NCERT New Curriculum 2026 के तहत कक्षा 9वीं की सामाजिक विज्ञान (Social Science) की पाठ्यपुस्तक में बड़े बदलाव किए गए हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए “Understanding Society: India and Beyond” नाम से नई पुस्तक जारी की है, जिसे NEP 2020 और NCF 2023 के अनुरूप तैयार किया गया है।
नई किताब की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र और अर्थशास्त्र को अलग-अलग पुस्तकों के बजाय एकीकृत रूप में पढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही पाठ्यक्रम में कई पुराने अध्याय हटाए गए हैं और कई नए विषयों को शामिल किया गया है।
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पहली बार पढ़ाया जाएगा आपातकाल (Emergency)
नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक में पहली बार 1975 के आपातकाल (Emergency 1975) को शामिल किया गया है। छात्रों को अब भारतीय लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण और विवादास्पद दौर के बारे में भी पढ़ाया जाएगा।
हटाए गए ये चर्चित अध्याय
इतिहास विषय से कई प्रमुख अध्याय हटा दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- फ्रांसीसी क्रांति (French Revolution)
- यूरोप में समाजवाद और रूसी क्रांति (Russian Revolution)
- नाजीवाद और हिटलर का उदय (Nazism and Hitler)
- वन समाज और उपनिवेशवाद
- आधुनिक विश्व में पशुपालक
नए विषयों पर फोकस
नई पुस्तक की शुरुआत आदिमानव, हड़प्पा सभ्यता और वैदिक काल से होती है। इसके अलावा महाजनपद, महाभारत में राजा के कर्तव्य, प्रारंभिक भारत में महिलाओं की भूमिका, वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy), आपदा प्रबंधन (Disaster Management) और वास्तविक जीवन आधारित शिक्षा को भी शामिल किया गया है।
भूगोल में भारत की भौतिक संरचना, प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्यजीव और भारत का आकार एवं स्थिति जैसे विषयों को एकीकृत किया गया है। वहीं, जनसंख्या अध्याय को हटाकर Carbon Footprint और Punjab Floods 2025 जैसे समकालीन विषय जोड़े गए हैं।
Startup और Entrepreneurship पर जोर
अर्थशास्त्र विषय में भी बड़ा बदलाव किया गया है। “गांव पालमपुर की कहानी”, “गरीबी एक चुनौती”, “भारत में खाद्य सुरक्षा” और “संसाधन के रूप में लोग” जैसे अध्यायों को हटाया गया है। अब छात्रों को Startup Culture, Entrepreneurship, स्वयं का व्यवसाय शुरू करने और वित्तीय समझ विकसित करने जैसे व्यावहारिक विषय पढ़ाए जाएंगे।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव छात्रों को केवल परीक्षा-केंद्रित ज्ञान देने के बजाय वास्तविक जीवन की चुनौतियों और आधुनिक अर्थव्यवस्था को समझने में मदद कर सकते हैं। वहीं, कुछ शिक्षाविद इतिहास के महत्वपूर्ण वैश्विक अध्यायों को हटाने पर बहस की आवश्यकता भी बता रहे हैं।
आपकी क्या राय है?
क्या NCERT द्वारा इतिहास के कुछ वैश्विक अध्याय हटाकर आपातकाल, वित्तीय साक्षरता और स्टार्टअप जैसे विषयों को शामिल करना छात्रों के लिए बेहतर और अधिक प्रासंगिक कदम है, या इससे इतिहास की समझ सीमित हो सकती है?
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