पुलिस की तत्परता से मात्र सात घंटे में ही पकड़े गए आरोपी, बच्चे भी बरामद
इंदौर। शांत कहे जाने वाले अपने शहर में कल यानी गुरुवार को जो कुछ भी हुआ, उसने इंदौर के लोगों के अभिभावकों की चिन्ता बढ़ा दी है। वह तो पुलिस को दाद देनी पड़ेगी कि उसने तत्परता से सात घंटे के अंदर ही न केवल अपहृत बच्चों को बरामद कर लिया, बल्कि आरोपी भी पकड़ लिए। इंदौर में अपराध का यह नया ट्रेंड खौफ पैदा कर रहा है।
अब तक बच्चों के मामले में निश्चिंत था शहर
ऐसा नहीं कि इंदौर में अपहरण की वारदातें नहीं होतीं। हर साल ऐसे केस दर्ज होते हैं, लेकिन बच्चों के अपहरण के मामले इंदौर में काफी कम होते हैं। ताजा घटनाक्रम में जो कुछ भी हुआ, वह चौंकाने वाला है। अगर यह ट्रेंड आगे भी जारी रहा तो शहर की मुसीबत और बढ़ जाएगी। जिस तरह से अपराध को अंजाम दिया गया, वह काफी डराने वाला है। पुलिस भी आखिर कहां तक नजर रख पाएगी।
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ताजा घटना ने सबको चौंकाया
इंदौर के तिरुपति गार्डन से गुरुवार शाम को दो नाबालिग बच्चे लापता हो गए थे। दोनों बच्चें गार्डन में खेलने गए थे। परिजनों ने पुलिस में केस दर्ज कराया। अपहरण के कुछ देर बाद एक महिला ने वीडियो कॉल कर 15 लाख रपए की फिरौती मांगी। पुलिस ने जब इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो एक युवती उन्हें अपने साथ ले जाते हुए दिखी थी। सूचना मिलते ही टीआई सुरेंद्र रघुवंशी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। बच्चों को तलाशने में संयोगितागंज, बड़ी ग्वालटोली, राजेंद्र नगर, द्वारकापुरी, तुकोगंज और पलासिया थाने की टीमों को लगाया। जिस नंबर से बच्चों के दादा को फोन आया था, उसे सर्विंलास पर डाला। इसकी लोकेशन निकालकर बच्चों को राजेंद्र नगर के दत्त नगर में एक बिल्डिंग से बरामद कर लिया।
चार आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार
पुलिस ने अपहरण के इस मामले में चार आरोपियों विनीत पिता राजेश (22 वर्ष), राधिका पिता राजेश (18 वर्ष), ललित पिता दशरथ सेन (21 वर्ष) और तनीषा पति ललित (21 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों में भाई-बहन राधिका और विनीत समेत पति-पत्नी ललित और तनीषा शामिल हैं। तनीषा बच्चों को अपने साथ लेकर गई थी। वह राधिका की सहेली है।
कैसे आरोपियों तक पहुंची पुलिस
एसीपी तुषार सिंह के अनुसार पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज देखकर आरोपी लड़की के रूट की पहचान की। जिस नंबर से फिरौती का फोन आया था, उसे सर्विलांस पर डाला। मुखबिरों को भी सक्रिय किया गया। सभी आरोपी आपस में वॉट्सएप पर चैटिंग कर रहे थे। इनमें से एक नंबर से ही वॉट्सएप कॉल करके उन्होंने 15 लाख रुपए की फिरौती मांगी थी। इस नंबर को पुलिस ने सर्विलांस पर लगाया, जिससे लोकेशन की जानकारी मिली। बच्चों को दत्त नगर की एक बिल्डिंग में रखा गया था। पुलिस ने वहां पहुंचकर न केवल बच्चों को छुड़ाया, बल्कि भागने की कोशिश कर रहे आरोपियों को भी पकड़ लिया।
घर से संपन्न नहीं हैं दोनों बच्चे
नैतिक के पिता जूस का ठेला लगाते हैं, जबकि सम्राट के पिता ढोलक बजाने का काम करते हैं। नैतिक के चाचा राहुल सोनकर ने कहा कि दोनों बच्चे शाम करीब 6 बजे तिरुपति गार्डन में क्रिकेट खेल रहे थे। जब दादी उन्हें देखने पहुंचीं, तो दोनों वहां नहीं मिले। आरोपी लड़की बच्चों को पक्षी-जानवर दिखाने के बहाने ले गई थी। घर की हालत ऐसी नहीं थी कि दोनों बच्चों के परिजन 15 लाख की फिरौती दे पाते।
आर्थिक नुकसान के बाद रची साजिश
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने कर्ज लेकर शेयर बाजार में पैसा लगाया था। शेयर में नुकसान होने के कारण उन्होंने अपहरण की प्लानिंग की थी। वे दो दिन से बच्चों की रेकी कर रहे थे। दो दिन पहले बगीचे के फ्लैट पर वे एक बच्चे को ले कर गए थे। गार्डन से दोनों बच्चों का अपहरण करने के बाद युवती ने एक कैब बुक की और फिर उन्हें राजेंद्र नगर क्षेत्र के एक फ्लैट में लेकर गई थी। दोनों बच्चों को अहसास हो चुका था कि उनके साथ कोई घटना हुई है। इसके बाद युवती ने उनके वीडियो लेना शुरू कर दिए। अपहरण होने के बाद युवती ने परिजनों को फिरौती के लिए कॉल किया। इसके बाद परिजनों ने पैसे इकट्ठा करना शुरू कर दिया। रात 12 बजे एक बच्चे की मां को एक मैसेज आया और कहा कि बस बहुत हो गया, पैसे नहीं दे सकते हो तो दोनों बच्चों को काट कर पटरी पर फेंक देते हैं आकर ले जाओ।
पुलिस की 10 टीमें लगी रहीं
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल अपराध दर्जकर 10 विशेष टीमें गठित की और 25 पुलिसकर्मियों को लेकर अलग-अलग टीमें बनाई। पुलिस टीम दत्त नगर स्थित शिवांश अपार्टमेंट पहुंची, जहां एक फ्लैट में दबिश देकर बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस को बच्चों और अपहरणकर्ताओं की लोकेशन मिली और पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की।


