कलेक्टर बदलते ही कई बार जेल जा चुके भूमाफिया दीपक मद्दा का खेल शुरू, त्रिशला गृह निर्माण संस्था पर कब्जे की तैयारी, सारे नियमों को ताक पर रख लड़ रहा है चुनाव

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इंदौर। शहर का कुख्यात भूमाफिया दीपक मद्दा जेल से बाहर आने के बाद से ही जमीनों के घोटालों में सक्रिय हो गया था। अब कलेक्टर के बदलते ही सहकारिता विभाग के अधिकारियों की मदद से उसने त्रिशला गृह निर्माण संस्था पर पूरी तरह कब्जे की तैयारी शुरू कर दी है। संस्था के चुनाव में उसने अपने पूरे परिवार, परिचितों और कर्मचारियों को भी खड़ा कर दिया है, जबकि जेल जा चुका मद्दा सोसायटी के नियमों के तहत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य है।

उल्लेखनीय है कि त्रिशला गृह निर्माण संस्था की जांच प्रशासन ने करवाई थी। जांच में अधिकांश सदस्य फर्जी निकले थे। संस्था स्थित खजराना की जमीन भी सरकारी घोषित हो चुकी है। इस संस्था को लेकर मद्दा पर एफआईआर भी हुई थी। मद्दा के खिलाफ एक दर्जन से ज्यादा एफआईआर दर्ज हैं। वह कई बार जेल भी जा चुका है। इसके बावजूद वह सहकारिता विभाग के अधिकारियों की मदद से एक बार फिर बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम देने की तैयारी कर रहा है। चुनाव में किसी तरह कब्जा कर वह फिर से एक बड़ा घोटाला करेगा।

चुनाव लड़ने का पात्र ही नहीं है

सहकारिता तथा त्रिशला संस्था के नियमों के अनुसार से दीपक मद्दा चुनाव लड़ने का पात्र ही नहीं है, फिर भी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उसकी मदद कर रहे हैं। संस्था की उपविधि क्रमांक पांच के बिंदु दो के तहत संस्था के सदस्य बनने के लिए किसी व्यक्ति का आचरण अच्छा होना जरूरी है, जबकि मद्दा पर कई एफआईआर दर्ज हैं और वह जेल भी जा चुका है। संस्था के नियमों के तहत बिंदु ब (3) में स्पष्ट उल्लेख है कि संस्था में एक परिवार के एक से अधिक सदस्य नहीं बन सकते, लेकिन मद्दा की पत्नी के साथ ही कई रिश्तेदार भी सदस्य हैं। सारे नियमों को ताक पर रखते हुए दीपक मद्दा ने अपना नामांकन दाखिला तो किया ही है, अपने परिवार के कई सदस्यों और कर्मचारियों को भी मैदान में उतारा है। उसके भाई भी चुनाव मैदान में हैं। इतना ही नहीं वह अपने कई रिश्तेदारों का प्रस्ताव भी बना है।

सदस्यता पर भी उठते रहे हैं सवाल

दीपक जैन मद्दा की सदस्यता पर भी सवाल उठते रहे हैं। बताया जाता है कि जब वह कल्पतरू संस्था में अध्यक्ष था उसी दौरान उसने फर्जी तरीके से त्रिशला में भी सदस्यता ले ली थी। नियमानुसार दो संस्थाओं मे वह सदस्य नहीं बन सकता था, लेकिन सहकारिता विभाग की मिलीभगत से उसने ऐसा किया। मद्दा ने चुनाव जीतने के लिए की मूल सदस्यों को भी सदस्यता सूची से बाहर करवा दिया है।

कई कॉलोनियों में किए हैं घोटाले

उल्लेखनीय है कि दीपक मद्दा पर शहर की कई कॉलोनियों में घोटाले के केस दर्ज हैं। अयोध्यापुरी, पुष्प विहार से लेकर हीना पैलेस के अलावा अन्य संस्थाओं की जमीनों में भी उसी ने हेरफेर की है। प्रशांत गृह निर्माण के साथ-साथ त्रिशला गृह निर्माण भी मद्दे के कब्जे में रही। । विभिन्न विभागों के फर्जी दस्तावेज बनाने में भी उसे महारत हासिल है। मद्दा ने जमीन घोटाला कर 6.40 करोड़ की संपत्तियां खरीदी। मजदूर पंचायत, देवी अहिल्या श्रमिक कामगार और कल्पतरू सोसायटी में घोटाला किया है। मजदूर पंचायत सोसायटी में नसीम हैदर की मदद से मद्दा ने हनी और टनी को ढाई-ढाई एकड़ जमीन दो-दो करोड़ रुपए में बेची, जिसकी बाजार में कीमत 25 करोड़ रुपए थी। इसी तरह देवी अहिल्या सोसायटी में रणवीर सिंह सूदन के साथ मिलकर यहां की चार एकड़ जमीन का सौदा सिम्पलेक्स कंपनी के नाम कर दिया। यह सौदा चार करोड़ में हुआ और इसमें काफी घपला हुआ। मद्दा ने कल्पतरू सोसायटी संस्था से सौदा किया। हिना पैलेस में 21 हजार वर्गफीट जमीन पर 50 हजार वर्गफुट का निर्माण कर संस्था सदस्यों को 15 साल में फ्लैट बनाकर देने का एग्रीमेंट पैसे खुद रख लिए। इसी पैसे से बिचौली मर्दान में संपत्ति लेकर अपने रिश्तेदार के नाम कर दिए। इसी तरह 1.88 करोड़ रुपए मद्दा ने कहीं और लगा दिए।

मद्दा के खिलाफ लग चुकी है रासुका

सहकारिता विभाग की शिकायत पर मद्दा के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने कल्पतरू सोसायटी में 4.89 करोड़ रुपए के घोटाले का केस दर्ज किया था। इसी मामले में वह 3 अप्रैल 2023 को गिरफ्तार हुआ था। इसी बीच ईडी ने भी मनी लांण्ड्रिंग में केस दर्ज कर जेल से ही उसकी सुपुर्दगी ले ली। जब भूमाफिया अभियान चला था तब मद्दा के खिलाफ आधा दर्जन एफआईआर हुई थी। प्रशासन ने रासुका लगाकर उसे जेल भेज दिया था। रासुका रद्द होने के बाद वह बाहर आया लेकिन क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया।

अपर मुख्य सचिव के नाम से बनवाया था फर्जी दस्तावेज

दीपक मद्दा फर्जी दस्तावेज बनवाने में भी माहिल है। उसने तत्कालीन अपर मुख्य सचिव (गृह) डॉ.राजेश राजौरा के फर्जी हस्ताक्षर से रासुका निरस्ती का पत्र बना लिया था। खजराना थाने में उसके विरुद्ध विभिन्न धाराओं में केस दर्ज है। मद्दा के विरुद्ध खजराना थाने में धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज हुआ था।डीसीपी जोन-2 संपत उपाध्याय ने रिपोर्ट बनाई थी। उसमें दीपक द्वारा बनाए फर्जी पत्र का खुलासा हुआ था। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर मद्दा की तलाश की लेकिन वह फरार हो गया।

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