अमेरिका का सख्त रुख: रूस से व्यापार करने वाले देशों पर 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव, भारत पर पड़ सकता है असर

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अमेरिका का सख्त रुख: रूस से व्यापार करने वाले देशों पर 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव, भारत पर पड़ सकता है असर

रूस-यूक्रेन युद्ध के तीसरे साल में अमेरिका ने रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर कड़ा रुख अपनाना शुरू कर दिया है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक विधेयक (बिल) पेश किया है, जिसमें रूस से व्यापार करने वाले देशों पर 500% टैरिफ लगाने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने जुलाई की छुट्टियों के बाद इस बिल को वोटिंग के लिए पेश करने की मंजूरी दे दी है।

U.S. Senator Lindsey Graham says he tested positive for COVID-19 | Reuters

भारत-चीन पर खास निशाना

ग्राहम का कहना है कि भारत और चीन मिलकर रूस का करीब 70% तेल खरीदते हैं, जिससे रूस की जंगी मशीनरी को आर्थिक मदद मिल रही है। इस बिल के ज़रिए अमेरिका इन देशों पर दबाव बनाना चाहता है ताकि वे रूस से व्यापार बंद कर दें।

बिल के प्रावधान

  • रूस से तेल और अन्य वस्तुएं खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ
  • ट्रंप को वीटो और कार्यान्वयन का विशेष अधिकार
  • अब तक 84 सीनेटरों का समर्थन मिल चुका है

ग्राहम ने स्पष्ट किया कि यह बिल ट्रंप को एक नया आर्थिक हथियार देगा, जो उन्हें अभी तक प्राप्त नहीं है।

भारत के लिए खतरे की घंटी

भारत रूस से सस्ते दामों पर तेल खरीदता रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने डॉलर की बजाय रूपया-रूबल प्रणाली के तहत रूस से व्यापार बढ़ाया।

  • युद्ध से पहले भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी केवल 1% थी।
  • अब यह बढ़कर 40-44% तक पहुंच गई है।
  • जून 2025 में भारत ने 2-2.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल खरीदने की योजना बनाई — दो वर्षों में सबसे उच्चतम स्तर।

अगर यह विधेयक पारित हो जाता है और टैरिफ लागू होता है, तो अमेरिका में भारत से आने वाले सामान पर भारी टैक्स लगेगा। इससे भारत का निर्यात प्रभावित हो सकता है, हालांकि दोनों देशों के बीच एक व्यापार समझौता अभी वार्ता के दौर में है जो संभावित राहत दे सकता है।

रूस की तीखी प्रतिक्रिया

क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने बिल की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, “सीनेटर ग्राहम की रूस-विरोधी सोच जगजाहिर है। वे रसोफोबिया के झंडाबरदार हैं।” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह के प्रतिबंध वास्तव में यूक्रेन युद्ध के समाधान में कोई मदद करेंगे।

अगर यह प्रस्तावित कानून पास होता है, तो अमेरिका के साथ व्यापार करने वाले देशों विशेष रूप से भारत और चीन के लिए यह एक आर्थिक झटका हो सकता है। भारत के लिए यह कूटनीतिक संतुलन का बड़ा इम्तिहान बन सकता है, जिसमें उसे ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंधों के बीच संतुलन साधना होगा।

Abhilash Shukla (Editor)
Abhilash Shukla (Editor)http://www.hbtvnews.com
Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

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