मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। बीजेपी ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। टिकट कटने के बाद मिश्रा के समर्थकों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा और विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया।
प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार रात नेशनल हाईवे-44 को जाम कर दिया, जिससे करीब 11 घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा। बताया गया कि जाम करीब 20 से 25 किलोमीटर तक फैला, जिसका असर दतिया, झांसी, शिवपुरी और ग्वालियर समेत चार जिलों पर पड़ा। कई बसें और एंबुलेंस भी जाम में फंस गईं।
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दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े के अनुसार, प्रशासन ने पूरी रात प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। शनिवार सुबह जब पुलिस ने दोबारा बातचीत की कोशिश की तो प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव शुरू हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

हिंसा के दौरान आठ पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए। एसडीपीओ के हाथ में गंभीर चोट आई, जबकि एसपी, एएसपी और स्वयं कलेक्टर भी चोटिल हुए। कई पुलिस वाहनों और ट्रकों के शीशे तोड़ दिए गए तथा कुछ वाहनों को पलटने की भी खबर है।
कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन ने न तो लाठीचार्ज किया और न ही जवाबी पथराव किया। फिलहाल प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। हालांकि, यदि वे समूह बनाकर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करेंगे तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि नरोत्तम मिश्रा दतिया से तीन बार विधायक रह चुके हैं, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने हराया था। अब राजेंद्र भारती की सदस्यता 1998 के बैंक धोखाधड़ी मामले में तीन साल की सजा मिलने के बाद समाप्त हो गई, जिसके चलते चुनाव आयोग ने दतिया विधानसभा उपचुनाव की घोषणा की है।
अब सबसे बड़ा सवाल ; बीजेपी के इस फैसले का दतिया उपचुनाव पर क्या असर पड़ेगा? क्या नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का विरोध पार्टी को नुकसान पहुंचाएगा, या बीजेपी इस चुनौती को पार कर लेगी?
आपकी क्या राय है? क्या बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर सही फैसला लिया या यह पार्टी के लिए भारी पड़ सकता है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



