विकास की रफ्तार पर भाग रहे ‘मोहन एक्सप्रेस’ के मंत्रियों की सिर्फ मलाईदार विभागों में ही रुचि

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प्रदेश में जब से मोहन सरकार बनी है, तब से प्रदेश के विकास की रफ्तार में तेजी आई है। विडंबना यह है कि फुल स्पीड में चल रही मोहन एक्सप्रेस के इंजिन को कई डिब्बों के जंग लगे पहिए ब्रेक लगाने पर मजूबर कर रहे हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव की मंशा है कि उनके सारे डिब्बे यानी मंत्री उन्हीं की स्पीड में चलें। इसके लिए वे लगातार कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कुछ मंत्री सिर्फ मलाईदार विभागों में ही रुचि दिखा रहे हैं। हाल ही में सरकार ने जन समस्याओं के निराकरण को लेकर अपने मंत्रियों के विभागों की एक रिपोर्ट तैयार करवाई है। इसमें जो खुलासा हुआ है, वह हैरान करने वाला है।

सीएम यादव के निर्देश पर विभिन्न विभागों को कामकाज के आधार पर दो समूहों में बांटा गया था। बताया जाता है कि पहले समूह में 30 विभाग शामिल किए गए थे। इनमें से सिर्फ 12 विभाग ही ग्रेड के निकले और ये सभी मलाईदार विभाग हैं। 11 विभाग बी ग्रेड, 6 विभाग सी ग्रेड में पाए गए। इन विभागों को सूखा विभाग ही माना जाता है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के पास स्वास्थ्य विभाग है और उनके साथ राज्यमंत्री नरेंद्र पटेल भी हैं। दो मंत्रियों के बावजूद इस विभाग को सी एवं डी ग्रेड दिया गया है। इसी तरह इंदर सिंह परमार के विभाग उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा को बी,सी और डी ग्रेड मिला है। अब विभागों के हिसाब से आप अंदाजा लगा ही सकते हैं कि इनमें मंत्रियों की कितनी रुचि होगी।

प्रह्लाद पटेल के पास पंचायत और श्रम विभाग है। पंचायत विभाग को तो ए ग्रेड में है, लेकिन श्रम विभाग सी ग्रेड में पाया गया। इसका कारण स्पष्ट है कि पंचायत विभाग में मलाई है, लेकिन श्रम विभाग खट्‌टी दही के समान है। इसी तरह तुलसी सिलावट के जल संसाधन विभाग को भी बी ग्रेड मिला है। यह विभाग भी बी ग्रेड में नहीं आता, अगर इसमें मलाई नहीं होती। विश्वास सारंग के पास सहकारिता और खेल विभाग है। इनमें से सहकारिता को बी ग्रेड मिला है, लेकिन खेल सी ग्रेड में है। जाहिर है प्रदेश में सबसे बदनाम सहकारिता विभाग में मलाई ही मलाई है, लेकिन खेल में क्या मिलने वाला।

अब जरा प्रदेश के सबसे कद्दावर समझे जाने वाले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की चर्चा कर लेते हैं। इनका नगरीय प्रशासन विभाग ग्रेड में है, लेकिन विधि विभाग में उनकी कोई रुचि नजर नहीं आ रही, इसी कारण वह डी ग्रेड में है। कारण साफ है कि नगरीय प्रशासन विभाग में मलाई के साथ मिश्री भी है, लेकन कड़वे नीम जैसे विधि विभाग में क्या मिलने वाला। इसी तरह उदय प्रताप सिंह के परिवहन विभाग को ए ग्रेड और स्कूली शिक्षा विभाग को बी ग्रेड प्राप्त हुआ है। जाहिर है कि प्रदेश में परिवहन विभाग को सबसे धनी विभाग माना जाता है। सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार भी इसी विभाग में है, इसलिए यह तो ए ग्रेड में रहना ही है।

इस रिपोर्ट के बाद सीएम यादव को मंत्रियों के विभागों और उनके कामकाज को लेकर गंभीरता से सोचना होगा। सूत्र बताते हैं कि सीएम कई डिब्बों का क्रम बदलने वाले हैं और कुछ डिब्बों को ट्रेन से हटाने का फैसला भी ले सकते हैं। सीएम की मंशा साफ है कि प्रदेश के विकास की रफ्तार में थोड़ी भी कमी नहीं आए, इसलिए आने वाले दिनों में मोहन एक्सप्रेस यानी मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।

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