नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एसआईआर को लेकर एक बार फिर भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जहां–जहां एसआईआर हो रहा है, वहां–वहां वोट चोरी देखी जा सकती है। इतना ही नहीं जहां भाजपा को हार दिखती है, वहां वोटर ही सिस्टम से गायब कर दिया जा रहा है।
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि जहां–जहां एसआईआर, वहां–वहां वोट चोरी। गुजरात में एसआईआर के नाम पर जो कुछ किया जा रहा है, वह किसी भी तरह की प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है। यह सुनियोजित, संगठित और रणनीतिक वोट चोरी है। सबसे चौंकाने वाली और खतरनाक बात यह है कि एक ही नाम से हजारों–हजार आपत्तियां दर्ज की गईं। राहुल गांधी ने कहा कि चुन–चुनकर खास वर्गों और कांग्रेस समर्थक बूथों के वोट काटे गए। जहां भाजपा को हार दिखती है, वहां मतदाता ही सिस्टम से गायब कर दिए जाते हैं।
👉 यह भी पढ़ें:
- Rahul Gandhi Birthday: राजनीतिक मतभेदों के बीच PM मोदी का खास संदेश! आखिर क्या लिखा जिसने बटोरी सुर्खियां?
- INDIA Alliance में बड़ा बवाल! DMK का राहुल गांधी पर सबसे बड़ा हमला, कहा- ‘राहुल एक बड़ा मजाक’, क्या टूटने की कगार पर विपक्षी गठबंधन?
- सीबीएसई ऑन स्क्रीन मार्किंग विवाद पर राहुल गांधी और धर्मेंद्र प्रधान में भिड़ंत, दोनों ने एक-दूसरे पर किया जुबानी हमला
- मोदी एक साल में जाएंगे’: राहुल गांधी के बयान से सियासत गरम, बीजेपी का पलटवार
- राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर भाजपा का बड़ा हमला: “11 करोड़ की आय में 60 करोड़ का खर्च कैसे?”
- सीबीआई निदेशक चयन पर राहुल गांधी का सरकार पर बड़ा हमला, बोले — “विपक्ष कोई रबर स्टैम्प नहीं”
राहुल गांधी ने कहा कि एसआईआर को एक व्यक्ति, एक वोट के संवैधानिक अधिकार को खत्म करने के हथियार में बदल दिया गया है ताकि जनता नहीं, भजापा तय करे कि सत्ता में कौन रहेगा। सबसे गंभीर सच्चाई यह है कि चुनाव आयोग अब लोकतंत्र का रक्षक नहीं, बल्कि इस वोट चोरी की साजिश का मुख्य सहभागी बन चुका है।
गुजरात कांग्रेस ने पोस्ट किए दस्तावेज
गुजरात कांग्रेस ने एक्स की पोस्ट में जिलेवार लिस्ट भी जारी की है। कांग्रेस का आरोप है कि नेता विपक्ष राहुल गांधी द्वारा वोट चोरी का खुलासा होने के बाद भाजपा ने उसका नेक्स्ट लेवल चुनाव चोरी का मॉडल अपना लिया है। चुनाव चोरी मतलब आपके वोट अधिकार की चोरी। इसका नया खेल गुजरात में सामने आया है। नियमानुसार चुनाव आयोग ने एसआईआर के बाद ड्राफ्ट लिस्ट जारी कर आपत्तियां लेना शुरू किया और 18 जनवरी अंतिम तारीख घोषित कर दी। 15 जनवरी तक गिनी–चुनी आपत्तियां आई लेकिन असली खेल उसके बाद शुरू हुआ, षडयंत्र के तहत अचानक लाखों आपत्तियां ( फॉर्म 7) जमा करा दी जाती है।



