चुघ ने फर्जी एनओसी पर बेच दी सी-21 बिजनेस पार्क की जमीन, पिंटू छाबड़ा ने इसी आधार पर ले ली अनुमति, आईडीए ने जांच बिठाई, फिर भी प्यार बरसा रहा निगम

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इंदौर। तृष्णा गृह निर्माण संस्था की विवादित जमीन पर तने सी-21 बिजनेस पार्क की जमीन की रजिस्ट्री के लिए चुघ परिवार ने आईडीए की फर्जी एनओसी का इस्तेमाल किया। इसी फर्जी एनओसी के आधार पर जमीन का डायवर्शन हुआ और मॉल माफिया पिंटू छाबड़ा ने सी-21 बिजनेस पार्क का नक्शा तक पास करा लिया। आईडीए ने अब मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। ताज्जुब की बात यह है कि जिस पिंटू छाबड़ा की कंपनी पर आईडीए ने जांच बिठाई है, उसी की दूसरी कंपनी को नगर निगम देने जा रहा रीजनल पार्क का ठेका।

आईडीए सीईओ आरपी अहिरवार ने बताया कि आईडीए की जिस एनओसी पर सी-21 बिजनेस पार्क की जमीन की सारी अनुमतियां ली गईं है, उसकी जानकारी आईडीए के रिकॉर्ड में नहीं है। वर्ष 1997, 1998 में जारी 1700 नंबर की एनओसी के आईडीए से जारी होने के प्रमाण नहीं मिले हैं। जांच में ऐसा कोई दस्तावेज नहीं मिला है, जिससे इस बात की पुष्टि हो कि यह एनओसी आईडीए ने जारी की है। सीईओ अहिरवार ने बताया कि एक कमेटी बना दी है जो इस मामले की बारीकी से जांच करेगी। आईडीए अब उन विभागों को पत्र भी लिखेगा, जहां इस एनओसी को लगाकर अनुमतियां ली गई हैं।

जमीन की रजिस्ट्री में एनओसी का जिक्र

जिस 28/2 खसरे पर यह बिजनेस पार्क बना है, वह आईडीए की स्कीम 53 का हिस्सा है। यह जमीन तृष्णा गृह निर्माण से बेबीलोन इंफ्रस्टाक्चर ने खरीदी थी। इस जमीन की पांच रजिस्ट्री है। इसकी चार रजिस्ट्री पर आईडीए के 21 दिसंबर 1998 के पत्र क्रमांक 1700 का जिक्र किया गया है। इस पत्र में कहा गया है कि यह जमीन आईडीए के किसी योजना में नहीं है। इसी तरह एक रजिस्ट्री में 20 अक्टूबर 2005 के आईडीए के पत्र क्रमांक 6864 का जिक्र किया गया है, जिसमें उल्लेख है कि यह जमीन आईडीए के किसी स्कीम में नहीं है। इनमें से कोई भी एनओसी आईडीए के रिकॉर्ड में नहीं है।

चुघ ब्रदर्स ने किया जमकर फर्जीवाड़ा

जिस जमीन पर पिंटू छाबड़ा ने सी 21 बिजनेस पार्क बनाया है, वह पांच कृषि भूमि का टुकड़ा है। यह सारी रजिस्ट्री बेबीलोन इन्फ्रास्ट्रक्चर, गुड़गांव हरियाणा के जीएम आलोक भंडारी के नाम हुई है। रजिस्ट्री चुघ परिवार ने की है और इसमें स्पष्ट तौर पर लिखा है कि यह कृषि भूमि है जो तृष्णा गृह निर्माण संस्था से खरीदी गई है। सभी रजिस्ट्रियां वर्ष 2007 में हुई हैं। रजिस्ट्री करने वालों में मोहनलाल चुघ, चुघ हाउसिंग डेवलपर्स , नीतेश कुमार पिता मोहनलाल चुघ, चुघ की ही कंपनी शिवम बिल्डर्स एंड डेवलपर्स, रीना देवी पति मोहनलाल चुघ, के नाम हैं। सारी जमीन आलोक भंडारी, जीएम बेबीलोन इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्लाट नंबर 124 सेक्टर 44, गुड़गांव, हरियाणा को बेची गई। और सबके सेल डीड पर राजेश पिता चंपालाल सिद्ध के साइन हैं।

26 लाख 74 हजार में खरीदी, 11 करोड़ में बेची

चुघ ने गृह निर्माण संस्था की यह जमीन 26 लाख 74 हजार में खरीदकर करीब 11 करोड़ में बेबीलोन को बेच दी। अब जरा अनुमान लगाइए की कितना गुना फायदा हो गया। इसके बाद भी कोई भी जांच एजेंसी या विभाग नहीं जगा, जबकि गृह निर्माण संस्था की जमीन को बिना लाभ-हानि के बेचा जाता है। चुघ साहब जमीन के इतने बड़े जादूगर हैं कि हाल ही में एक कॉलोनी के मामले में ईओडब्ल्यू ने उन पर केस भी दर्ज किया है।

राजस्व विभाग ने कैसे किया डायवर्शन?

चुघ ब्रदर्स ने न केवल सारी रजिस्ट्री में फर्जी एनओसी लगा दी, बल्कि इन्ही फर्जी एनओसी के माध्यम से जमीन का डायवर्शन भी करा लिया गया। अब यह भी जांच का विषय है कि कलेक्टर कार्यालय में बैठे उस समय के तत्कालीन राजस्व अधिकारियों ने इस फर्जी एनओसी पर डायवर्शन कैसे कर दिया। जबकि उस समय आईडीए द्वारा एसडीओ से इस जमीन को लेकर पत्र व्यवहार भी चल रहा था। अब जब गृह मंत्रालय के निर्देश पर सभी विभाग जांच जुट गए हैं तो कलेक्टर को भी यह जांच करानी चाहिए कि आखिर फर्जी एनओसी के आधार पर डायवर्शन कैसे हो गया?

फर्जीवाड़ा करने वाले को रीजनल पार्क का टेंडर

जिस बिल्डिंग को पूरे फर्जीवाड़े से तैयार किया गया है और जिसके कर्ताधर्ता जमीनों के जादूगर हैं, उन्हीं की कंपनी को नगर निगम रीजनल पार्क का टेंडर देने जा रहा है। ताज्जुब तो तब होता है कि इतना फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद भी नगर निगम सी-21 बिजनेस पार्क पर ताला लगाने की बजाए, उसी फर्जी बिल्डिंग में स्थित कंपनी को रीजनल पार्क 27 साल के लिए सौंपने जा रहा है। महापौरजी, क्या आप तक इस कंपनी के फर्जीवाड़े की जानकारी नहीं पहुंची? जिस कंपनी के मालिक फर्जीवाड़े से पूरे शहर में मॉल और होटल खड़ा कर सकते हैं, उनसे आप रीजनल पार्क को कैसे बचाओगे?

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