सुप्रीम फैसला; चंडीगढ़  मेयर चुनाव,आप  के उम्मीदवार कुलदीप कुमार विजयी 

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सुप्रीम फैसला; चंडीगढ़ मेयर चुनाव,आप के उम्मीदवार कुलदीप कुमार विजयी

सुप्रीम कोर्ट ने बना दिया AAP का मेयर, मगर बदले नंबर गेम में कब तक कुर्सी  सेफ रखेंगे कुलदीप कुमार! - Supreme Court verdict on chandigarh mayor  election will aap Kuldeep Kumar

सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कुलदीप कुमार को विजयी घोषित कर दिया है.इसे इंडिया ब्लॉक की पार्टियों आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है.

Chandigarh Mayoral Election: चंडीगढ़ मेयर चुनाव में AAP उम्मीदवार कुलदीप  कुमार की जीत, सुप्रीम कोर्ट ने घोषित किए नतीजे - Chandigarh Mayoral  Election Supreme Courtvotes at the poll ...

अदालत ने चुनाव में अमान्य घोषित किए गए आठ वोटों को वैध करार दिया. इन अमान्य करार दिए गए वोटों की वजह से ही कुलदीप कुमार चुनाव हार गए थे.शीर्ष अदालत ने चुनाव में भाजपा उम्मीदवार मनोज सोनकर की जीत को रद्द कर दिया.इससे पहले पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह ने मनोज सोनकर को विजयी घोषित कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के फैसले से पहले सोनकर ने मेयर के पद से इस्तीफा दे दिया था.

Abhilash Shukla (Editor)
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इंदौर। डेली कॉलेज के संविधान बदलने का मामला एक बार फिर गरमा गया है। बताया जाता है कि डीसी बोर्ड ने बाले-बाले संविधान बदलकर चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसकी शिकायत लेकर ओल्ड डेलियंस कलेक्टर शिवम वर्मा के पास पहुंचे। कलेक्टर ने एडीएम पवार नवजीवन विजय को इसकी जांच सौंपी है। ओल्ड डेलियंस ने मंगलवार को कलेक्टर शिवम वर्मा को एक प्रतिवेदन सौंपा। इसमें कहा गया है कि  डेली कॉलेज सोसायटी द्वारा अपंजीकृत एवं अप्रस्वीकृत संशोधनों के आधार पर अवैध रूप से चुनाव कराए जा रहे हैं।   प्रतिवेदन में कहा गया है सोसायटी का मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन तथा नियम/विनियम, जो 08 अप्रैल 1954 को निर्मित हुए थे और आज भी लागू हैं। यह स्पष्ट रूप से  निर्धारित करते हैं कि बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का गठन किस प्रकार होगा तथा उसके चुनाव किस प्रकार संपन्न किए जाएंगे। प्रतिवेदन में कहा गया है कि नियम के अनुसार नए बोर्ड के चुनाव की प्रक्रिया बोर्ड की अवधि समाप्त होने से कम से कम 90 दिन पूर्व अर्थात 12 सितंबर 2025 तक प्रारंभ हो जानी चाहिए, जो नहीं हए। सरकार द्वारा अनुमोदित नहीं हुए संशोधन प्रतिवेदन में कहा गया है कि मध्यप्रदेश   सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1973 की धारा 10 के अनुसार, “प्रस्तावित” संशोधन केवल तभी प्रभाव में आ सकते हैं जब उन्हें रजिस्ट्रार/सहायक रजिस्ट्रार द्वारा पंजीकरण के माध्यम से अनुमोदित किया जाए। डेली कॉलेज के प्रस्तावित संशोधन दिनांक 5 मार्च 26, जिसे 9 अप्रैल 26 को प्रस्तुत किया गया, अभी तक सरकार द्वारा “अनुमोदित” नहीं किए गए हैं। ऐसी स्थिति में इन अप्रमाणित संशोधनों के आधार पर चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं? इससे पहले संशोधन नहीं करने के हुए थे आदेश प्रतिवेदन में कहा गया है कि ऐसे संशोधनों को किसी भी स्थिति में अनुमोदित नहीं भी किया जा सकता, क्योंकि रजिस्ट्रार के दिनांक 10.11.25 के आदेश के अनुसार, डेली कॉलेज बैठकों का आयोजन तो कर सकता है, परंतु कोई “संशोधन” नहीं कर सकता, जब तक भोपाल स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय में उनके अपीलों के सुनवाई नहीं हो जाती। डेली कॉलेज ने इस सारे तथ्यों को छुपाया है। कलेक्टर ने एडीएम से तुरंत जांच को कहा ओल्ड डेलियंस के प्रतिवेदन पर कलेक्टर शिवम वर्मा ने एडीएम पवार नवजीवन विजय को तुरंत जांच के आदेश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी पिछले वर्ष जब कलेक्टर के पास संविधान संशोधन की शिकायत पहुंची थी तो उन्होंने उप रजिस्ट्रार को जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद उप रजिस्ट्रार ने डेली कॉलेज को आदेश दिया था कि जब भोपाल में रजिस्ट्रार के यहां लंबित प्रकरणों का निराकरण नहीं हो जाता, तब तक संविधान संशोधन नहीं किया जाए।