उत्तर-पश्चिम भारत में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम ने अचानक करवट ली और कई राज्यों में तेज बारिश, ओलावृष्टि और हिमपात ने जनजीवन प्रभावित कर दिया। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी और मूसलाधार बारिश हुई, जबकि भूस्खलन के कारण कई राजमार्ग बंद हो गए और सैकड़ों वाहन रास्तों में फंस गए।
मैदानी इलाकों में भी इसका असर साफ दिखा। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में बारिश और ओलावृष्टि से तापमान में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन किसानों के लिए यह मौसम नुकसानदेह साबित हुआ और फसलों को क्षति पहुंची।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश और हिमपात हुआ। वहीं पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड और ओडिशा समेत कई राज्यों में 30 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं और कई स्थानों पर ओलावृष्टि भी हुई। पूर्वोत्तर राज्यों, कोंकण-गोवा और गुजरात के कुछ हिस्सों में भी बारिश दर्ज की गई।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल से जून के बीच उत्तर, मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में लू के दिनों की संख्या बढ़ेगी। वहीं पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में भी तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जिससे आने वाले महीनों में गर्मी का असर और तीव्र हो सकता है।
इसी बीच मौसम को लेकर एक और बड़ी चिंता सामने आई है। निजी एजेंसी स्काईमेट ने चेतावनी दी है कि वर्ष 2026 में ‘सुपर अल नीनो’ का प्रभाव देखने को मिल सकता है। अल नीनो की वजह से इस बार मानसून कमजोर रहने और भीषण गर्मी पड़ने की आशंका जताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मानसूनी बारिश सामान्य से कम रह सकती है और कुल वर्षा दीर्घावधि औसत का लगभग 94 प्रतिशत ही रहने का अनुमान है। खासकर मानसून के दूसरे चरण में बारिश में अधिक गिरावट देखने को मिल सकती है।


