चातुर्मास आरंभ: चार महीने तक विवाह और मांगलिक कार्यों पर विराम
आज से चातुर्मास की शुरुआत हो गई है, जिसके साथ ही विवाह, गृहप्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर आगामी चार महीनों तक रोक लग गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं, और यह स्थिति कार्तिक शुक्ल एकादशी (देव प्रबोधिनी एकादशी) तक बनी रहती है।
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इस वर्ष 6 जुलाई से 2 नवंबर तक का समय चातुर्मास के रूप में माना जाएगा। इन चार महीनों के दौरान श्रीहरि विष्णु विश्राम में रहते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव द्वारा किया जाता है।
देव उठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही पुनः शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। तब तक सभी विवाह, उपनयन संस्कार, गृहप्रवेश, भूमि पूजन आदि मांगलिक कार्यों को स्थगित रखा जाता है।
यह काल आध्यात्मिक साधना, व्रत और संयम का समय माना जाता है, जिसमें धार्मिक आयोजनों और भक्ति से भगवान को प्रसन्न करने की परंपरा निभाई जाती है।


