नई दिल्ली। आबकारी नीति मामले में सोमवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपना पक्ष खुद रखा। वहीं सीबीआई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू भी अदालत में मौजूद रहे।
केजरीवाल ने कहा मैं निजी तौर पर न्यायमूर्ति की इज्जत करता हूं और न्यायालय की भी इज्जत करता हूं। इस पर बेंच ने कहा कि सम्मान पारस्परिक है। आप मुद्दे पर रहकर बोले। इसके बाद केजरीवाल ने कहा कि मैं एक आरोपी की तरह यहां खड़ा हूं। हालांकि ट्रायल कोर्ट ने मुझे बरी कर दिया है। इसके बाद बेंच ने कहा कि आप जज हटाने के मामले पर अपना संबोधन रखें। उल्लेखनीय है कि केजरीवाल ने हाई कोर्ट से मांग की थी कि इस केस से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को केस से हटाया जाए।
कुच इस तरह हुई कोर्ट में बहस
जज- हम सीधे रीक्यूज़ल पर आएंगे। मैं फाइल पढ़ चुकी हूं।
केजरीवाल- ट्रायल कोर्ट ने तीन महीने तक रोज़ाना सुनवाई की। सबूतों को पढ़ने के बाद मुझे डिस्चार्ज किया गया। कोर्ट ने कहा कि यह सब पहले से सोची-समझी साज़िश थी, हमें फंसाया गया। इसके बाद सीबीआई ने रिवीजन फाइल की।
केजरीवाल- जब यह आदेश आया मेरा दिल बैठ गया। मुझे संदेह हुआ कि कहीं अदालत पक्षपाती तो नहीं है और क्या मुझे यहां न्याय मिलेगा। इसी वजह से मैंने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि इस मामले को किसी अन्य बेंच को ट्रांसफर किया जाए। इसके बाद मैंने यह आवेदन दाखिल किया।
केजरीवाल- 9 मार्च को इस अदालत में पहली सुनवाई हुई। उस समय यहां सीबीआई के अलावा कोई अन्य पक्ष मौजूद नहीं था। बिना सभी पक्षों को सुने, एकतरफा और बिना नोटिस दिए इस अदालत ने आदेश पारित कर दिया।
केजरीवाल- Recusal जज का खुद को केस से अलग करने का मूल सिद्धांत सुप्रीम कोर्ट की एक जजमेंट में बताया गया है।
केजरीवाल- मेरी एक छोटी-सी आपत्ति है. मेरी यह आशंका और यह recusal application केवल अदालत और पक्ष के बीच का मामला है। इसमें सीबीआई को पक्षकार नहीं बनाया जाना चाहिए।
केजरीवाल- सवाल जज की ईमानदारी पर नहीं, बल्कि पार्टी की खुद की आशंका पर है। मैं बस वही राहत मांग रहा हूं जो ईडी को दी गई थी और मेरा केस अब और मज़बूत है।
केजरीवाल- गोवा चुनाव में पैसों के इस्तेमाल पर कोर्ट अपनी फाइंडिंग दे चुका है. एक मुद्दा उठा था अप्रूवर का। इसके ऊपर आपकी फाइंडिंग है। मुझे लगभग भ्रष्ट घोषित कर दिया गया। मुझे लगभग दोषी घोषित कर दिया गया, बस सज़ा सुनानी रह गई थी।
कोर्ट- इसपर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। यह बस आपकी सोच है।
केजरीवाल- ट्रायल कोर्ट के फैसले का हवाला देते कहा कि हाई कोर्ट की टिप्पणियों में दिए गए कई निष्कर्ष निचली अदालत के फैसले में ग़लत साबित हुए हैं।
कोर्ट- इस बेंच ने जब यह टिप्पणी की थी, तब तक निचली अदालत का फैसला नहीं आया था। अब निचली अदालत ने जो फैसले में सही कहा है, उसको आगे चलकर यह कोर्ट देखेगी।
केजरीवाल- ट्रायल कोर्ट के जज ने विस्तार से सुनवाई कर जो फैसला दिया है उसमें माना कि कोई करप्शन, रिश्वत नहीं ली गई। कोई पैसा गोवा नहीं ले जाया गया। हाई कोर्ट की टिप्पणियों के विपरीत निचली अदालत के निष्कर्ष थे।
केजरीवाल- क्या अब हाई कोर्ट इस स्टेज पर पुराने फैसलों में की गई टिप्पणियों को बदल पाएगा। इस केस को लेकर सीबीआई की पूरी थ्योरी निचली अदालत खारिज कर चुका है।
केजरीवाल- मेरे अरेस्ट के समय जब केस आपके पास आया था तब आपने कहा कि अप्रूवर के स्टेटमेंट एडमिशबल है। अब ट्रायल कोर्ट ने इस पूरे केस को ही खारिज कर दिया। आपने अब बिना किसी को सुने आदेश दे दिया। ये आपका बायसनेस दिखाता है।
केजरीवाल- मैं निजी तौर पर न्यायमूर्ति की इज्जत करता हूं और न्यायालय की भी इज्जत करता हूं।
कोर्ट-सम्मान पारस्परिक है। आप मुद्दे पर रहकर बोले।
केजरीवाल-मैं एक आरोपी की तरह यहां खड़ा हूं, हालांकि ट्रायल कोर्ट ने मुझे बरी कर दिया है।
कोर्ट-आप जज हटाने के मामले पर अपना संबोधन रखें।
केजरीवाल-मैडम आप मेरी बात सुन लीजिए
कोर्ट-सुनाइये
केजरीवाल- 9 मार्च को ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर अदालत ने बिना किसी प्रतिवादी की मौजूदगी में आदेश पारित कर दिया। अदालत में बिना प्रतिवादी की मौजूदगी में सीबीआई के पक्ष में आदेश पारित किया और अपनी टिप्पणी में कहा कि प्रथम दृष्टि आदेश में खामी हैं। जबकि इस मामले में 40000 पन्नों से अधिक की चार्जशीट थी। अदालत में बिना उसे पढ़े अपना आदेश जारी कर दिया।
केजरीवाल – तो कानून सीधा-सादा है। बात यह नहीं है कि जज असल में पक्षपाती हैं या नहीं, बल्कि बात यह है कि मुकदमा लड़ने वाले को कोई आशंका है या नहीं। मैं आपके सामने 10 ऐसे कारण रखूंगा जिनसे आपको पता चलेगा कि मुझे यह आशंका क्यों है। कारण 1: उचित आशंका किसे कहते हैं?, अपना पक्ष रखते हुए केजरीवाल ने अलग-अलग सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उदाहरण दे दिया।


