला रहा था। उसने इलेक्ट्रिक वायरों को तोड़ने के उद्देश्य से पंजा मारा। लोगों ने उसे मना भी किया कि ये पुराने कापर के वायर हैं नहीं टूटेंगे, लेकिन वह नहीं माना। उसने बार-बार वायर तोड़ने की कोशिश की तो पूरा पोल ही उखड़ गया और दीक्षित के सिर पर आकर लग गया। उनकी सर्जरी करनी पड़ी, लेकिन क्षेत्र का कोई नेता या नगर निगम का जिम्मेदार उन्हें देखने नहीं गया।
विदेशों में संजोई जाती है ऐसी आबादी
दुनिया के कई देशों में इस तरह की पुरानी आबादी को उसी रूप में आज भी संजो कर रखा गया है। पर्यटक वहां इन्हीं पुरानी गलियों, मकानों और ढांचों को देखने जाते हैं। फ्रांस के कोलमार में संकरी गलियों और लकड़ी से बने पुराने घरों को सजा कर रखा गया है। पेरिस के मोंटमार्ट्रे इलाके की पत्थर की घुमावदार गलियां और सड़कें बहुत ही व्यवस्थित और आकर्षक बना कर रखी गी है। यूरोप का कारकासोन का नाम भी इस में शामिल है। जर्मनी, इटली मैक्सिको कई शहर इसमें शामिल हैं। सैन मिगुएल डी ऑलेंडे में लगभग 500 साल पुरानी पत्थर की सड़कें और चमकीले रंगों वाली औपनिवेशिक इमारतें आज भी हैं, जिसे लोग देखने जाते हैं। इनके अलावा भी विभिन्न देशों में कई ऐसे शहर हैं।
कम से कम विदेशों से ही सीख लेते
विडंबना यह कि हमारे महापौर, सांसद तथा विधायक कई देशों की यात्राएं करते रहते हैं। ऐसी पुरानी आबादी और इमारतें घूम कर आते हैं, फिर भी कुछ सीखने की कोशिश नहीं होती। हमारे जनप्रतिनिधियों ने इंदौर का कोई भी पुराना इलाका मूल स्वरूप में नहीं छोड़ा। सबको तोड़कर सीमेंट-क्रांक्रीट की चौड़ी सड़कें बना दी गई हैं या बनाई जा रही हैं। अरे जरा यह तो सोचो कि अगर सबकुछ तोड़ ही दिया तो बाहर से इंदौर में आने वाले लोगों को दिखाओगे क्या?


