देश में भ्रष्टाचार था, है और रहेगा। कितने अन्ना आंदोलन हो गए। इन आंदोलनों से अब तक भ्रष्टाचार को पोषित करने वाले केजरीवाल ही निकले। कई एजेंसियां बनीं, कई कानून बने, लेकिन फिर भी दहेज की तरह ही भ्रष्टाचार भी नहीं रुका। लेने वाला इसे अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानता है और देने वाला मजबूर होता है, क्योंकि उसके सामने कोई रास्ता नहीं होता। इसलिए इसे रोक पाना संभव नहीं है, लेकिन जब इस पर अंकुश लगाने वालों पर ही सवाल उठने लगते हैं तो चिन्ता होती है।
इन दिनों दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा का मामला उछला हुआ है। यह मामला नहीं उछलता अगर उनके घर में आग नहीं लगती। सारा दोष आग का ही है। खास बात यह कि उस समय जज साहब घर में भी नहीं थे। परिवार वालों ने फायर ब्रिगेड को बुला लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों को उनके घर से 15 करोड़ रुपए कैश मिले। फिर क्या था धुआं तो उठना ही था। बात घूमते-फिरते गृह विभाग तक पहुंची और गृह विभाग से सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस तक। फिर बताया गया कि जज साहब को पुन: इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया गया, जहां से वे आए थे। इस पर इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने आपत्ति भी ली।
👉 यह भी पढ़ें:
- स्कूल में हिजाब पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: यूनिफॉर्म नियम मानना जरूरी
- TMC को कलकत्ता हाई कोर्ट से झटका, फ्रीज तीन बैंक खातों के इस्तेमाल की नहीं मिली अनुमति
- Sonam Wangchuk की पत्नी गीतांजली को दिल्ली हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, सफदरजंग अस्पताल में ही होगा इलाज, मिलने की अनुमति रहेगी
- Cheque Bounce Case: राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, तीन महीने की जेल की सजा के साथ भरना होगा मोटा जुर्माना
- Sonam Raghuvanshi की जमानत बरकरार, मेघालय हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका की खारिज
- कलकत्ता हाईकोर्ट से ममता बनर्जी गुट को तगड़ा झटका, ऋतब्रत बनर्जी ही होंगे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष
खैर, जब बात ने काफी तूल पकड़ लिया और जज साहब के बंगले में लगी आग की लपटें न्यायपालिका तक पहुंचने लगी तो फायर ब्रिगेड ने भी मुंह खोला और सुप्रीम कोर्ट की तरफ से भी सफाई दी गई। फायर ब्रिगेड ने जज साहब के बंगले से किसी भी प्रकार का कैश मिलने से इनकार कर दिया। दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जस्टिस वर्मा के बारे में गलत बातें फैलाई जा रही हैं।
खैर, सच क्या है, यह तो आगे जांच-पड़ताल में पता चलेगा, हो सकता है न भी चले लेकिन एक आग ने इतना धुआं उठा दिया कि उसकी कालिख से काले कोट के और काले होने का खतरा मंडराने लगा। अगर यह सच हुआ तो भारत की जनता के लिए ठीक नहीं होगा।
जरा याद कीजिए, आज भी जब जनता चारों ओर से त्रस्त हो जाती है तो कोर्ट जाने की धमकी देती है। जनता को आज भी भरोसा है कि जब कोई नहीं सुनेगा तो कोर्ट सुनेगी। इसीलिए कोर्ट का बेदाग बचा रहना जरूरी है।
ईश्वर करे, जस्टिस वर्मा के घर से कैश निकलने की खबर गलत हो। ईश्वर करे, काले कोट का रंग भले ही काला हो लेकिन उस पर कभी कालिख न लगे।
बावजूद इसके इस घटना ने काफी कुछ सोचने को मजबूर कर दिया है। कहा जाता है बिना आग धुआं नहीं उठता, यहां तो आग ही आग थी, धुआं तो बाद में निकला, वह भी काला…



