Iran-US Tension: खाड़ी में फंसे 11,000 नाविकों को निकालने की तैयारी, परमाणु निरीक्षण पर ईरान और अमेरिका के दावों में बड़ा टकराव

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खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच हालिया तनाव के बाद फंसे 11,000 से अधिक नाविकों को सुरक्षित निकालने की बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने इस विशाल अभियान की घोषणा की है, जबकि दूसरी ओर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और तेहरान के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।

आईएमओ के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज ने बताया कि नाविकों को निकालने का यह ऑपरेशन ईरान, ओमान, अमेरिका और क्षेत्र के अन्य तटीय देशों के सहयोग से चलाया जाएगा। खाड़ी में बढ़ते सैन्य तनाव और समुद्री सुरक्षा चिंताओं के कारण हजारों नाविक लंबे समय से फंसे हुए हैं।

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इस बीच, पिछले सप्ताह संघर्ष को कम करने के लिए एक अंतरिम समझौते (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद अभी भी बने हुए हैं।

अमेरिका का दावा है कि समझौते में यह स्पष्ट रूप से शामिल है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) करेगी। 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान ने भविष्य में उच्च स्तरीय परमाणु निरीक्षणों को पूरी तरह स्वीकार कर लिया है।

ट्रंप ने लिखा, “ईरान ने अंतिम रूप से व्यापक परमाणु निरीक्षणों पर सहमति दे दी है। इससे परमाणु पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित होगी।”

हालांकि ट्रंप के इस दावे के कुछ ही समय पहले ईरान ने अलग रुख अपनाया। तेहरान ने कहा कि उन परमाणु स्थलों का निरीक्षण नहीं किया जाएगा जिन्हें पिछले वर्ष अमेरिका और इसराइल की बमबारी में भारी नुकसान पहुंचा था।

ईरान के बयान के जवाब में एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरानी पक्ष ने अपने परमाणु कार्यक्रम के अवशेषों पर आईएईए निरीक्षण की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की है। अधिकारी ने कहा कि ईरान अपने नागरिकों से जो कहना चाहता है, वह कह सकता है, लेकिन वास्तविक समझौता अलग है।

तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पाकिस्तान दौरे के दौरान स्पष्ट कर दिया कि ईरान अपनी रक्षा क्षमताओं पर किसी भी देश के साथ किसी भी परिस्थिति में बातचीत नहीं करेगा।

वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बैलिस्टिक मिसाइलों को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने साफ किया कि समझौते में मिसाइल कार्यक्रम का कोई उल्लेख नहीं है और इस मुद्दे पर किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए।

इन घटनाक्रमों ने एक बार फिर मध्य पूर्व की राजनीति और वैश्विक सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। सवाल यह है कि क्या परमाणु निरीक्षण पर जारी विवाद भविष्य में फिर से बड़े टकराव का कारण बन सकता है, या यह समझौता क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में पहला कदम साबित होगा?

सबसे बड़ा सवाल:
क्या अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु निरीक्षण को लेकर सचमुच सहमति बन गई है, या दोनों देश दुनिया के सामने अलग-अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं? क्या यह समझौता मध्य पूर्व में स्थायी शांति ला पाएगा?

आपकी राय क्या है? कमेंट में जरूर बताएं।

Abhilash Shukla (Editor)
Abhilash Shukla (Editor)http://www.hbtvnews.com
Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

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