इंदौर कलेक्टर का सीधा संदेश, अब नहीं चलेगी दलाली, आदिनाथ गृह निर्माण संस्था के मामले में मुंह के बल गिरे एक दलाल पत्रकार

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इंदौर। कलेक्टर शिवम वर्मा ने जब से कार्यभार संभाला है, तब से प्राशासनिक अमले पर कसावट साफ देखी जा सकती है। कलेक्टर कार्यालय सहित अन्य विभागों से दलालों की छुट्‌टी हो गई है। एक ताजा मामला आदिनाथ गृह निर्माण संस्था का सामने आया है। इसमें एक मीडिया से जुड़े दलाल ने कलेक्टर को गलत जानकारी देकर अपना खेल जमाने की कोशिश की, लेकिन उनकी दाल नहीं गल पाई।

बताया जाता है कि आदिनाथ गृह निर्माण संस्था के कुछ सदस्यों ने सहकारिता विभाग तथा कलेक्टर से यह शिकायत की थी कि वे संस्था के प्रवर्तक, प्राथमिक एवं वरिष्ठ सदस्य हैं। उनके द्वारा जमा राशि से संस्था की ग्राम खजराना स्थित भूमि पर सफा पार्क कॉलोनी की भूमि क्रय की गई है। वे इसी कालोनी में भूखण्ड प्राप्त करने हेतु संस्था के सदस्य बने थे, किन्तु संस्था द्वारा जारी सदस्यों की प्राथमिक सूची में उनका नाम नहीं दर्शाया गया है।

कलेक्टर ने कराई जांच तो मिली गड़बड़ी

कलेक्टर ने शिकायत मिलने के बाद सहकारिता विभाग की टीम के साथ एक ज्वाइंट कलेक्टर को भी रख दिया। जांच में सामने आया कि जिन्होंने शिकायत की है उनकी जो वरीयता हुई थी उसमें उन्हें टिगरिया राव का मेंबर बताया था। जांच में यह भी पता चला टिगरिया राव की जमीन 2002 में विवादास्पद हो गई थी। जांच अधिकारियों ने कहा कि जो पुराने लोग हैं उन्हें सफा कॉलोनी का ही मेंबर मानकर और वरीयता सूची बनाकर प्लॉट का आवंटन किया जाए।

कलेक्टर ने लगा दी रजिस्ट्री पर रोक

कलेक्टर की जांच में पाया गया कि वरीयता सूची अनुसार 59 सदस्यों को ग्राम टिगरिया राव की भूमि हेतु सदस्य दर्शाया गया था। टिगरिया राव की भूमि का स्वामित्व संस्था के पक्ष में नहीं है। इस कारण संस्था के पास जहां-जहां भूमि उपलब्ध है जिसमें सफा/नैनोद/तेजपुर गड़बड़ी में से पात्र सदस्यों को आवंटन के आधार पर, वरीयता सूची का ध्यान रखते हुए भूखण्ड आवंटन किया जाए। फिलहाल इस मामले के निराकरण होने तक कलेक्टर ने इन जमीनों की रजिस्ट्री पर भी रोक लगा दी है।

खंडेलवाल वर्सेस संघवी का है मामला

सूत्र बताते हैं कि यह मामला सुभाष खंडेलवाल वर्सेस सुरेंद्र संघवी का है। जब तक सुरेंद्र संघवी जीवित थे, तब तक सुभाष खंडेलवाल कुछ कर नहीं पाते थे, लेकिन अब वे जमीन हड़पने की कोशिशों में जुट गए हैं। इसके लिए उन्होंने एक मीडिया से जुड़े दलाल से संपर्क किया और उस दलाल ने मामला निपटाने की सुपारी ली। चूंकि कलेक्टर शिवम वर्मा का कामकाज अलग है। इसलिए उन्होंने इस मामले की भी निष्पक्ष जांच कराई और गड़बड़ी पकड़ में आ गई।

इस विवाद में हैं कई और पेंच

बताया जाता है कि इस मामले में कई और पेंच हैं। इसमें से एक कविता गृह निर्माण संस्था की जमीन का भी मामला है। आदिनाथ संस्था ने कविता गृह निर्माण संस्था से जमीन का अनुबंध कर लिया। अनुबंध आज भी जिंदा है लेकिन जमीन की रजिस्ट्री आदिनाथ में हो चुकी है।

