डीजीपी मकवाना के बहाने सीएम यादव का भ्रष्टाचार पर निशाना, आईएएस-आईपीएस के खिलाफ जांच शुरू कर आए थे चर्चा में

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भोपाल। मध्यप्रदेश में वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति से अब यह स्पष्ट हो गया है कि सीएम डॉ.मोहन यादव भ्रष्टाचार के साथ कोई समझौता नहीं करने वाले। पहले सीएस के पद पर अनुराग जैन की नियुक्ति और अब डीजीपी के तौर पर कैलाश मकवाना की नियुक्ति ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि अब प्रदेश में भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों की खैर नहीं। नए डीजीपी मकवाना अपनी स्वच्छ और कड़क छवि के कारण ही बार-बार ट्रांसफर का दंश झेलते रहे हैं। वे तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने भ्रष्टाचार के मामले में कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की जांच शुरू कर दी थी।

उल्लेखनीय है कि मकवाना को 2022 में मध्य प्रदेश विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त संगठन का महानिदेशक (डीजी) बनाया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान महाकाल लोक कॉरिडोर की जांच शुरू की गई थी। इसमें कुछ ऐसे अधिकारी फंसने लगे कि विवाद खड़़ा हो गया। उन्होंने पद संभालते ही आईएएस, आईपीएस के भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी। कई पुराने मामले खोल दिए। अधिकारियों के साथ ही सरकार भी बौखला गई। इसके बाद उन्हें लोकायुक्त से हटाकर मध्य प्रदेश पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन का चेयरमैन बना दिया गया था। शिवराज सिंह चौहान के ओएसडी योगेश चौधरी को लोकायुक्त में एडीजी नियुक्त किया। इसके बाद कैलाश मकवाना की गोपनीय चरित्रावली में गिरावट की बात सामने आई। अपनी कड़क छवि का खामियाजा उन्हें कई बार भुकतना पड़ा है। इसी कारण मात्र साढ़े तीन साल में सात बार उनका तबादला हुआ था। कमलनाथ सरकार के दौरान ही उनका तीन बार तबादला हुआ था।

तीन नामों की पैनल में सबसे ऊपर था नाम

डीजीपी के लिए 3 नामों का पैनल सरकार ने तैयार किया था। इन तीन नामों में 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी कैलाश मकवाना का नाम सबसे ऊपर था। इसके साथ ही 1988 बैच के आईपीएस और डीजी होमगार्ड अरविंद कुमार और 1989 बैच के आईपीएस और डीजी ईओडब्ल्यू अजय शर्मा के नाम भी इस पैनल में शामिल थे। शनिवार आधी रात को इस संबंध में आदेश जारी किया गया। वे डीजीपी सुधीर सक्सेना की जगह लेंगे जो 30 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। कैलाश मकवाना 1 दिसंबर को अपना कार्यभार संभालेंगे।

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