मध्यप्रदेश में अब तीन सेक्टरों में पर्यटन स्थलों के लिए शुरू होगी हेलिकॉप्टर सेवा, मोहन कैबिनेट की बैठक में मिली मंजूरी

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भोपाल। मध्यप्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अब तीन सेक्टरों में हेलिकाप्टर सेवा शुरू होगी। इसका संचालन पीपीपी मोड पर किया जाएगा। मंगलवार को हुई मोहन कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के 36 से अधिक शहरों और पर्यटन स्थलों तक हेलिकाप्टर सेवा शुरू करने को मंजूरी दी है। इसके साथ ही 1320 मेगावाट के दो थर्मल पावर प्लांट लगाने सहित कई और फैसले भी हुए।

बैठक के बाद बताया गया कि तीन सेक्टर में हेलिकाप्टर चलाने की योजना को पीपीपी मोड पर मंजूरी दी है। इन सेवाओं से एमपी के पर्यटन को फायदा मिलेगा। इससे पर्यटन के साथ व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। पहले सेक्टर में इंदौर, उज्जैन, ओंकारेश्वर, मांडू, महेश्वर, गांधी सागर, मंदसौर, नीमच, हनुवंतिया, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, बड़वानी, अलीराजपुर, रतलाम, झाबुआ, नलखेड़ा, भोपाल, जबलपुर शामिल हैं। दूसरे सेक्टर में भोपाल, मढ़ई, पचमढ़ी, तामिया, छिंदवाड़ा, सांची, इंदौर, ओरछा, गुना, राजगढ़, सागर, नर्मदापुरम, दतिया, दमोह, ग्वालियर, शिवपुरी, टीकमगढ़, जबलपुर आदि स्थल शामिल हैं। इसी तरह तीसरे सेक्टर में जबलपुर, बांधवगढ़, कान्हा, चित्रकूट सरसी, परसुली, सतना, मैहर, कटनी, सीधी, पेंच, डिंडोरी, भोपाल, इंदौर जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

सरप्लस पावर के लिए सारणी में थर्मल प्लांट

बैठक में सरप्लस पावर के लिए सारणी में 660 मेगावाट के थर्मल प्लांट लगाने का निर्णय लिया गया है। इसको लेकर पहले भी प्रयास हुए थे लेकिन तब काम शुरू नहीं हो पाया था। इसी कारण 435 करोड़ की लागत वाले प्लांट की नई लागत अब 11678 करोड़ रुपए हो गई है। वर्ष 2030 तक इसे कमीशन करने के लिए कहा गया है। इसी तरह अनूपपुर जिले के चचाई में 11476 करोड़ की लागत से 660 मेगावाट की यूनिट लगाई जाएगी। पहले इसकी लागत 466 करोड़ थी। इसे भी सारणी की तरह समय सीमा में पूरा करने के लिए कहा गया है।

रेसीडेंट डॉक्टर्स के 354 पद मंजूर

कैबिनेट ने 13 अस्तालों में रेसीडेंट डॉक्टर्स के 354 पद भी मंजूर किए। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर समेत अन्य जिलों के 13 अस्पतालों में 354 नए सीनियर रेसीडेंट पद का सृजन किया गया है। अब फैकल्टीज भी होंगे और शिक्षा लेते डॉक्टर सेवाएं भी दे सकेंगे।

हर पंचायत में होगी मां के नाम बगिया

बैठक में स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान के तहत हर पंचायत में एक और अभियान चलाया जाएगा। पंचायत स्तर पर चलाए जाने वाले इस अभियान में हर पंचायत में मां के नाम की एक बगिया बनाने का निर्णय लिया गया है।

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