खनिज माफियाओं के ‘चहेते’ जयदीप नामदेव ने इस तरह लगाया सरकार को 140 करोड़ का चूना, लापरवाही के कारण एफआईआर तक नहीं

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इंदौर। ग्राम बारोली में अवैध उत्खनन के मामले में 140 करोड़ रुपए की पेनल्टी लगाकर वाहवाही लूटने वाले प्रभारी खनिज अधिकारी जयदीप नामदेव ने खुद के फायदे के लिए सरकार के भारी राजस्व का नुकसान किया है। उसने लगातार अधिकारियों को अंधेरे में रखा, जिसके कारण मशीन जब्ती की एफआईआर तक दर्ज नहीं हो पाई। इस पूरे मामले में खनिज माफियाओं से सांठगांठ कर नामदेव ने इस केस को इतना बिगाड़ दिया कि सरकार को एक रुपए का राजस्व भी नहीं मिले।

उल्लेखनीय है कि 19 अगस्त 23 को ग्राम बारोली, तहसील मल्हारगंज के सर्वे क्रमांक 3/1/2 और 3/1/1/2 रकबा 3.40 हेक्टेयर व 5.503 हेक्टेयर क्षेत्र पर अवैध पत्थर-मुरम के अवैध उत्खनन का मामला पकड़ा था। जिस जमीन पर खुदाई हो रही थी वह राजस्व में रिकॉर्ड में ईडन गार्डन गृह निर्माण सहकारी संस्था तर्फे निलेश पिता बनवरीलाल पसारी और मेहरबान सिंह पिता प्रेमसिंह राजपूत के नाम दर्ज है। खदान का आवंटन विष्णुप्रसाद शुक्ला के नाम पर हुआ था। जांच के बाद जयदीप नामदेव ने संजय शुक्ला, राजेंद्र और ईडन गार्डन सोसायटी और मेहरबान सिंह के नाम से 140 करोड़ की पेनल्टी लगाई थी।

खनिज माफियाओं को दिया पूरा मौका

नामदेव ने इस प्रकरण में खनिज माफियाओं से सांठगांठ कर लापरवाही की हदें पार कर दी। एक तो नियमानुसार सील क्रेशर मशीन की सुपुर्दगी या जब्ती नहीं की। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों से पूरा प्रकरण छुपाने के लिए पांच महीने बाद रिपोर्ट दी। इतना समय खनिज माफियाओं के लिए काफी था। उन्होंने मौके से मशीन और अन्य सारी सामग्री गायब कर दी। जब वरिष्ठ अधिकारियों तक बात पहुंची और उन्होंने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

देरी के कारण पुलिस ने केस दर्ज करने से किया इनकार

वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश के बाद जब सहायक खनिज अधिकारी सीएस डामोर बाणगंगा थाने में रिपोर्ट लिखाने गए तो उन्हें सीधे इनकार कर दिया गया। इसकी सूचना उन्होंने 13 जनवरी 2025 को प्रभारी खनिज अधिकारी को लिखित रूप में दी। इसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा कि 3 जनवरी और 10 जनवरी 2025 को थान बाणगंगा में गए लेकिन थाना प्रभारी महोदय द्वारा प्रकरण के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा उपरांत स्पष्ट रूप से एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया गया। थाना प्रभारी द्वारा कहा गया की विभागीय स्तर से प्रकरण में जांच की जाए। संबंधित जब्त सामग्री किसकी सुपुर्दगी में सौपी गई है इसकी जांच की जाए।

वरिष्ठ अधिकारी को ही ठहराने लगा दोषी

जब मामले के संबंध में तत्कालीन प्रभारी खनिज अधिकारी संजय लुणावत ने जयदीप नामदेव से पत्र लिखकर सवाल किए तो उसने गोलमोल जवाब देकर उन्हें भटकाने की कोशिश की। लुणावत ने नामदेव से पूछा था कि जब्त क्रेशर मशीन किसकी अभिरक्षा में रखी गई। प्रकरण में केशर मशीन का जप्तीनामा, सूपुदर्गीनामा, सूपुदर्गी का समाधानकारक वचन पत्र, किसी प्रकार का केशर पुलिस अभिरक्षा में देने का अभिरक्षा पत्र प्रस्तुत नहीं किया है। इस पर नामदेव ने कहा कि उन्होंने इतिहास में सबसे ज्यादा पेनल्टी लगाई है। इसकी खबर अखबारों में भी छपी है। इतने महत्वपूर्ण प्रकरण से संबंधित केशर मशीन का चोरी होना अत्यन्त गंभीर विषय है। वर्तमान में उक्त क्षेत्र चेनसिंह डामोर, सहायक खनि अधिकारी के कार्य क्षेत्र से संबंधित है।आपके द्वारा इतने गंभीर विषय में विधिक कार्यवाही की अपेक्षा अनावश्यक पत्राचार करने से ऐसा प्रतीत होता है कि आपके द्वारा जानबूझ कर संबंधितों को सुरक्षित होने एवं घटना के साक्ष्य मिटाने का पर्याप्त अवसर दिये जाने का प्रयास किया जा रहा है। आपके द्वारा शासन पक्ष को कमजोर करने और अवैध उत्खननकर्ता को लाभ पहुंचाने हेतु षड्यंत्र / साजिश रचने की आशंका को बल मिल रहा है।

अतः लेख है कि यदि केशर मशीन मौके पर उपलब्ध नहीं हो तो इस संबंध में अविलंब संबंधित पुलिस थाना बाणगंगा में प्राथमिकी दर्ज कराए जाने का कष्ट करें।

विभागीय जांच हो तो खुल जाए कलई

प्रभारी खनिज अधिकारी नामदेव ने इस मामले में लगातार लापरवाही की है। उसने एक पंचनामे में यह भी कहा था कि क्रेशर मशीन में मोटर नहीं थी। जब मोटर ही नहीं थी तो वहां अवैध उत्खनन का केस कैसे बना? आखिर कैसे वहां खुदाई हुई, जिसके गड्‌ढे नापकर 140 करोड़ की पेनल्टी लगाई गई। अगर मोटर नहीं भी थी तो उसे नियमानुसार अभिरक्षा में क्यों नहीं सौंपा गया। इस पूरे मामले में नामदेव के खिलाफ विभागीय जांच जरूरी है। अगर विभागीय जांच हो जाए तो परत दर परत पूरे मामले का खुलासा हो जाए।

खदान मालिक अब भाजपा की वॉशिंग मशीन में

इस खदान के मालिक पूर्व कांग्रेस और वर्तमान में भाजपा नेता संजय शुक्ला हैं। खदान की जमीन उनके पिता स्व.विष्णुप्रसाद शुक्ला के नाम से दर्ज है। हालांकि कांग्रेस में रहते हुए भी संजय शुक्ला ऐसे मामलों को दबाने में एक्सपर्ट रहे हैं, लेकिन भाजपा में आने के बाद से और सक्षम हो गए हैं। बताया जा रहा है कि इस पूरे प्रकरण को दबाने के लिए एक मंत्री भी अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं। भाजपा की वॉशिंग मशीन में आने के बाद से संजय शुक्ला इस खदान घोटाले का दाग धोने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

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