पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को वक्फ बिल का समर्थन करना भारी पड़ गया। इसके विरोध में पहल जदयू के वरिष्ठ नेता डॉ. मोहम्मद कासिम अंसारी ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद मोहम्मद शाहनवाज मलिक ने भी इस्तीफा दे दिया है। वे जमुई के जिलाध्यक्ष होने के साथ ही अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव भी थे।
बुधवार देर रात लोकसभा से वक्फ बिल पारित होने के साथ ही जदयू में विरोध के स्वर उठने लगे थे। इस बात से नाराज जदयू के वरिष्ठ नेता डॉ. मोहम्मद कासिम अंसारी ने पार्टी के सभी पदों सहित प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने अपना त्यागपत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भेज दिया। उन्होंने कहा है कि उन्हें और भारत के मुसलमानों को विश्वास था कि नीतीश कुमार सेक्यूलर विचारधारा के ध्वजवाहक हैं, लेकिन अब यह विश्वास टूट गया है। डॉ. कासिम पूर्वी चंपारण जदयू चिकित्सा प्रकोष्ठ के जिला प्रवक्ता की भूमिका में थे। उन्होंने त्यागपत्र की प्रति प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा एवं जिलाध्यक्ष मंजू देवी को भी भेजी है। हम जैसे लाखों करोड़ों भारतीय मुसलमानों का अटूट विश्वास था कि आप विशुद्ध रूप से सेकुलर विचारधारा के ध्वजवाहक हैं, लेकिन अब यह यकीन टूट गया है। वक्फ बिल संसोधन अधिनियम 2024 के तअलुक से जदयू के स्टैंड से हम जैसे लाखों करोड़ों समर्पित भारतीय मुसलमानों एवं कार्यकर्ताओं को गहरा अघात लगा है।
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इसके बाद शाहनवाज मलिक ने जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को यह त्यागपत्र लिखा। उन्होंने पार्टी के प्राथमिक सदस्य एवं अन्य जिम्मेदारियों से इस्तीफा दिया है। शाहनवाज मलिक ने इसकी जानकारी जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा को भी दी है। पार्टी के अल्पसंख्यक प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ अंसारी को भी इसके बारे में लिखित तौर पर बताया है। मलिक ने अपना इस्तीफा को लिखा। मलिक ने इस्तीफे में लिखा है कि हम जैसे लाखों–करोड़ों भारतीय मुसलमानों का अटूट विश्वास था कि आप विशुद्ध रूप से सेक्युलर विचारधारा के ध्वजवाहक हैं, लेकिन अब यह यकीन टूट गया है।


