दिल्ली से पड़ा ‘डंडा’ तो मेट्रो का सफर करने पहुंच गए मंत्री, अभी तक इस प्रोजेक्ट में अड़ा रहे थे टांग, अब श्रेय लेने में जुटे

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इंदौर। शायद ही किसी को याद होगा कि आज से पहले कब इंदौर के मंत्रीजी ने मेट्रो का निरीक्षण किया होगा। शायद 30 सितंबर 2023 को आखिरी बार मेट्रो में इंदौरी नेता दिखे थे, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसके ट्रायल रन में हिस्सा लिया था। बीच में कोई गया होगा तो उसे थोड़ी देर के लिए भूल जाते हैं, लेकिन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तो कभी मेट्रो ट्रैक की तरफ दिखाई नहीं दिए। वे तो हर बैठक में इस प्रोजेक्ट में टांग अड़ाने की कोशिश में जुटे रहे। आज अचानक मंत्री जी के लाव-लश्कर को मेट्रो में सवारी करता देख सबको आश्चर्य हुआ।

उल्लेखनीय है कि इसी महीने कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम ने इंदौर मेट्रो को ओके रिपोर्टर दे दी है। सीएमआरएस ने 24-25 मार्च को ही मेट्रो का तीसरा और अंतिम निरीक्षण किया था। यहां बताना जरूरी है कि सीएमआरएस की हरी झंडी के बाद मेट्रो चलाने का कोई बहाना नहीं बचता, लेकिन नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसकी परवाह नहीं की। हर बैठक में वे इस प्रोजेक्ट को उलझाने में लगे रहे। मंत्री की तरफ से एक बार भी यह पहल नहीं की गई कि जितना हिस्सा तैयार हो गया है, उस पर कमर्शियल रन शुरू किया जाए।

पीएम मोदी के डर ने मंत्रीजी को किया एक्टिव

सूत्र बताते हैं कि इंदौर के इस रवैये को देखते हुए दिल्ली से डंडा पड़ा। यह भी कहा गया कि सीएमआरएस की रिपोर्ट के बाद मेट्रो के कमर्शियल रन को रोका नहीं जा सकता, जब तक कि कोई बहुत बड़ी बाधा न हो। दिल्ली से यह भी कहा गया कि मेट्रो चलाने में देरी होने के कारण इस प्रोजेक्ट को फाइनेंस करने वाली कंपनियों ने चिन्ता जाहिर की है। दिल्ली से यह भी कहा गया है कि इंदौर मेट्रो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखा सकते हैं। इसके बाद आनन-फानन में मेट्रो की सवारी करने की योजना बनाई गई। मंत्रीजी के साथ सांसद, महापौर तथा अन्य नेताओं ने भी इस सवारी का लुत्फ उठाया।

विजयवर्गीय ने कहा था-घाटा लेकर मेट्रो नहीं चलाएंगे

पिछले दिनों मेट्रो के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो के कमर्शियल रन को लेकर भी मंत्री विजयवर्गीय ने स्पष्ट कहा था कि घाटा लेकर हम मेट्रो नहीं चलाएंगे। विधिवत प्लानिंग के साथ उसे शुरू किया जाएगा। हम किसी तरह की जल्दबाजी में नहीं हैं। जब उनसे पूछा गया कि कमर्शियल रन की परमिशन तो मिल गई है, फिर क्यों नहीं शुरू कर रहे। तब उनका जवाब था। यह पांच किलोमीटर का बहुच छोटा पार्ट है, इस पर यात्रा कौन करेगा। अगर अभी से मेट्रो चला देंगे तो बिजली आदि का खर्च कौन उठाएगा।

अंडर ग्राउंड लाइन को लेकर बार-बार आपत्ति

इंदौर में मेट्रो की अंडर ग्राउंड लाइन बिछाने पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने लगातार आपत्ति दर्ज कराई है। कुछ दिनों पहले उन्होंने एमजी रोड पर मेट्रो के रूट का ​​​​​​निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद विजयवर्गीय ने कहा कि एमजी रोड पर हम मेट्रो अंडर ग्राउंड नहीं चाहते हैं। मेट्रो शहर के लिए बोझ नहीं बने नागरिकों के लिए उपयोगी बने। उन्होंने कहा कि यदि मेट्रो लाइन अंडर ग्राउंड डाली जाएगी तो एमजी रोड खराब हो जाएगी। हम एमजी रोड से मेट्रो के अंडर ग्राउंड जाने से मुक्ति चाहते हैं।

अधिकारियों को ठहराने लगे दोषी

मंत्री विजयवर्गीय इस प्रोजेक्ट के फ्रेम में कहीं नहीं थे। प्रोजेक्ट का काफी हिस्सा जब तैयार हो गया तो श्रेय लेने की होड़ में इसमें कूद पड़े। विजयवर्गीय ने कुछ समय पहले कहा था कि जब मेट्रो को लेकर अधिकारियों ने बैठक ली थी तो जनप्रतिनिधियों को गलत जानकारी दी गई थी, लेकिन अब ऐसा कोई भी फैसला नहीं लिया जाएगा जो शहर हित में ना हो। विजयवर्गीय ने ऐसा तब बोला जब केंद्र सरकार की तरफ से मेट्रो रुट और स्टेशनों का नोटिफिकेशन हो चुका था।

अब मंत्री कह रहे हैं, जल्द ही मिलेगी सौगात

आज यानी शनिवार को नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने महापौर पुष्य मित्र भार्गव और सांसद शंकर लालवानी के साथ मेट्रो की सवारी की। वे गांधी नगर स्टेशन से पांच किलोमीटर दूरी पर स्थित मेट्रो के स्टेशन तक पहुंचे। मंत्री विजयवर्गीय ने अफसरों से कहा कि मेट्रो के संचालन के लिए मंजूरी मिल चुकी है। अब जल्दी ही इसकी सौगात शहरवासियों को दी जाए। विजयवर्गीय ने कहा कि मेट्रो लोगों के सफर को और सुविधाजनक बनाएगी। अब अलग लक्ष्य मेट्रो का ट्रायल रन रेडिसन चौराहे तक करने का है। इसके लिए अफसरों को निर्देश दिए गए है। इस दौरान उन्होंने कहा कि मेट्रो का शुभारंभ पीएम मोदी के हाथों किया जाएगा। वहीं हमारी कोशिश है कि दिवाली तक पूरे 17 किमी के रूट पर मेट्रो चलने लगे।

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