पिंटू सेठ ने इंदौर को भी बना दिया बिहार, होटल के नक्शे के लिए दिया आवेदन, बैंक और एटीएम के लिए पास हुआ नक्शा, खड़ा कर दिया सी-21 बिजनेस पार्क

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इंदौर। जिस तृष्णा गृह निर्माण संस्था की जमीन को फर्जी तरीके से खरीद कर रेडीसन चौराहे पर सी-21 बिजनेस पार्क बनाया गया है, उसका नक्शा भी पूरा फर्जी है। बेबीलोन इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में आवासीय होटल बनाने के लिए आवेदन दिया गया। टीएनसीपी से बैंक और एटीएम के लिए नक्शा पास होता है, लेकिन बिहार से आए पिंटू सेठ की जादूगरी ऐसी कि वहां पर सी-21 बिजनेस पार्क खड़ा कर लिया जाता है।

इस पूरी कवायद में बिहार से आए गुरजीत सिंह उर्फ पिंटू छाबड़ा के साथ नगर तथा ग्राम निवेश विभाग तथा अन्य विभागों की मिलीभगत उजागर हुई है। बेबीलॉन द्वारा टीएनसीपी में उक्त भूमि पर आवासीय होटल बनाने हेतु आवेदन किया गया था। हाईराइज बिल्डिंग बनाने की बैठक होने के पूर्व भी होटल बनाने का ही उल्लेख है। टीएनसीपी के आवक-जावक रजिस्टर में भी इसका उल्लेख है। इसके बावजूद कमेटी की बैठक होने के बाद अचानक से आवासीय उपयोग की जमीन पर कमर्शियल कॉरपोरेट ऑफिस बनाने हेतु नक्शे की स्वीकृति प्रदान कर दी जाती है।

बैंक-एटीएम आदि के लिए अनुमति

अधिकारी द्वारा नक्शे की स्वीकृति, विकास योजना 2021 के तहत सारणी क्रमांक 6.22 बैंक/एटीएम के समान होने की आधार पर दी गई है। इसके विपरित वास्तव में उक्त नक्शे में शोरूम, कान्फ्रेंस हॉल आदि बना हुआ है। यह मास्टर प्लान 2021 के तहत आवासीय स्थल पर बनाना प्रतिबंधित है, लेकिन पिंटू सेठ द्वारा अधिकारी से सांठ गांठ कर अवैधानिक रूप से अनुमति ले ली गई। पिंटू सेठ ने नक्शे के विपरित बिल्डिंग बनाकर उसमें बिना अनुमति कॉल सेंटर, ऑटोमोबाइल्स जैसी कंपनियां चलाई जा रही हैं। यह सभी आवासीय प्रयोजन में न हो कर वाणिज्यिक प्रयोजन में आती है। यानी यह पूरी तरह से अवैध हैं।

आवासीय जमीन पर कमर्शियल नक्शा

गृह मत्री से हुई शिकायत के बाद जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि तृष्णा गृह निर्माण संस्था की यह जमीन चुघ बिल्डर ने आईडीए की फर्जी एनओसी लगाकर बेची। इसकी जांच भी आईडीए करा रहा है। इतना ही नहीं इसी फर्जी एनओसी के आधार पर इसका डायवर्सन कृषि से आवासीय करवाकर टीएनसीपी से नक्शा भी पास कराया गया। ताज्जुब तो इस बात का है कि इस आवासीय भूमि पर टीएनसीपी ने कमर्शियल नक्शा भी पास कर दिया।

एसडीओ की मिलीभगत भी उजागर

सूत्र बताते हैं कि एसडीओ द्वारा उक्त एनओसी के संबंध में आईडीए से पत्रव्यवहार किया गया था। आईडीए द्वारा तत्कालीन एसडीओ वेदप्रकाश से नक्शा, खसरों की जानकारी एवं मौका निरीक्षण करने का निवेदन किया गया, परंतु एसडीओ ने सभी चीजों को दरकिनार करते हुए बिना आईडीए की अनुमति लिए, फर्जी एनओसी के आधार पर डायवर्शन कर दिया।

पिंटू सेठ के पार्टनर रह चुके हैं चुघ

बताया जाता है कि चाय व्यापारियों के प्लॉटों को जोड़कर बने मल्हार में सी-21 बिजनेस पार्क की जमीन बेचने वाले चुघ बिल्डर पिंटू सेठ के पार्टनर रह चुके हैं। यहां भी पूरा फर्जीवाड़ा चुघ ने किया है यानी स्पष्ट है कि पिंटू सेठ से मिलीभगत कर ही चुघ ने यह सब किया है।

हनी-टनी को पिंटू सेठ ने किया बाहर

बताया जाता है कि सी-21 बिजनेस पार्क की जमीन में हनी-टनी भी पार्टनर थे, लेकिन पिंटू छाबड़ा ने अपनी आदत अनुसार उन्हें बाहर कर दिया। पिंटू ने पुष्प विहार की कुछ जमीनें हनी-टनी को दिलवा दीं, जिसको लेकर पुलिस ने केस भी दर्ज किया था। ताज्जुब की बात तो यह है कि हनी-टनी तो फंस गए, लेकिन पिंटू सेठ के खिलाफ कुछ नहीं हुआ।

ठीक से हो जांच तो बिल्डिंग हो जाए सील

फर्जीवाड़े के बुनियाद पर खड़े सी-21 बिजनेस पार्क की अगर नगर निगम, जिला प्रशासन तथा अन्य संबंधित विभाग ठीक से जांच करे तो इसमें इतना फर्जीवाड़ा है कि बिल्डिंग सील होने की नौबत आ जाए। यहां सवाल यह है कि आखिर इस तरह का फर्जीवाड़ा सबकी आंखों के सामने कैसे हो जाता है। सी-21 तथा मल्हार मॉल की जमीन का विवाद अब तक नहीं सुलझा है। उसमें भी चाय व्यापारियों के प्लॉटों को जोड़कर दो मॉल खड़े कर लिए गए थे। अब इससे भी बड़ा फर्जीवाड़ा सी-21 बिजनेस पार्क का है।

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