रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत का रुख: विदेश मंत्री जयशंकर का स्पष्ट बयान

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रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत का रुख: विदेश मंत्री जयशंकर का स्पष्ट बयान

पिछले ढाई वर्षों से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध में जहां पश्चिमी देशों ने रूस का बहिष्कार किया है, वहीं भारत ने अपने तटस्थ और व्यावहारिक दृष्टिकोण को बनाए रखा है। रूस से तेल खरीदने और संघर्ष समाधान में भारत की भूमिका को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में दोहा फोरम में अपने विचार व्यक्त किए।रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर जयशंकर ने स्पष्ट कहा कि यह भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया गया एक समझौता है।
उन्होंने कहा हम तेल खरीदते हैं, लेकिन यह सस्ता नहीं है। क्या विश्व के पास भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने का कोई बेहतर विकल्प है?रूस वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है। इसके बावजूद, जयशंकर ने पश्चिमी आलोचनाओं पर जवाब देते हुए भारत के ऊर्जा हितों को प्राथमिकता देने की बात कही।जयशंकर ने कहा कि युद्धभूमि में यह संघर्ष समाप्त नहीं हो सकता। उन्होंने दोनों पक्षों से वार्ता की मेज पर लौटने का आग्रह किया और भारत के संवाद और समाधान के प्रयासों पर जोर दिया।

विदेश मंत्री जयशंकर के हालिया बयान क्यों सुर्ख़ियाँ बटोर रहे हैं? - BBC  News हिंदी
उन्होंने कहा हम रूस जाते हैं तो राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करते हैं। जब यूक्रेन जाते हैं तो राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से बात करते हैं। हमारा प्रयास है कि दोनों पक्षों के बीच सहमति के रास्ते खोजे जाएं।जयशंकर ने यह स्पष्ट किया कि भारत मध्यस्थता नहीं कर रहा है, बल्कि दोनों पक्षों के बीच पारदर्शी संवाद को सुनिश्चित करने का काम कर रहा है।हम मध्यस्थता का काम नहीं कर रहे हैं। हम बातचीत कर रहे हैं और सुनिश्चित कर रहे हैं कि दोनों पक्षों को निष्पक्ष जानकारी दी जाए।इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन दौरा किया था और राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की। उन्होंने भारत की शांति के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया और संघर्ष समाधान के लिए भारत की भूमिका को रेखांकित किया।भारत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष में तटस्थ रुख अपनाते हुए व्यावहारिक और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखा है।

Abhilash Shukla (Editor)
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