कैबिनेट की मंजूरी के बाद सरकार ने प्रमोशन के लिए किया गजट नोटिफिकेशन, 9 साल बाद कर्मचारियों के खिलेंगे चेहरे

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भोपाल। मोहन कैबिनेट ने 17 जून को 9 साल बाद सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के प्रमोशन को मंजूरी दी थी। आज इसके लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। इसके लिए जारी नियमों में कहा गया है कि सीधी भर्ती के पदों में एससी-एसटी वर्ग को 16 और 20 फीसदी आरक्षण दिए जाने का प्रावधान है। इसलिए सरकार प्रमोशन में भी इन्हें इसी आधार पर आगे बढ़ने का मौका देने के लिए प्रतिबद्ध है।
नए जारी नियमों के अनुसार राज्य शासन की ओर से पदोन्नति से भरे जाने वाले हर कैडर के पदों को अलग से तय किया जाएगा। इसके लिए समिति द्वारा फैसला लिया जाएगा। समिति के अध्यक्ष विभाग के सचिव और विभागाध्यक्ष सचिव होंगे। समिति में उपसचिव या उससे अधिक ऊंचे पद का जीएडी का एक अफसर भी शामिल होगा। इसके साथ ही इन तीनों सदस्यों में से कोई एक सदस्य एससी वर्ग का नहीं होने पर एससी वर्ग का एक सेकेंड क्लास अधिकारी भी समिति में शामिल किया जाएगा। पहले तीन सदस्यों में से कोई सदस्य एसटी वर्ग का न होने पर सेकेंड क्लास कैटेगरी का एसटी वर्ग का एक अधिकारी भी कमेटी में शामिल होगा। फैसला न होने की हालत में ये कमेटी काम करेगी अगर विभागीय समिति द्वारा किसी मामले में अलग फैसला लिया जाता है तो ऐसे मामले में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनेगी, जिसमें विभाग के सचिव और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव शामिल होंगे।
कमेटी 2028 तक का करेगी फैसला
नियमों में कहा गया है कि जो कमेटी बनाई जाएगी वह साल 2024 से 2028 तक की विभागीय पदोन्नति समिति के लिए लागू मानी जाएगी। पांच साल के बाद इस कमेटी को फिर नए सिरे से बदला जा सकेगा। कर्मचारी की सेवा अवधि की गणना कर्मचारी की सेवा की अवधि की गणना उस अवधि तक की जाएगी जिस चयन वर्ष की पदोन्नति के लिए समिति की बैठक की जा रही है। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर कोई कर्मचारी-अधिकारी दिसंबर 2021 में फीडर संवर्ग या सेवा के पद में आया है तो 31 दिसंबर 2025 को उसकी पांच वर्ष की प्रमोशन योग्य सेवा पूरी हो जाएगी।
सीआर निर्धारण के लिए यह निर्देश
नियमों में कहा गया है कि कर्मचारी अधिकारी की सीआर का निर्धारण जिस चयन वर्ष की पदोन्नति के लिए समिति की बैठक की जा रही है, उससे ठीक 5 वित्तीय वर्षों में उपयुक्त होनी चाहिए। अगर 5 साल की सीआर में से अधिकतम दो सीआर किसी वजह से उपलब्ध नहीं है तो विभागीय पदोन्नति समिति ठीक 2 पुराने साल यानी कुल सात साल के सीआर को पदोन्नति के लिए आधार बना सकेगी। साल 2026 में होने वाली विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक के लिए वित्तीय वर्ष 2024-2025, वर्ष 2023-2024, वर्ष 2022-2023, वर्ष 2021-2022 वर्ष 2020-2021 के सीआर को जांचा जाएगा। इन वर्षों में से कोई भी दो वर्ष का गोपनीय प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं है, तो ऐसी स्थिति में वित्तीय वर्ष 2019-2020 और वर्ष 2018-2019 के गोपनीय प्रतिवेदनों पर विचार किया जा सकेगा। यहां यह भी स्पष्ट किया गया है कि आखिरी दो सालों में से कम से कम एक साल की सीआर अनिवार्य होगी।
वरीयता का भी रखा जाएगा ध्यान
पदोन्नति के मामले में भी खाली पदों की गणना सीनियॉरिटी और पात्रता के लिए तय फॉर्मूले के आधार पर की जाएगी यानी किसी संवर्ग में कुल पद संख्या 25 है, जिसमें एसटी के 5 पद आरक्षित हैं और एससी के 4 पद आरक्षित हैं।इसमें पहले से एसटी वर्ग के दो और एससी वर्ग के दो कर्मचारी काम कर रहे हैं तो उस संवर्ग में कुल 11 पद खाली हैं। ऐसी स्थिति में एसटी वर्ग के 3 और एससी वर्ग के दो पद पदोन्नति के लिए आरक्षित होंगे। इन पदों को जोड़ने के बाद बाकी 6 पदों पर अनारक्षित प्रमोशन होंगे।

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