संघ प्रमुख मोहन भागवत जी क्या बताएंगे-11 साल से केंद्र में और 22 साल से मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार, फिर शिक्षा और स्वास्थ्य कमर्शियल किसने किया?

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इंदौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत आज इंदौर में रहे। संघ प्रमुख ने रविवार को इंदौर में माधव सृष्टि के कैंसर केयर सेंटर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि देश में आज शिक्षा और स्वास्थ्य आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गए हैं। इन दोनों ही सेवाओं को कमर्शियल बना दिया गया है।

स्वास्थ्य और शिक्षा सहज, सुलभ और ही सस्ती कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा ये दो विषय ऐसे हैं। आज के समय में ये समाज के लिए बहुत बड़ी आवश्यकता बन गई है, लेकिन दुर्भाग्य ऐसा है कि ये दोनों बातें आज सामान्य व्यक्ति के पहुंच से बाहर है। उसकी आर्थिक सामर्थ्य की पहुंच के बाहर है। ये सहज, सुलभ नहीं रही और सस्ती भी नहीं है। भागवत ने कहा क ये सामान्य व्यक्ति की पहुंच के बाहर इसलिए हो जाती है कि पहले ये दोनों काम सेवा के नाते किए जाते थे। आज इसको भी कमर्शियल बना दिया गया है। आज दोनों महंगे होने से हर व्यक्ति के बस में नहीं हैं।

मोहन भागवत जी के इस वक्तव्य पर जनता का सवाल यह है कि केंद्र में 11 साल से आपके द्वारा समर्थित भाजपा की सरकार है। मध्यप्रदेश में 22 साल से जनता ने भाजपा को सत्ता पर काबिज कर रखा है। बीच में थोड़े समय के लिए कांग्रेस आई थी, लेकिन आपने उसमें तोड़फोड़ मचवा कर फिर भाजपा की सरकार बनवा दी थी। तब से निरंतर यह सिलसिला जारी है। फिर आम जनता शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में निजी हाथों को लूटने के लिए क्यों छोड़ दी गई।

जायज है आपकी चिन्ता, लेकिन जिम्मेदार कौन

आज के आयोजन में आपने ऐसे कई उदाहरण भी दिए। आपने कहा कि मैं बचपन में एक बार मलेरिया के कारण बीमार पड़ा और तीन दिन स्कूल नहीं गया तो मेरे शिक्षक मेरे घर आए और हालत जानी। फिर दूसरे दिन भी आए। वे जंगल में जाकर मेरे लिए कुछ जड़ी बूटी लाए। उन्होंने मेरे पिताजी को बताया कि इसका काढ़ा पिलाइए यह जल्दी ठीक हो जाएगा। आपने कहा कि यह शिक्षक का काम नहीं था, जबकि सरकारी स्कूल था। उन्हें इसका वेतन नहीं मिलता था। शिक्षक ने यह सर्वभाव से किया क्योंकि तब पढ़ाना आजीविका का साधन नहीं था। दरअसल तब छात्र पढ़े यह शिक्षक की जिम्मेदारी होती थी। अब ऐसा क्या हो गया। क्या सरकार का शिक्षा तंत्र से नियंत्रण हट गया या सरकार को निजी स्कूल ज्यादा भाने लगे?

चिकित्सक क्यों नहीं रहे सेवाभावी

आपने कहा कि पहले चिकित्सक को पता चला कि किसी घर में कोई बीमार है तो बिना बुलाए पहुंचते थे। जब तक संबंधित ठीक नहीं होता था, तब तक विश्राम नहीं करते थे क्योंकि चिकित्सा करना एक कर्त्तव्य है। अब ऐसा है कि कितना खर्च होता है। इसका हिसाब करना पड़ता है और आवश्यकता तो वही रही। डॉक्टर मरीजों से संवाद कर उन्हें हिम्मत देते थे भागवत ने कहा कि पहले डॉक्टर मरीजों से संवाद कर उन्हें हिम्मत देते थे। उन्होंने एक किस्सा सुनाया कि पहले डॉक्टर जिनका मरीजों की स्थिति से कोई संबंध नहीं होता था, लेकिन फिर भी वे पूछताछ करते थे, उन्हें हिम्मत थे। भागवत सर आम जनता का आपसे सवाल है कि अब चिकित्सक इतने सेवाभावी क्यों नहीं रहे? क्यों सरकारी अस्पताल के मरीजों को अपने निजी अस्पताल में चिकित्सक रेफर कर रहे हैं? क्यों सरकारी अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक निजी अस्पतालों में सेवा दे रहे हैं? इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

अब आप यह मत कहना कि सरकार भाजपा की

जब भी कोई ऐसा मामला होता है तो संघ की तरफ से यही कहा जाता है कि भाजपा एक स्वतंत्र संगठन है, लेकिन यह किसी से छुपा नहीं कि इस पर किसका नियंत्रण है। अगर आप के विचारों के अनुरूप भाजपा की सरकार काम नहीं कर रही तो चुनावों में आप अपने स्वयंसेवकों को मैदान में क्यों उतार देते हैं? जो आपके विचारों को नहीं अपना रहे उसे पीएम और सीएम की कुर्सी पर बिठाते क्यों हैं? भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक का फैसला जब नागपुर से होता है तो ऐसा क्यों हो रहा?

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