फातिमा ओवैसी एजुकेशनल KG-PG कैंपस’ को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि तेलंगाना की कांग्रेस सरकार कथित तौर पर झील के फुल टैंक लेवल (FTL) और बफर जोन में बने इस कैंपस के मामले में AIMIM को बचाने की कोशिश कर रही है।

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जमीन और रियल एस्टेट मामलों में आम लोगों पर सख्ती दिखाई जाती है, लेकिन AIMIM से जुड़े इस मामले में सरकार चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने आरोप लगाया कि HYDRAA (Hyderabad Disaster Response & Asset Protection Agency) आम नागरिकों के खिलाफ तो तुरंत कार्रवाई करती है, लेकिन फातिमा ओवैसी एजुकेशनल कैंपस पर लगे आरोपों को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब तेलंगाना हाई कोर्ट ने कैंपस को दी गई मंजूरियों को लेकर सरकारी अधिकारियों से स्पष्ट जानकारी मांगी और मामले को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने विभिन्न विभागों से रिकॉर्ड तलब किए हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण सभी नियमों के अनुरूप हुआ या नहीं।
बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस सरकार की यह चुप्पी उसकी ‘वोट बैंक की राजनीति’ को उजागर करती है। जी. किशन रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस AIMIM को पूरे मुस्लिम समाज का प्रतिनिधि मानकर विशेष व्यवहार कर रही है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है।

वहीं, AIMIM नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “अगर आप एक इमारत गिराएंगे तो हम 10 नई इमारतें खड़ी करेंगे।” बता दें कि फातिमा ओवैसी, असदुद्दीन ओवैसी की भतीजी और अकबरुद्दीन ओवैसी की बेटी हैं। उन्होंने लंदन से बैरिस्टर की पढ़ाई की है और वर्तमान में इस एजुकेशनल कैंपस की देखरेख कर रही हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह निर्माण वास्तव में झील के बफर जोन में हुआ है या फिर यह मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है? इसका जवाब जांच और अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।



