आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, कहा-संघ प्रमुख होने के लिए केवल एक शर्त, वह हिंदू होना चाहिए

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, कहा-संघ प्रमुख होने के लिए केवल एक शर्त, वह हिंदू होना चाहिए
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, कहा-संघ प्रमुख होने के लिए केवल एक शर्त, वह हिंदू होना चाहिए

मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम बड़ा बयान दिया। भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ का सरसंघचालक किसी जाति का नहीं होगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ब्राह्मण, क्षत्रिय या अन्य जाति का होना जरूरी नहीं है, केवल एक शर्त है, जो बने वह हिंदू होना चाहिए।

संघ प्रमुख ने कहा कि संघ का काम प्रचार करना नहीं, बल्कि संस्कार देना है। उनके अनुसार, व्यक्ति का प्रचार करने से प्रसिद्धि आती है और प्रसिद्धि से अहंकार पैदा होता है, जो नुकसानदायक है। इसलिए संघ व्यक्ति नहीं, काम का प्रचार करता है। इसी कारण संघ प्रचार के मामले में अक्सर पीछे रह जाता है। मोहन भागवत ने मातृभाषा को लेकर स्पष्ट कहा कि अंग्रेजी सीखनी चाहिए, इतनी अच्छी कि अंग्रेज भी आपकी भाषा सुनने के लिए टिकट लें, लेकिन अपनी मातृभाषा को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ में अंग्रेजी नहीं चलाई जाएगी, वहां केवल मातृभाषा का ही उपयोग होगा।

पद से निवृत्त हो सकते हैं, कार्य से नहीं

संघ प्रमुख ने बताया कि उनके 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं और उन्होंने खुद निवृत्त होने की इच्छा जताई थी, लेकिन संघ के कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब तक काम करने की क्षमता है, तब तक सेवा जारी रखनी चाहिए। मोहन भागवत ने कहा कि वह पद से निवृत्त हो सकते हैं, लेकिन कार्य से नहीं। अंतिम खून की बूंद तक काम करना संघ की परंपरा है।

मुस्लिम समाज हमारे समाज का हिस्सा

मुस्लिम समाज के साथ संघ के संबंधों पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि जैसे दांतों के बीच जीभ जाए तो हम दांत नहीं तोड़ते, वैसे ही मुस्लिम समाज भी हमारे समाज का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक मुस्लिम समाज के बीच जाकर सेवा कार्य करते हैं और उन्हें अलग नहीं माना जाता।

जातिगत भेदभाव खत्म होना चाहिए

आरक्षण पर संघ प्रमुख ने कहा कि संविधान सम्मत सभी आरक्षणों का संघ समर्थन करता है. जातिगत भेदभाव खत्म होना चाहिए। जो वर्ग अभी भी पीछे है, उसे ऊपर लाना समाज का दायित्व है। ऊपर बैठे लोगों को झुकना होगा और नीचे वालों को हाथ पकड़कर आगे बढ़ाना होगा। केवल सद्भावना से ही समाज आगे बढ़ सकता है। मोहन भागवत ने कहा कि राजनेता जातिवादी नहीं, बल्कि वोटवादी होते हैं। समाज को समझदारी से चलना होगा ताकि वोट इधरउधर भटक कर सामाजिक तानेबाने को नुकसान पहुंचाएं।

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