भारत में हाईवे यात्रा को तेज और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सूरत के एनएच-48 स्थित चोर्यासी टोल प्लाजा पर देश का पहला बैरियर-मुक्त मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोलिंग सिस्टम लागू कर दिया गया है।
इस नई व्यवस्था का मकसद टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों को खत्म करना और वाहनों की आवाजाही को सुचारु बनाना है। पारंपरिक टोल सिस्टम के विपरीत, इसमें कहीं भी रुकने की जरूरत नहीं होती। गाड़ियां सीधे टोल पॉइंट से गुजर जाती हैं और शुल्क अपने-आप कट जाता है।
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यह तकनीक सेंसर और अत्याधुनिक कैमरों से लैस ओवरहेड ढांचे पर आधारित है, जो गुजरने वाले वाहनों की पहचान स्वतः कर लेती है। इस सिस्टम में फास्टैग और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान तकनीक को जोड़ा गया है। उच्च क्षमता वाले एआई कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पढ़ते हैं, जबकि आरएफआईडी रीडर फास्टैग को स्कैन करते हैं, जिसके बाद टोल की राशि सीधे संबंधित खाते से काट ली जाती है।
इस पहल की घोषणा ‘लॉजिस्टिक्स शक्ति समिट एंड अवॉर्ड्स 2026’ में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली देश के राजमार्ग ढांचे को आधुनिक बनाने और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में अहम भूमिका निभाएगी।
इस दोहरी पहचान प्रणाली से टोल वसूली में सटीकता बढ़ेगी और त्रुटियां कम होंगी। अगर किसी वाहन में फास्टैग सक्रिय नहीं है, तब भी नंबर प्लेट के जरिए उसकी पहचान कर शुल्क वसूला जा सकेगा, जिससे नियमों का पालन सुनिश्चित होगा।


