जाट आरक्षण पर केजरीवाल और बीजेपी आमने-सामने, प्रवेश वर्मा ने दी चुनौती

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जाट आरक्षण पर केजरीवाल और बीजेपी आमने-सामने, प्रवेश वर्मा ने दी चुनौती

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली में जाट समुदाय को ओबीसी का दर्जा देने की मांग पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

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बीजेपी के पूर्व सांसद प्रवेश वर्मा ने केजरीवाल पर जाट समुदाय का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा, “दिल्ली में पहली बार जाट मुख्यमंत्री डॉ. साहिब सिंह को बीजेपी ने ही बनाया था। लेकिन केजरीवाल ने जाटों का अपमान किया और अब नई दिल्ली की सीट पर खतरा महसूस होने पर आरक्षण का नाटक कर रहे हैं।”

प्रवेश वर्मा ने चुनौती दी, “नई दिल्ली की सीट छोड़कर भाग मत जाना। इस बार जाटों के हत्थे चढ़ गए हो, और नई दिल्ली की 36 बिरादरी आपकी जमानत ज़ब्त कराने के लिए तैयार हैं।”

इससे पहले, अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से अपील की थी कि दिल्ली के जाट समुदाय को ओबीसी सूची में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा, “दिल्ली सरकार की ओबीसी लिस्ट में जाट समाज का नाम है, लेकिन केंद्र की ओबीसी लिस्ट में दिल्ली के जाट शामिल नहीं हैं।जाट आरक्षण के मुद्दे पर दोनों पार्टियों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

Abhilash Shukla (Editor)
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नई दिल्ली।  महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल को पास कराने की केंद्र सरकार की मंशा पर पानी फिर गया है। संसद के तीन दिवसीय विशेष के दौरान महिला आरक्षण 131वें संशोधन बिल को पास नहीं कराया जा सका। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन बिलों के ऊपर शुक्रवार की शाम को हुई वोटिंग में पक्ष में सिर्फ 298 वोट ही पड़े, जबकि विरोध में 230 वोट पड़े।  इस बिल को दो तिहाई मत से पास होना था, जो इसे नहीं मिल पाया। महिला आरक्षण विधेयक को लेकर लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी दलों से इस बिल का समर्थन करने की अपील की, तो वहीं विपक्ष ने इसे लेकर गंभीर आपत्तियां उठाईं। लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन विधेयक पर व्यापक चर्चा के बाद अब इस महत्वपूर्ण बिल पर शुक्रवार शाम को वोटिंग हुई। कुल 528 सदस्यों ने मतदान किया, जिसमें 298 सांसदों ने इस विधेयक के समर्थन में मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में वोट डाला। इसके कारण लोकसभा में यह प्रस्ताव गिर गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि यह विधेयक दो-तिहाई सदस्यों द्वारा पारित नहीं हो सका। अब इस संविधान संशोधन विधेयक पर आगे की कार्यवाही करना संभव नहीं है। दो अन्य विधेयकों के संबंध में आगे की कार्यवाही पर सत्ता पक्ष द्वारा निर्णय लिया जाना है। रिजिजू ने कहा विपक्ष ने साथ नहीं दिया संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने से जुड़ा ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण विधेयक था। इसी पर यह नतीजा आया है। विपक्ष ने इसमें साथ नहीं दिया। बहुत खेद की बात है। आपने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया। महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने का हमारा अभियान जारी रहेगा और हम उन्हें अधिकार दिलाकर ही रहेंगे।