केदारनाथ धाम में ‘मौत का हेलीकॉप्टर’, कमाई के लिए लोगों की जान जोखिम में डाल रही हैं कंपनियां

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इंदौर। केदारनाथ धाम जाना हर हिंदू का सपना है। चूंकि चढ़ाई ज्यादा है, इसलिए लोग हेलीकॉप्टर का सहारा लेते हैं, लेकिन यह सुविधा अब जानलेवा साबित हो रही है। रविवार को ही एक मासूम बच्चे सहित सात लोगों की जान चली गई। यात्रा शुरू होने के बाद से लगातार कई हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। विडंबना यह कि अपनी कमाई के लिए कंपनियां लोगों की जान जोखिम में डाल रही हैं। रविवार के हादसे में भी आर्यन कंपनी की लापरवाही पाई गई है।

14 वर्षों में 13 दुर्घटनाएं, 41 मौत

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष चारधाम यात्रा शुरूआत से अब तक 5 हेली दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें एक बद्रीनाथ में और दूसरी गंगोत्री धाम जाते हुए उत्तरकाशी के पास एमरजेंसी लैंडिग हुई थी और तीन दुर्घटनाएं केदारनाथ धाम में हो चुकी हैं। इसमें गत 17 मई केदारनाथ धाम में हेली की इमरजेंसी लैंडिंग एवं बडासू हेलीपैड से उड़ान भरते समय हेली क्रैश में कोई जनहानि नहीं हुई है, लेकिन आज यानी रविवार की दुर्घटना में सात लोग मारे गए हैं। इस वर्ष यात्रा शुरू होने के बाद से दो हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी हो चुकी है। बताया जाता है कि पिछले 14 वर्षों में 13 हेली दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें 41 की मौत हो चुकी है।

हर दिन 215 उड़ानें

केदारनाथ धाम के लिए लिए गुप्तकाशी, फाटा और सिसिरी से हेलीकॉप्टर से उड़ान भरते हैं। फिलहाल यहा कुल 8 हेली कंपनियां सेवाएं दे रही हैं। इन कंपनियों के हेलीकॉप्टर के लिए कुल 9 हैलीपैड बनाए गए हैं। पिछले दो महीने से यह सभी कंपनियां मिलकर एक दिन में औसतन 215 उड़ानें भर रही हैं। मौसम ठीक होने पर एक दिन में अधिकतम 290 उड़ानें भरी गई हैं। हेलीकॉप्टर में पायलट को मिलाकर अधिकतम 6 लोग बैठ सकते हैं। गौरीकुंड में जो हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ उसमें 7 लोग थे, क्योंकि एक 2 साल का बच्चा था जिसका वजन 10 किलो था।

डीजीसीए ने उड़ानों की संख्या घटाने को कहा था

डीजीसीए ने एक हफ्ते पहले उड़ानों की संख्या कम करने के निर्देश दिए थे। इस गाइडलाइंस के मुताबिक 1 घंटे में केवल दो उड़ानें ही भरी जाएंगी। अगर मौसम ठीक होता है तो एक घंटे में अधिकतम तीन उड़ानें भरी जा सकती हैं। हेलीकॉप्टर में फ्यूल का वजन और टेंपरेचर देख कर ही यात्रियों को बैठाया जा सकता है। अगर फ्यूल कम है तो अधिकतम 6 लोग बैठेंगे। अगर 45 किलो का फ्यूल पूरा है तो यात्री कम बैठेंगे।

हेलीपैड की हालत बस स्टैंड जैसी

डीजीसीए की ऑडिट में हेलीपैड की हालत भी खराब पाई गई थी। डीजीसीए ने ऑडिट में पाया था कि कंपनियां तीर्थयात्रियों को ऐसे ले जा रही हैं, जैसे वहां हेलीपैड न होकर कोई बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन से है। डीजीसीए ने इसी 9 जून को चार धाम यात्रा में श्रद्धालुओं को हेलीकॉप्टर की सर्विस दे रहीं 9 एविएशन कंपनियों में से एक केस्ट्रल एविएशन की सेवाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई थी। डीजीसीए ने यह भी कहा था कि चार धाम यात्रा के लिए अब हेलीकॉप्टर सेवा दे रहीं कंपनियां मनमर्जी से टेक ऑफ नहीं कर सकेंगी। इनकी उड़ानों में 35 फीसदी तक की कटौती कर दी गई।

अब सीएम जता रहे चिन्ता

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने केदारनाथ हेलीकॉप्टर हादसे के बाद गड़बड़ी के आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की बात कही है। अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। गुप्तकाशी के पास हेलीकॉप्टर हादसे में सात मौतों पर सीएम धामी ने दुख व्यक्त किया। इसके बाद दोषियों के खिलाफ वे एक्शन मोड में नजर आए हैं।

कमाई के लिए जान जोखिम में

अधिकांश कंपनियां अपनी कमाई के लिए नियमों की परवाह किए बिना हेलीकॉप्टर का संचालन कर रही हैं। रविवार की घटना में भी कंपनी की लापरवाही सामने आई है। हादसे के बाद हेलीकॉप्टर का संचालन करने वाली कंपनी आर्यन के मैनेजर विकास तोमर और एकाउंटेबल मैनेजर कौशिक पाठक के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें साफ लिखा गया है कि डीजीसीए और यूसीएडीए द्वारा बनाई एसओपी का पालन नहीं किया गया है। प्रशासन के अनुसार कंपनी को हेलीकॉप्टर उड़ान के लिए सुबह 6 बजे से 7 बजे तक का स्लॉट आवंटित किया गया था ,जबकि ये हादसा शुभ साढ़े 5 बजे गौरीकुंड के ऊपर स्थित गौरीमाई खर्क के जंगल क्षेत्र में हुआ, इसका मतलब कंपनी ने स्लॉट से पूर्व उड़ान भरकर नियमों को तोड़ा है। हादसे के समय मौसम खराब था घना कोहरा और बादल छाए हुए थे इसके बावजूद भी उड़ान भरी गई

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