बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद हिन्दुओं पर हो रहा अत्याचार, क्यों मौन हैं भारत के विपक्षी नेता?

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-डॉ. आशीष वशिष्ठ, स्वतंत्र पत्रकार

बांग्लादेश में शेख हसीना के इस्तीफा देकर भागने के बाद देश के अंदर हिंदुओं के ऊपर अत्याचार शुरू हो गया है। बांग्लादेश में जगह-जगह पर हिंदू मंदिरों और हिंदू समुदाय पर हमले की खबरें आ रही हैं। बांग्लादेश से आ रही रिपोर्ट से पता चलता है कि हिंदुओं के घरों और मंदिरों को निशाना बनाया गया है। इस्कॉन और काली मंदिर पर हमले हुए हैं, जिसके बाद हिंदुओं को जान बचाने के लिए छिपना पड़ा है। मोदी सरकार पूरे मामले में पर नजर बनाए हुए हैं। लेकिन इन सबके बीच विपक्ष का बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार, लूटपाट और हिंदू मंदिरों पर हुए हमलों पर एक शब्द न बोलना कई प्रश्न खड़े करता है।

बांग्लादेश में एक हिंदू संगठन ने दावा किया है कि शेख हसीना के हटने के बाद से सैकड़ों हिंदू घरों, प्रतिष्ठानों और मंदिरों पर हमले किए गए। बांग्लादेश की 170 मिलियन आबादी में करीब 8 फीसदी हिंदू हैं और उन्होंने ऐतिहासिक रूप से शेख हसीना की आवामी लीग पार्टी को सपोर्ट किया है, जो मुख्य रूप से धर्मनिरपेक्ष के रूप में जानी जाती है। इसके उलट विपक्षी गठबंधन में एक कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी शामिल है।

बांग्लादेश के 27 जिलों में घरों में घुसकर हिंदुओं के साथ मारपीट की जा रही है। हिंदुओं के घरों में आग लगाई जा रही और उनकी दुकानें लूटी जा रही है। हिंदुओं का बेरहमी से कत्लेआम हो रहा है। मंदिरों को आग के हवाले किया जा रहा है। हिंसा की आग में जल रहे बांग्लादेश में जगह- जगह धुआं उठ रहा है। हिंदुओं की बस्तियों में चीख-पुकार मची है। पूरे देश में दंगाइयों ने आतंक का तांडव मचा दिया है। दंगाइयों ने बांग्लादेश के खुलना डिवीजन में एक इस्कॉन मंदिर को फूंक दिया। एक काली मंदिर में भी तोड़फोड़ के बाद आग लगा दी।

हिंदुओं पर हो रहे हमले और अत्याचार की घटनाओं के बाद भी विपक्ष ने बेशर्मी का चोला धारण कर रखा है। इंडी गठबंधन के किसी एक भी नेता ने हिंदुओं पर हो रहे हमले की खुलकर निंदा नहीं की। उलटे इन राजनीतिक दलों के समर्थक और सोशल मीडिया की टीमें ऐसे संदेश लगातार प्रसासित और प्रचारित कर रहे हैं कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार की खबरें फर्जी हैं। ऐसी खबरें तो देश की जनता को भड़काने के लिए स्वयं हिंदूवादी संगठन फैला रहे हैं। बेशर्मी की हद तक इनकी राजनीति गिर चुकी है।

वहीं बांग्लादेश में तखता पलट की घटना के बाद से ही सोशल मीडिया पर ऐसे मैसेज की बाढ़ सी आ गई, जिसमें धमकी भरे अंदाज में समझाया गया कि ‘देश की जनता तानाशाह का तख्तापलट कर देती हैं। डरा नहीं रहा हूं, बस बता रहा हूं।’ इस पूरे मामले में देश की सबसे पुराने और सबसे ज्यादा शासन करने वाले दल कांग्रेस की चुप्पी हैरानी से ज्यादा चिंता का विषय है। 2024 के चुनाव में जिस तरह कांग्रेस और इंडी गठबंधन में शामिल दलों ने मुस्लिम तुष्टिकरण को हवा दी,उससे आने वाले समय में हिंदुओं की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

इंडी गठबंधन के किसी भी नेता ने यहां तक कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी तक ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर एक शब्द बोला और सोशल मीडिया पर लिखा नहीं। मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाले दल और नेता हिंदुओं से जुड़े हर मुद्दे पर प्राय: चुप्पी साध लेते हैं। बांग्लादेश में जो भीड़ अत्याचार कर रही है, वो मुस्लिम है। उनके निशाने पर हिंदू जनता और उनके मंदिर, दुकान और घर हैं। बावजूद इसके बड़ी बेशर्मी से ऐसे दलों के चेहते पत्रकार, यू टयूबर और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर मुस्लिम आतंकियों, दहशतगर्दों और हिंसक भीड़ का समर्थन करते दिखाई देते हैं। इन आतंकियों, उपद्रवियों और गिरी मानसिकता वाली भीड़ को आंदोलनकारी साबित करने में जुटे हैं। वैसे भी इनके लिए आतंकी साहब, मासूम और राह भटके हुए युवा ही होते हैं।

