खनिज माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए पंचनामे में भी खेल करते रहे नामदेव, हर कार्रवाई की रिपोर्ट अधिकारियों को देर से सौंपी

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इंदौर। प्रदेश सरकार को 140 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान कराने वाले प्रभारी खनिज अधिकारी जयदीप नामदेव ट्रांसफर होने के बाद भी इंदौर में टिका हुआ है। यह लगभग हर प्रकरण में खनिज माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए खेल करता रहा है। खनिज माफियाओं के फायदे के हिसाब से पंचनामा बनाने में भी यह माहिर है। खास बात यह कि हर प्रकरण की रिपोर्ट यह वरिष्ठ अधिकारियों को चार-पांच माह देर से ही देता है, ताकि खनिज माफिया तब तक अपने हिसाब से सेटिंग जमा लें।

खनिज माफियाओं को बचाने के लिए 19-08-23 समय चार बजकर 31 मिनट ग्राम बारोली, तहसील मल्हारगंज के सर्वे क्रमांक 3/1/2 और 3/1/1/2 रकबा 3.40 हेक्टेयर व 5.503 हेक्टेयर क्षेत्र पर अवैध पत्थर-मुरम के अवैध उत्खनन का मामला पकड़ा था। जिस जमीन पर खुदाई हो रही थी वह राजस्व में रिकॉर्ड में ईडन गार्डन गृह निर्माण सहकारी संस्था तर्फे निलेश पिता बनवरीलाल पसारी और मेहरबान सिंह पिता प्रेमसिंह राजपूत के नाम दर्ज है। खदान का आवंटन विष्णुप्रसाद शुक्ला के नाम पर हुआ था। जांच के बाद जयदीप नामदेव ने संजय शुक्ला, राजेंद्र और ईडन गार्डन सोसायटी और मेहरबान सिंह के नाम से 140 करोड़ की पेनल्टी लगा दी।

पंचनामे में इस तरह की गड़बड़ी

जयदीप नामदेव के पंचनामे के अनुसार जांच के समय मौके पर कार्य बंद पाया गया। क्रेशर मशीन बिना मोटर के पाई गई। जब क्रेशर बंद था तो वहां अवैध उत्खनन का कोई प्रमाण ही नहीं होता। किंतु बिना अनुमति के क्रेशर मशीन स्थापित होना पाया जाने से गिट्‌टी के अवैध निर्माण पर रोक लगाने हेतु एहतियातन ऑपरेशन रूम एवं स्टोन क्रेशर मशीन को सील किया गया। नियमानुसार सील करने के बाद मध्यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भंडारण का निवारण) नियम 2022 के नियम 23 में बताई गई प्रक्रिया तथा नियम 24 (6) में बताई गई प्रक्रिया में नियमानुसार अवैध उत्खनन में प्रयोग की गई सामग्री, सील की गई क्रेशर मशीन जब्त कर नजदीकी पुलिस थाना, स्थानीय निकाय, ग्राम पंचायत, एसडीएम, तहसलीदार, ग्राम कोटवार आदि की निगरानी में रखा जाना आवश्यक है। जयदीप नामदेव ने खनिज माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा नहीं किया। इसके साथ ही नामदेव ने अपने उच्च अधिकारियों को तत्काल इसकी सूचना नहीं दी। इसके कारण खदान मालिक संजय शुक्ला ने वहां से मशीनें आदि गायब करवा दीं। इसी वजह से इस मामले में आज तक एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी और न ही ही सरकार को एक रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ।

एक अन्य मामले में डंपर जब्त करने में लापरवाही

भ्रष्ट प्रभारी खनिज अधिकारी द्वारा ग्राम रिंगनोदिया, तहसील सांवेर इंदौर की शासकीय भूमि सर्वे कर्मांक 204 रकबा 1.0720 हेक्टेयर के अंश भाग के खनिज मुरम के उत्खनन पर अपने पद का दुरुपयोग नियम विरुद्ध अपने उच्च अधिकारियों को अंधेरे में रखकर कार्यालयीन दस्तावेजों को छुपाकर असत्य व भ्रामक जानकारी दी। इसके बाद संभागायुक्त दीपक सिंह के पत्र क्रमांक 366/2/स्थापना/2024 इंदौर दिनांक 8-11-24 में नामदेव से स्प्टीकरण मांगा गया था। पत्र में लिखा था कि सहायक खनिज अधिकारी जिला इंदौर द्वारा एक पोकलेन मशीन एवं 6 डंपर मौके पर खनिज मुरम भरने हेतु खड़े पाए जाने से कार्रवाई की गई। एक पोकलेन मशीन और चार डंपर वाहनों को गणेश पिता महेश चौहान नियम के अंतर्गत सुपुर्दगीनामे पर दे दिए। दो डंपर की जब्ती की जाकर पुलिस थाना चौकी धर्मपुरी की अभिरक्षा में रखा गया, जिनके पास नियमानुसार रायल्टी और सभी परमिशन थे। जिन चार डंपरों और एक पोकलेन की सुपुर्दगी दी गई है उनके कोई डाक्यूमेंट नहीं थे। जाहिर यह खनिज माफियाओं को फायदा कराने के लिए किया गया।

देर से रिपोर्ट देने पर संभागायुक्त ने किया था तलब

नामदेव ने इस मामले में 20-02-24 को प्रकरण बनाया था। तत्काल अपने उच्चाधिकारियों को अवगत न कराते हुए ईमानदार ठेकेदारों को ब्लैकमेल कर अवैध रूप से रिश्वत की मांग कर प्रकरण को लंबित रखा। 24-06-24 को प्रकरण एडीएम के न्यायालय में पेश किया गया। यह लगभग चार माह की देरी हुई। इसके बाद संभागायुक्त दीपक सिंह ने कार्यालय कलेक्टर खनिज शाखा जिला इंदौर स्पष्टीकरण मांगते हुए विभागीय जाच के लिए पत्र लिखा। नामदेव को संभागायुक्त के समक्ष 18-11-24 को सुबह 11.30 बजे स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया गया। नामदेव ने स्पष्टीकरण दिया समाधानकारक नहीं होने से प्रकरण आगामी कार्रवाई हेतु स्थापना शाखा को भेज दिया। उनके जवाब से संभागायुक्त संतुष्ट नहीं हुए। इसका फायदा भी खनिज माफियाओं को मिला।

राजनीतिक प्रभाव में ट्रांसफर के बाद भी नहीं हटे

मध्यप्रदेश सरकार के नियमानुसार जिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच चल रही हो, उसे प्रभारी नहीं बनाया जा सकता। इस संबंध में प्रमुख सचिव खनिज साधन विभाग ने 3-10-23 के एक पत्र जारी कर निर्देश दिए थे। इसमें कहा गया था कि यदि कोई विभागीय जांच या आपराधिक प्रकरण अथवा दंडादेश आदि लंबित हो, उसे उच्चतर पद का प्रभार न दिया जाए। नामदेव के खिलाफ कई शिकायतें हैं और संभागायुक्त इंदौर द्वारा विभागीय जांच भी की जा रही है। इसके बावजूद नामदेव को सहायक खनिज अधिकारी से प्रभारी खनिज अधिकारी बना दिया गया। 14 जनवरी 2025 को नामदेव का ट्रांसफर सीधी हो गया, लेकिन राजनीतिक दबाव में इंदौर से उन्हें रिलीव नहीं किया जा रहा। जब तक वह इस पद पर जमे हुए हैं तब तक उनके भ्रष्टाचार के मामलों की जांच नहीं हो पाएगी और संजय शुक्ला जैसे खनिज माफियाओं की चांदी रहेगी।

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