महाराष्ट्र में सरकार गठन से पहले ही बिगड़ी एकनाथ शिंदे की तबीयत, गांव में ही डॉक्टरों ने की जांच, दो दिन में ठीक होंगे

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मुंबई। महाराष्ट्र में अभी सीएम और मंत्रिमंडल पर फैसला हुआ नहीं कि शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे की तबीयत बिगड़ गई है। शुक्रवार को वे सतारा जिले में स्थित अपने गांव चले गए थे। डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें बुखार, सर्दी और थ्रोट इन्फेक्शन है। उनको सलाइन लगाई गई है। एक-दो दिन में ठीक हो जाएंगे। अब जब तक वे ठीक नहीं हो जाते सरकार गठन का मामला नहीं सुलझने वाला।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में भाजपा की महाविजय के बाद से ही लगने लगा था कि महायुति में सब कुछ ठीक नहीं रहने वाला। भाजपा 132 सीट लेकर अपना सीएम बनाना चाह रही थी, जबकि एकनाथ शिंदे और उनकी पार्टी इस पद को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। इसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी से शिंदे की बात हुई और अगले ही दिन वे प्रेस कान्फ्रेंस लेकर भाजपा के सीएम के लिए अपनी रजामंदी दे देते हैं। सहज ही किसी को इस पर भरोसा नहीं हो रहा था। इसके बाद भाजपा के देवेंद्र फडणवीस और एनसीपी नेता अजित पवार के साथ शिंदे दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ बैठक कर मुंबई लौट आते हैं। शुक्रवार को सरकार बनाने को लेकर महायुति की बैठक होने वाली थी, लेकिन शिंदे अचानक सतारा स्थित अपने गांव चले गए। शनिवार को भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने 5 दिसंबर को महाराष्ट्र में सरकार गठन की बात कहते हैं। तब यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि रविवार को शिंदे मुंबई वापस आ जाएंगे और बैठक में सबकुछ तय हो जाएगा। अब उनके बीमार होने और दो-तीन दिन में ठीक होने की खबर से कई तरह के राजनीतिक कयास लगने शुरू हो गए हैं।

शिंदे को पसंद नहीं आ रहे भाजपा के विकल्प

बताया जाता है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक में शिवसेना को कुछ विकल्प दिए गए। इसमें पहला डिप्टी सीएम और दूसरा केंद्र में मंत्री बनने का ऑफर शामिल है। भाजपा ने ऑफर दिया है कि अगर शिंदे केंद्र में मंत्री बनने का मन बनाते हैं तो उनके गुट के किसी नेता को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद पर आम सहमति बन गई है, लेकिन कुछ मंत्री पदों को लेकर अभी भी बात नहीं बन पाई है। सूत्र बताते हैं कि सीएम पद के बदले शिंदे ने अमित शाह से विधान परिषद के अध्यक्ष पद की मांग के साथ 12 मंत्री पद की मांग की। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि शिंदे अब चुप्पी साधकर दबाव बनाने की कोशिश में लगे हैं। अब देखना है आगे-आगे होता है क्या?

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