वाह रे आईडीए, पहले अपनी ही जमीन पर कब्जा होने दिया, जब हल्ला मचा तो निगम को लिख दिया अतिक्रमण हटाने का पत्र

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इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण में जो कुछ भी हो जाए वह कम है। अब फिर से आईडीए ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिस पर सहज ही किसी को भरोसा नहीं होगा। मामला योजना क्रमांक 139 की करीब 80 हजार स्क्वेयर फीट जमीन का है। आईडीए इस जमीन का मुआवजा भी किसानों को दे चुका है, फिर भी भूमाफियाओं ने इस पर अवैध रूप से सांईनाथ पैलेस कॉलोनी काट दी। नोटरी पर प्लॉट बेच दिए और मकान भी खड़े हो गए। ताज्जुब तो इस बात का है कि जब इसकी शिकायत लोगों ने आईडीए से की तब भी वह नहीं जागा। जब काफी हो-हल्ला मचा तो नगर निगम को कब्जा हटाने का पत्र लिखकर औपचारिकता निभा ली।

आश्चर्य इस बात का है कि यह सब तब हो रहा है जब आईडीए में प्रशासनिक बोर्ड है। इसके अध्यक्ष खुद संभागायुक्त हैं, सदस्य कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त व अन्य अधिकारी हैं। ऐसे में जमीन पर कब्जा हो जाना और इसकी शिकायत मिलने के बाद भी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना समझ से परे है। आश्चर्य तो इस बात पर भी है कि आईडीए सीईओ नगर निगम को पत्र लिखने की बजाए अपनी ही जमीन पर अवैध कब्जे की एफआईआर पुलिस में क्यों नहीं कराते? कलेक्टर इस जमीन से कब्जा हटाने में सक्षम है, फिर भी कुछ क्यों नहीं होता।

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सीएम को बदनाम करने के लिए लगाए पोस्टर

जब काफी हो-हल्ला मचा और भूमाफियाओं को लगा की मामला बिगड़ सकता है तो उन्होंने रातोंरात एक रहवासी संघ भी बना दिया और कॉलोनी में पोस्टर भी लगा दिया, जिसमें सीएम की फोटो भी है। इसका मतलब साफ है कि जो लोग इस गोरखधंधे में लगे हैं, उन्हें सीएम की छवि की परवाह भी नहीं है। इस पोस्टर में कुछ नेताओं की भी तस्वीर है। जाहिर है सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को सीएम समर्थन नहीं ही देंगे, लेकिन पोस्टर में नजर आने वाले स्थानीय नेताओं से यह स्पष्ट है कि यह किनके समर्थकों की करतूत है।

संभागायुक्त का पत्र दबा गया अधिकारी

सबसे पहले इस गोरखधंधे की जानकारी वार्ड 22 के पार्षद राजू भदौरिया को लगी। भदौरिया ने इसकी लिखित शिकायत आईडीए में की। जब बात नहीं बनी तो संभागायुक्त और वर्तमान में आईडीए अध्यक्ष दीपक सिंह को भी लिखित शिकायत की। बताया जाता है कि संभागायुक्त ने आईडीए सीईओ को इस संबंध में पत्र लिखा, लेकिन करीब तीन महीने तक कोई कार्रवाई नहीं हुई बल्कि शिकायत की भनक लगते ही भूमाफियाओं ने और तेजी से प्लॉट बेचने शुरू कर दिए। मकानों की संख्या भी बढ़ने लगी।

धमकी के बाद जागा आईडीए

इसके बाद कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष लोकेश हार्डिया आईडीए पहुंचे और शिकायत देकर कहा कि अगर सात दिन में कार्रवाई नहीं होती तो वे लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू तथा अन्य संबंधित विभागों में इस मामले को लेकर जाएंगे। इसके बाद आईडीए सीईओ आरपी अहिरवार, कार्यपालन यंत्री राजेश महाजन सहित अन्य जिम्मेदारों की नींद खुली। उन्होंने मौके पर पहुंचकर आईडीए के कब्जा वाला बोर्ड लगवा दिया। इस बोर्ड को भी भूमाफियाओं ने उखाड़ फेंका।

आरोपियों को आखिर किसका संरक्षण

शिकायतकर्ताओं राजू भदौरिया और लोकेश हार्डिया के अनुसार आईडीए की सरकारी जमीन पर कॉलोनी बसाने वालों में भाजपा नेता जयसिंह ठाकुर और उमाशंकर तरेटिया का हाथ है। यह सबको पता है कि इन्हें विधानसभा दो के किन नेताओं का संरक्षण है। ताज्जुब की बात यह है कि नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे इस मुद्दे को उठाने की बजाए भूमाफियाओं के संग खड़े हो गए हैं। इतना ही नहीं जमीन का मुआवजा लेने के बाद भी किसान कमल चौधरी ने भूमाफियाओं के साथ मिलकर प्लॉट बेच डाले। निश्चित तौर पर इसमें नेताओं के साथ ही आईडीए के अधिकारियों की भी मिलीभगत है।

सीएम की सख्ती के बाद भी दिखाई हिम्मत

जब से डॉ.मोहन यादव सीएम बने हैं, तब से भूमाफियाओं के खिलाफ उनका रुख साफ है। उन्होंने लगातार अवैध कॉलोनी काटने वालों, गरीबों का पैसा हड़पने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब तो इंदौर जिले का प्रभार भी उनके पास है। इसके बावजूद सरकारी जमीन पर कब्जा कर गरीबों को लूटने वाले अधिकारियों, नेताओं की हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी। अब सीएम से उम्मीद है कि वे इस मामले के जिम्मेदारों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करेंगे।

2004 में जिसने कॉलोनी काटी उसने दिया शपथ पत्र

इस जमीन की नोटरी किसान कमल चौधरी ने जाहिद अली को की थी। उसने 2004 में इस पर सांईनाथ पैलेस कॉलोनी काटी थी। जाहिद ने शपथ पत्र देकर कहा है कि उसने किसी प्लॉट की नोटरी या रजिस्ट्री नहीं की है। अब प्राधिकरण बेचैनी में है। बड़े अधिकारी अब किसी की गर्दन फंसाने की तैयारी में हैं, लेकिन क्या आईडीए सीईओ आरपी अहिरवार और कार्यपालन यंत्री राजेश महाजन सहित अन्य जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई होगी।

इंदौर में कैसे होगा भूमाफियाओं का सफाया?

भूममाफियाओं के कारण बदनाम इंदौर शहर में अगर इसी तरह आईडीए की जमीन पर कब्जे होते रहे तो आम जनता का क्या होगा? भूमाफिया दूरदराज के खेतों में कॉलोनी काट लेते हैं, वहां तक तो ठीक है लेकिन आईडीए के कब्जे वाली जमीन पर प्लॉट काटकर बेच देना और वहां मकान बन जाना यह तो गलत परंपरा है। इसलिए इसके लिए जिम्मेदार अफसरों पर तुरंत और सख्त कार्रवाई जरूरी है।

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