लंबे समय से कलेक्टोरेट में सक्रिय हैं ये दलाल

मीडिया के नाम पर दलाली करने वाले यह पत्रकार लंबे समय से कलेक्टोरेट में सक्रिय हैं। ये हर कलेक्टर के साथ चिपकने की कोशिश करते हैं। इनकी एक खासियत है कि ये अपनी हरकतों से बाज नहीं आते। एक बार तो इनकी हरकतों से नाराज इनके साथियों ने कलेक्टर कार्यालय में ही इनका मुंह काला करने की योजना बना ली थी। तत्कालीन कलेक्टर को जैसे इस बात की भनक लगी, उन्होंने अपने केबिन में इन्हें छुपा लिया। इतना ही नहीं अपनी गाड़ी से ही इन्हें बाहर निकाला।

एक कलेक्टर ने तो प्रवेश पर ही लगा दिया था बैन

प्रशासन के छापे के दौरान यशवंत प्लाजा से एक दलाल के पास से एक रजिस्टर मिला था। इसमें इन महाशय के करतूतों के किस्से लिखे मिले थे। इसके बाद एक पूर्व कलेक्टर ने सभी संबंधित अधिकारियों और विभागों को इनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए थे। इनकी करतूतों के कारण ही हाल ही में इंदौर से गए एक कलेक्टर ने तो इनका फोन ही उठाना बंद कर दिया था।

बिन बुलाए शादियों में पहुंचने की आदत

बताया जाता है कि इन साहब को झांकीबाजी का इतना शौक हे कि ये सभी संभ्रांत शादियों में कार्टून टाइप के कपड़े पहन पहुंच जाते हैं। इनमें से कई ऐसी शादियां भी होती हैं, जिनमें इन्हें बुलाया ही नहीं गया होता? खास बात यह कि उस शादी से लौटने के बाद उसके किस्से इनकी जुबान से निकलते रहते हैं। यह भी कह देते हैं कि आजकल शादियों में लौग कम आ रहे, चार-चार सौ प्लेटें बच जाती हैं। इसके अलावा वहां आए मेहमानों की मीन-मेख निकालने में भी ये कोई कसर नहीं छोड़ते।

जिसकी खाते हैं, उसकी ही बिगाड़ते हैं

इन महाशय के कई किस्से मशहूर हैं। कहा जाता है कि ये जिसकी खाते हैं, उसकी ही बिगाड़ते भी हैं। यही वजह है कि पत्रकारिता में इनके दो दोस्त भी नहीं बन पाए। जिनसे इन्होंने दोस्ती कर ली, उसका कबाड़ा। जिन लोगों ने इन्हें अपने पास बिठाया, बाहर निकलकर उनकी आलोचना करने में ये थोड़ी भी कोताही नहीं बरतते।

इनकी नजरों में पूरी दुनिया चोर

इन महाशय की नजर में पूरी दुनिया चोर है, सिवाय इनके। इस पर लो सवाल भी उठाते हैं कि आखिर यह बोल कौन रहा है। लोग कहते हैं कि बोलने से पहले अपनी गिरेबां में झांक लेते। हर विभाग में तो इनके किस्से मशहूर हैं।

काफी चर्चा में रहा था एक महिला का पत्र

इन महाशय की करतूतों के लेखा-जोखा वाला एक पत्र कुछ समय पहले काफी चर्चा में रहा था। इसमें इनके किस्से विस्तार से लिखे हुए थे। बाद में यह मामला जैसे-तैसे रफा-दफा हो गया था। फिर भी इनकी करतूतें कम नहीं हुईं। हर किसी के खिलाफ बोलना और निगेटिव बोलना इनकी खासियत है।

इन से जुड़े मामलों की लंबी लिस्ट

पूरे शहर में इनकी दलाली के किस्से मशहूर हैं। ऐसे कई मामले हमारे पास भी हैं। खुद को पाक-साफ बताने वाले ये महाशय कहते फिरते हैं कि उनका कोई क्या बिगाड़ लेगा। कोई विरोध करे तो उसे धमकी भी देते हैं, लेकिन हम रुकने वाले नहीं।

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