नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड केस में राहुल गांधी और सोनिया गांधी की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने राहुल-सोनिया के खिलाफ चार्जशीट पर एक्शन लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली हाईकोर्ट की शरण ली थी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित और लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जस्टिस रविन्द्र डुडेजा की कोर्ट ने यह नोटिस जारी किया है। नेशनल हेराल्ड केस की अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी। ईडी ने राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें कोर्ट ने शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दी दलील
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में दलील दी कि अगर अभी ट्रायल कोर्ट के निष्कर्ष को बरकार रखा जाता है तो यह ग़लत नजीर पेश करेगा। उन्होंने कहा कि इसका असर पीएमएलए के दूसरे मामलों पर भी होगा। इस आदेश को सही मान लिया जाए तो ऐसी सूरत में अगर किसी निजी शिकायत पर कोर्ट ने संज्ञान लिया है तो ईडी जांच ही नहीं कर सकती। तुषार मेहता ने कोर्ट को केस के तथ्यों के बारे में बताते हुए कहा कि आखिर में नतीजा यह है कि 50 लाख की रकम के लिए आरोपी को 2000 करोड़ की प्रॉपर्टी मिली।
सोनिया-राहुल के पास 76 फीसदी शेयर
ईडी ने अपनी चार्जशीट में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड को नामजद किया था। ईडी की जांच पर कांग्रेस की दलील थी कि यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई है, जबकि ईडी का दावा है कि यह एक गंभीर आर्थिक अपराध है जिसमें फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत मिले हैं। ईडी का आरोप है कि कांग्रेस नेताओं ने साजिश के तहत एसोसिएटेड जर्नल्स लि. (AJL) की 2,000 करोड़ रुपए की संपत्तियों पर कब्जे के लिए उसका अधिग्रहण प्राइवेट कंपनी यंग इंडियन के जरिए सिर्फ 50 लाख रुपए में किया था। इस कंपनी के 76% शेयर सोनिया और राहुल के पास हैं। इस मामले में अपराध से अर्जित आय 988 करोड़ रुपए मानी गई। साथ ही संबद्ध संपत्तियों का बाजार मूल्य 5,000 करोड़ रुपए बताया गया है।