पड़ोसी देश पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश में भी दशकों से हिंदू समुदाय के खिलाफ उत्पीड़न जारी है, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश में हिंदू आबादी में तेजी से कमी आई है। 1971 में 22 प्रतिशत से घटकर 2022 में हिंदू आबादी 7.9 प्रतिशत हो गई है।

पिछले कुछ वर्षों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ बलात्कार, हत्या, हिंदू धार्मिक संस्थानों पर हमले, जमीन हड़पना, जबरन मतांतरण एक सामान्य घटना बन गई थी। आंकड़ों के आलोक में बात की जाए तो वर्ष 2022 में बांग्लादेश में इस्लामवादियों द्वारा 154 हिंदू लोगों की हत्या कर दी गई और 424 हिंदू लोगों को इस्लामिक बदमाशों द्वारा मारने का प्रयास किया गया। इसी अवधि के दौरान 849 लोगों को जान से मारने की धमकी दी गई और उन हमलों में 360 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इनमें से 62 लोग अब भी लापता हैं।

इसी साल बांग्लादेश में 39 हिंदू महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया और 27 हिंदू महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। 17 हिंदू महिलाओं की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई और 55 अन्य महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और बलात्कार करने का प्रयास किया गया। बांग्लादेश में 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2022 के दौरान 152 हिंदू महिलाओं को जबरन इस्लाम कबूल कराया गया।

बात वर्ष 2021 की करें तो इस वर्ष भी बांग्लादेश में 46 हिंदू महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया, और 411 से अधिक हिंदू महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की गई। 32 हिंदू लोगों को कट्टरपंथियों द्वारा गोमांस खाने के लिए मजबूर किया गया और उसी वर्ष 252 हिंदुओं को मार दिया गया।
बांग्लादेश हो या फिर पाकिस्तान कहीं भी हिंदुओं के साथ अत्याचार, उत्पीड़न, बलात्कार, धर्मांतरण, मंदिरों पर हमले और लूटपाट की किसी भी घटना पर विपक्ष की जुबान बंद ही रहती है। मुस्लिम व्यक्ति का नाम अपराधी, आतंकी और उपद्रवी के तौर पर सामने आते ही कांग्रेस समेत मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले तमाम राजनीतिक दलों और नेताओं को सांप सूंघ जाता है।

इन नेताओं के आंसू गाजा में हो रहे हमलों और अत्याचार पर तो निकलते हैं, लेकिन बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले और अत्याचार पर इनके मुंह से हमदर्दी के दो शब्द नहीं निकलते। यही इनका दोगलापन और दोहरा व्यवहार है, जिसे ये गंगा जमुनी तहजीब और फर्जी सेक्युलरिज्म की आड़ में छुपाते हैं। पिछले कई सालों से देश में कई दलों के नेताओं ने सनातन धर्म का अपमान, हिंदुओं के आराध्यों के बारे में अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी और बयान दिये हैं। लेकिन किसी भी मुद्दे पर इंडी गठबंधन ने ऐसे नेताओं की निंदा नहीं की। राजनीतिक दलों ने ये उनका व्यक्तिगत बयान है कह कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के दिल में हिंदुओं के प्रति कितनी नफरत भरी है, यह एक नहीं, कई बार उजागर हुआ है। यह तुष्टिकरण की राजनीति की पराकाष्ठा ही है कि वे हिंदुओं के लिए बार-बार अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उन्हें भला-बुरा कहते हैं और हिंसक बताते हैं। यहां तक कि हिंदू देवी-देवताओं का अपमान तक करते हैं। पहले राहुल गांधी ने शक्ति का संहार करने की बात कही थी और अब धन की देवी लक्ष्मी और ज्ञान की देवी सरस्वती जिस कमल पर विराजती हैं, उसके बारे में ही संसद में अनाप-शनाप बोला।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि अपने पूर्वी पड़ोसी मित्र देश बांग्लादेश में उपद्रव और राजनीतिक अस्थिरता भारत के लिए नई चुनौती बन गया है। वहीं विपक्ष की मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति, हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर चुप्पी चिंता का गंभीर विषय है। देश की जनता को ऐसे राजनीतिक दलों और नेताओं को समर्थन और वोट देने से पहले ये विचार करना चाहिए कि ये नेता सत्ता हासिल करने के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं। इतिहास साक्षी है कि ऐसे लोग किसी के सगे नहीं होते। सत्ता के लिए ये किसी भी विचारधारा के साथ खड़े हो सकते हैं। इनके लिए मानवता, संवेदना, अपनापन, भाईचारा और भावकुता सब राजनीतिक नफे नुकसान के हिसाब से तय और प्रदर्शित होता है।

Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)
Ardhendu Bhushan (Consulting Editor)http://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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