नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को राष्ट्र के नाम संदेश दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, हम हम, भारत के लोग देश और विदेश में उत्साह के साथ गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं। गणतंत्र दिवस का यह पावन अवसर हमें हमारे देश के अतीत, वर्तमान और भविष्य की स्थिति और दिशा पर विचार करने का अवसर देता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। विश्व पटल पर अनिश्चितता के बावजूद भारत में निरंतर आर्थिक विकास हो रहा है। हम निकट भविष्य में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे के निर्माण में निवेश करके हम अपनी आर्थिक संरचना का उच्च–स्तर पर पुनर्निर्माण कर रहे हैं। आर्थिक नियति के निर्माण की यात्रा में आत्म निर्भरता और स्वदेशी हमारे मूलमंत्र हैं। स्वाधीनता के बाद देश के आर्थिक एकीकरण के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्णय जीएसटी को लागू करने से एक देश–एक बाजार की व्यवस्था स्थापित हुई है। जीएसटी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के हाल के निर्णा से हमारी अर्थव्यवस्था को और अधिक शक्ति मिलेगी।
👉 यह भी पढ़ें:
- अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बोलीं—सशक्त महिलाएं ही प्रगतिशील राष्ट्र की मजबूत नींव
- गणतंत्र दिवस समारोह में राहुल गांधी को पीछे बिठाने पर भड़की कांग्रेस, कहा- हीन भावना से ग्रस्त सरकार की कुंठा
- INDORE·गणतंत्र दिवस पर 56 दुकान एसोसिएशन ने फहराया बाजार में राष्ट्र ध्वज…..
- INDORE·गणतंत्र दिवस मुख्य समारोह में झांकियों के कारवां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लुभाया..
राष्ट्रपति ने कहा कि प्यारे देशवासियों, आप सब हमारे जीवंत गणतंत्र को शक्तिशाली बना रहे हैं। हमारी तीनों सेनाओं के बहादुर जवान, मातृभूमि की रक्षा के लिए सदैव सतर्क रहते हैं। हमारे कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मी तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवान देशवासियों की आंतरिक सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। हमारे अन्नदाता किसान देशवासियों के लिए पोषण सामग्री उत्पन्न करते हैं। हमारे देश के कर्मठ और प्रतिभाशाली महिलाएं अनेक क्षेत्रों में नए प्रतिमान स्थापित कर रही हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे स्वतंत्रता संग्राम की ताकत ने 15 अगस्त 1947 को हमारे देश की स्थिति बदल दी। भारत स्वतंत्र हुआ। हम अपने राष्ट्र के भाग्य के स्वयं निर्माता बन गए। 26 जनवरी 1950 से हम अपने गणराज्य को सांविधानिक आदर्शों की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। उस दिन हमारा संविधान पूरी तरह लागू हुआ। भारत, जो लोकतंत्र की जन्मभूमि है, शासन प्रणाली से मुक्त हुआ और हमारा लोकतांत्रिक गणराज्य अस्तित्व में आया। हमारा संविधान विश्व इतिहास के सबसे बड़े गणराज्य की आधारशिला है। संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व के आदर्श हमारे गणराज्य को परिभाषित करते हैं। संविधान के निर्माता देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को संविधानिक प्रावधानों के माध्यम से मजबूत आधार प्रदान करने में सफल रहे हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने आगे कहा कि आप सब हमारे जीवंत गणतंत्र को शक्तिशाली बना रहे हैं। हमारी तीनों सेनाओं के बहादुर जवान, मातृभूमि की रक्षा के लिए सदैव सतर्क रहते हैं। हमारे कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मी तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवान देशवासियों की आंतरिक सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। हमारे अन्नदाता किसान देशवासियों के लिए पोषण सामग्री उत्पन्न करते हैं। हमारे देश के कर्मठ और प्रतिभाशाली महिलाएं अनेक क्षेत्रों में नए प्रतिमान स्थापित कर रही हैं।


