साल भर बाद बदल जाएगा निजाम;प्रशांत किशोर
बिहार में बीपीएससी परीक्षा को लेकर छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज ने राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को गरमा दिया है। इस पूरे मामले में प्रशांत किशोर और पटना सिटी एसपी स्वीटी सहरावत के बीच तीखी बयानबाजी ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

प्रशांत किशोर के आरोप और चेतावनी:
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छात्रों पर लाठीचार्ज:
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि पटना पुलिस ने छात्रों पर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया, जबकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था।-
उन्होंने इसे पुलिस का “लाठीतंत्र” करार दिया और कहा कि छात्रों को डराने की बजाय उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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प्रशांत किशोर ने कहा कि “पुलिस का काम जनता को डराना नहीं, बल्कि उनकी रक्षा करना है।”
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सिटी एसपी पर निशाना:
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प्रशांत किशोर ने सिटी एसपी स्वीटी सहरावत को चेतावनी दी कि “नए हीरो बनने की कोशिश” के चक्कर में उनका रवैया उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है।
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उन्होंने कहा कि इस लाठीचार्ज और छात्रों पर कार्रवाई को लेकर मानवाधिकार आयोग में शिकायत और कोर्ट में केस करेंगे।
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बिहार की राजनीति पर टिप्पणी:
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प्रशांत किशोर ने दावा किया कि एक साल बाद बिहार का राजनीतिक परिदृश्य बदल जाएगा, और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे।
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उन्होंने पुलिस को सलाह दी कि वह अपनी वर्दी का “रौब” दिखाने से बचें।
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छात्रों का मामला और प्रदर्शन:
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प्रदर्शनकारी छात्रों ने बीपीएससी परीक्षा रद्द करने और उसमें पारदर्शिता लाने की मांग की।
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उनका आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य खतरे में है।
भाजपा और भाजयुमो का पलटवार:
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भाजपा की युवा इकाई ने प्रशांत किशोर पर छात्रों को भड़काने का आरोप लगाया।
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भाजयुमो ने कहा कि प्रशांत किशोर ने छात्रों से कहा कि “तीन-चार लाख की संख्या में जुटकर सरकार को डराना चाहिए,” जिससे स्थिति बिगड़ गई।
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भाजयुमो ने प्रशांत किशोर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई और उन पर सरकार को बदनाम करने की साजिश रचने का आरोप लगाया।
सिटी एसपी स्वीटी सहरावत का पक्ष:
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अभी तक एसपी स्वीटी सहरावत की ओर से सीधे बयान नहीं आया है, लेकिन पुलिस ने लाठीचार्ज को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कार्रवाई बताया है।
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प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के कारण सार्वजनिक व्यवस्था और यातायात बाधित हो रहा था।
मामले के संभावित प्रभाव:
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छात्र आंदोलनों पर प्रभाव:
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यह घटना बिहार में छात्रों के आंदोलनों को और अधिक उग्र बना सकती है।
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प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच तनाव बढ़ने की संभावना है।
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राजनीतिक विवाद:
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प्रशांत किशोर के बयान और भाजयुमो की प्रतिक्रिया ने इसे एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।
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यह मामला बिहार की नीतीश कुमार सरकार और विपक्षी दलों के बीच संघर्ष को और गहरा कर सकता है।
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कानूनी कार्रवाई:
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मानवाधिकार आयोग और कोर्ट में मामले की सुनवाई से प्रशासन और पुलिस पर दबाव बढ़ सकता है।
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प्रशांत किशोर पर दर्ज प्राथमिकी से उनके लिए कानूनी संकट पैदा हो सकता है।
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