इंदौर। भूमाफियाओं द्वारा अपने मुनाफे के लिए शहर की खेती योग्य जमीनों का लैंडयूज चेंज कराने का खेल जारी है। अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसी जमीनों का लैंडयूज भी चेंज कराया जा रहा है, जहां अभी भी खेती होती है और आसपास कोई सड़क या बसाहट नहीं है। ग्राम अलवासा में तो कॉलोनाइजर अशोक एरन ने 180 बीघा खेती की उपजाऊ जमीन का लैंडयूज चेंज कराने के लिए आवेदन दे रखा है। आठ विभागों की एनओसी भी ले ली गई है। इतना ही नहीं एरन ने सिर्फ आवेदन लगाकर ही डायरियों पर करीब एक हजार करोड़ रुपए का सौदा भी कर दिया है।
यह जानकारी कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिंह यादव ने दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने इसकी शिकायत सीएम डॉ.मोहन यादव से की है। शिकायत के साथ सारे दस्तावेजी सबूत भी उपलब्ध कराए हैं। इसके बाद सीएम ने इसकी जांच राजस्व विभाग को सौंप दी है। यह जांच राजस्व विभाग के विवेक पोरवाल को दी गई है। यादव ने बताया कि इंदौर में सबसे बड़ा भ्रष्टाचार का घोटाला एरन बिल्डर्स के अशोक एरन द्वारा किया जा रहा है। एरन ने ग्राम अलवासा की उपजाऊ कृषि भूमि को धारा 23-क की उपधारा (1) के खंड (ख) के अंतर्गत उपान्तरण कराने के आवेदन लगा दिए हैं। उपजाऊ कृषि भूमि एवं पर्यावरण के संतुलन को समाप्त करने का काम विभिन्न विभागों के साथ मिलकर किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों से भूमि उपयोग परिवर्तन के एक अनिवार्य सहमति आवश्यक होती है। भू राजस्व विभाग आयुक्त को स्पष्ट करना चाहिए की उपजाऊ कृषि भूमि का आवासीय में उपान्तरण करने का ठोस कारण क्या है। मास्टर प्लान में भूमि का लैंड यूज प्रतिशत अनुसार कृषि निर्धारित है। इसके बाद भी इसे आवासीय करने की जरूरत क्या है?
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फर्जी एनओसी के माध्यम से हो रहा खेल
यादव ने बताया कि नियमानुसार उसी कृषि भूमि का लैंडयूज परिवर्तित हो सकता है, जहां बसाहट हो गई हो और आसपास सड़क निर्माण हो गया हो। अलवासा की जिस भूमि के लैंडयूज परिवर्तन के लिए आवेदन दिया गया है, वहां पूरी तरह खेती ही होती है। यादव ने बताया कि यूपी के शहरों में मास्टर प्लान में कृषि भू उपयोग (लैंड यूज) निर्धारित होने के बाद आवासीय में उपान्तरण प्रतिबंधित हैं। मध्यप्रदेश और विशेषकर इंदौर में तेजी से मास्टर प्लान में कृषि भूमि लैंड यूज को धारा 23 क उपखंड (1) का उपयोग कर आवासीय किया जा रहा है। इसमें भ्रष्टाचार के माध्यम से आठ फर्जी एनओसी ली जा रही है और करोड़ों का खेल हो रहा है।
एरन बिल्डर्स पर सख्त कार्रवाई की मांग
यादव ने मुख्यमंत्री से की गई अपनी शिकायत में इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कर एरन बिल्डर्स एवं भ्रष्ट अधिकारियों के विरुध्द सख्त कार्यवाही करने की मांग की है। इसके साथ ही नए मास्टर प्लान आने तक लैंड यूज फ्रीज करके ग्राम अलवासा के भू उपयोग बदलने के आवेदन तत्काल निरस्त करने को कहा है।
लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में करेंगे शिकायत
काग्रेस प्रवक्ता राकेश यादव ने बताया कि वे इस मामले को जल्द ही लोकायुक्त एवं ईओडब्ल्यू में ले जाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि यह सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला है। जिन विभागों ने एनओसी दी है उनके खिलाफ जांच होनी चाहिए।
शिकायत में इन तथ्यों का उल्लेख
-लैंडयूज परिवर्तन करने के लिए एनओसी देने वाले अधिकारियों की जांच कर उन पर एफआईआर दर्ज की जाए।
–पर्यावरण विभाग द्वारा भी नियमों के विरूद्ध एनओसी जारी करने की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
–नगर परिषद या ग्राम पंचायत द्वारा मौजूदा तथ्यों के विपरीत उपजाऊ कृषि भूमि के संदर्भ में अवैध एनओसी देने के खिलाफ संबंधितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
– जल पोर्टेबिलिटी प्रमाणपत्र यह सिद्ध करता हैं कि उपरोक्त भूमि उपजाऊ कृषि भूमि है।
–उक्त कृषि भूमियों का भू उपयोग परिवर्तन करने से इन भूमियों से जुड़ी उपजाऊ 300 हेक्टेयर से ज़्यादा कृषि भूमि प्रभावित होगी। बहुत बड़ा कृषि क्षेत्र समाप्त हो जाएगा। यह जोनिंग कानून एवं भूमि विनिमय नियमों का उल्लंघन है।
–उपरोक्त उपजाऊ भूमि का भू उपयोग उपान्तरण आवासीय करने से इन क्षेत्रों में कृषि भूमि समाप्त होने से सैकड़ों ग्रामीण श्रमिकों को जीविका चलाने के लिए विस्थापित होना पड़ेगा।
-इसमें मृदा संरक्षण, जल प्रदूषण तथा वन्य जीवों के आवासों का बड़ा नुकसान हो सकता है। इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा और कृषि स्थिरता पर गलत प्रभाव पड़ेगा।



