निजी मेडिकल कॉलेजों के फर्जीवाड़े के शहंशाह सुरेश भदौरिया को अब भी भरोसा कि इस बार भी बच निकलेंगे, ‘इंडेक्स’ के बयान से तो यही लग रहा

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इंदौर। पूरे देश में निजी मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिलानों के फर्जीवाड़े में फंसे सुरेश भदौरिया को अब भी भरोसा है कि इस बार भी वह बच निकलेगा। खैर, इस कॉन्फिडेंस के कारण ही तो भदौरिया इतने बड़े आदमी बने। केस दर्ज होने के बाद से सीबीआई की नजरों में फरार चल रहे भदौरिया के इंडेक्स समूह की तरफ से जारी एक बयान से तो यही जाहिर होता है कि इस बार भी वह फुल कॉन्फिडेंस में है।

इंडेक्स ने कहा-गलतफहमी के चलते कार्रवाई

इंडेक्स समूह के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि हम मानते हैं कि सत्य एवं पारदर्शिता ही किसी भी संस्थान की मजबूती की नींव होती है। हमारी समस्त संस्थानों की गतिविधियाँ निर्धारित मानकों और कानूनी दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही संचालित की जाती रही हैं। हमारे सभी संस्थान द्वारा हमेशा से सभी कानूनी प्रक्रियाओं और नियमों का पूर्ण सम्मान व पालन किया जाता रहा है और रहेगा। हाल ही में एक जाँच एजेंसी द्वारा कुछ गलतफहमी के चलते कि गई कार्रवाई के संबंध में कई भ्रामक तथ्य प्रचलित किए जा रहे हैं, जिसके चलते यहाँ यह स्पष्ट करना अतिआवश्यक हैं कि हमने हमेशा कानून को सर्वोच्च माना हैं तथा उक्त जाँच एजेंसी को जाँच मैं पूर्ण सहयोग प्रदान किया है और आगे भविष्य मैं भी करते रहेंगे ।

हर बार निर्दोष साबित होने की बात भी कही

इंडेक्स ने अपने बयान में कहा है कि यह पहला अवसर नहीं है जब हमारे संस्थानों पर इस तरह कि भ्रामक वृत्तियाँ प्रचलित कर आक्षेप लगाये गए हो । परंतु हर बार उन सभी वृत्तियों के विरुद्ध सभी आक्षेपों में हम पूर्ण रूप से निर्दोष पाए गए हैं और कोई भी अनियमितता सिद्ध नहीं हुई हैं। हम देश के संविधान एवं न्याय प्रणाली पर पूरा विश्वास रखते हैं। हम अपने सभी छात्रों, उनके पालकों एवं सभी को आश्वस्त करना चाहते हैं कि संस्थान की ओर से जांच में पूरा सहयोग दिया जा रहा है और हम पूरी तरह आश्वस्त हैं कि इस बार भी तथ्यों के आधार पर सत्य सामने आएगा।

अब जरा सीबीआई के आरोप भी समझ लें

उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने भदौरिया सहित 35 लोगों के खिलाफ रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल सांइसेज के घोटाले के मामले में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। भदौरिया सहित 35 आरोपी एक रैकेट संचालित करते हैं, जो देशभर में मेडिकल कॉलेजों की मान्यता दिलाने, उन्हें रिन्यू कराने के मामले में शामिल है। सीबीआई ने सबसे पहले छत्तीसगढ़ के रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल सांइसेज पर छापा मारा था, वहां घोटाले से जुड़े दस्तावेज हाथ लगे और फिर देशभर में सीबीआई ने छापा मारा था। इसमे इंदौर का इंडेक्स कॉलेज भी शामिल है। इस कॉलेज में व भदौरिया के घर पर भी सीबीआई ने छापा मारा। छापे के बाद से ही भदौरिया फरार हो गया है।

दस साल पहले भी दर्ज हुआ था केस

सुरेश भदौरिया के कॉन्फिडेंस का कारण भी है। इतने घोटाले के बाद भी भदौरिया के कॉलेजों को लगातार मान्यता मिलती रही है। भदौरिया के इंदौर और देवास में मेडिकल कॉलेज, अस्पताल और नर्सिंग कॉलेज तो हैं हीं, अब वह निजी विश्वविद्यालय की अनुमति भी ले चुका है। भदौरिया के खिलाफ दस साल पहले भी सीबीआई केस दर्ज कर चुकी है और उसकी गिरफ्तारी भी हो चुकी थी। इसके अलावा भदौरिया व्यापमं घोटाले का भी आरोपी रह चुका है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में गहरी पैठ बनाकर भदौरिया कॉलेजों को फर्जी तरीके से मान्यता दिलाने और रिन्यूअल में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। एफआईआर में मंत्रालय के अधिकारी चंदन कुमार को भी आरोपी बनाया गया है। वह भदौरिया को एनएमसी निरीक्षण से जुड़ी गोपनीय जानकारी देता था, जैसे- कब टीम आएगी, कौन सदस्य होंगे, निरीक्षण की तारीख आदि।

डीएवीवीवी के पूर्व कुलपति डीपी सिंह भी साथ

सीबीआई ने रावतपुरा सरकार के भ्रष्टाचार के मामले में इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन सुरेश भदौरिया और यूजीसी के पूर्व चेयरमैन और डीएवीवी के पूर्व कुलपति डीपी सिंह को आरोपी बनाया है। सीबीआई ने माना है कि भदौरिया फर्जी तरीके से कॉलेजों को मान्यता दिलाने और रिन्यू कराने में सक्रिय भूमिका निभा रहा थेा इसके बदले मोटी दलाली भी वसूल रहे थे। सीबीआई ने एफआईआर में इसका जिक्र किया है। डीपी सिंह वर्तमान में वे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के चांसलर हैं।

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