इंदौर। बाबा साहेब डॉ.भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उनकी जन्मस्थली महू के पूर्व विधायक और वर्तमान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आज दिल्ली में एक नई दुकान चालू की। कांग्रेस से लाए अपने चेले अक्षय कांति बम के कार्यक्रम में खुद तो पहुंचे ही, महापौर पुष्यमित्र भार्गव को मेहमान बनवा दिया। हालांकि विजयवर्गीय की कोशिशों के बावजूद भी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन नहीं पहुंचे।
आज पूरा देश संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती मना रहा है और सबकी निगाहें उनके जन्मस्थल महू पर टिकी हुई हैं। सीएम डॉ.मोहन यादव से लेकर भाजपा के कई बड़े नेता आज महू में थे, लेकिन खुद को मध्यप्रदेश के सबसे बड़े मंत्री मानने वाले कैलाश विजयवर्गीय दिल्ली में दिखे। उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट कर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ होने की जानकारी दी। इसके बाद उनके दिल्ली में रहने का एक और प्रयोजन सामने आ गया।
बम के लिए दिल्ली में की जमावट
दरअसल अक्षय कांति बम ने आज बच्चों के लिए प्रकाशित एलीना और महान संविधान पुस्तक श्रृंखला के अनवारण का आयोजन, संविधान क्लब दिल्ली में किया था। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला थे, जबकि अध्यक्षता भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन करने वाले थे। विशेष अतिथि के रूप में मंत्री विजयवर्गीय का नाम था। इस कार्यक्रम के विज्ञापन पोस्टर में मार्गदर्शक के रूप में सीएम डॉ.मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का नाम भी दिया गया था। मंत्री विजयवर्गीय ने अपने चेले अक्षय कांति बम के लिए दिल्ली में पूरी जमावट लगाई। चूंकि नितिन नवीन बिहार में नई सरकार के गठन में जुटे थे, इसलिए विजयवर्गीय का एक दांव तो फेल हो गया।
इंदौर में सीएम के रहते महापौर भी भागे दिल्ली
कैलाश विजयवर्गीय को यह पता था महू में अंबेडकर जयंती पर बड़ा आयोजन होगा और सीएम इसमें शामिल होंगे। इंदौर में भी सीएम का कार्यक्रम था। इसके बावजूद विजयवर्गीय ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव को जबरदस्ती बम के कार्यक्रम में दिल्ली बुलवा लिया। शायद भार्गव ने सोचा कि सीएम के साथ तो हमेशा रहते हैं, इसी बहाने नितिन नवीन से परिचय हो जाएगा, वे भी भाग कर दिल्ली चले गए। भाजपा के कई नेताओं ने जब सीएम के कार्यक्रम में उन्हें तलाशा तो पता चला कि वे तो दिल्ली में मच की शोभा बढ़ा रहे हैं।
लगभग अपहरण जैसा था बम का भाजपा में आना
सबको याद होगा कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से इंदौर के प्रत्याशी अक्षय कांति बम नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन किस तरह से भाजपा में भाग आए थे। इस पूरे मामले के सूत्रधार कैलाश विजयवर्गीय थे और लोगों ने कहा कि भाजपा ने बम का अपहरण कर लिया। इसके बाद विजयवर्गीय राष्ट्रीय नेतृत्व तक इसका श्रेय लेने से नहीं चुके।
भाजपा की कराई थी जमकर किरकिरी
इस पूरे मामले में कैलाश विजयवर्गीय ने भाजपा की जमकर किरकिरी कराई थी। भाजपा उम्मीदवार शंकर लालवानी के जीतने में कोई संदेश नहीं होते हुए भी कांग्रेस उम्मीदवार को मैदान से हटाना किसी की समझ नहीं आया। यही वजह है कि इंदौर में नोटा को सर्वाधिक वोट पड़े और भाजपा के साथ लालवानी भी हंसी का पात्र बनते रहे।
बम की दुकान सजाने में जुटे विजयवर्गीय
अक्षय बम को भाजपा में लाने के बाद अब विजयवर्गीय उनकी दुकान सजाने में जुट गए हैं। दिल्ली में आयोजन का उद्देश्य ही भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से बम का परिचय कराना था। विजयवर्गीय चाहते तो संविधान की किताब का विमोचन बाबा साहेब की जन्मस्थली महू में भी करवा सकते थे, लेकिन इससे यह संदेश नहीं जा पाता कि राष्ट्रीय राजनीति में उनकी कितनी धमक है।


