कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी जैसी मस्जिद बनाने पर अड़े हुमायूं कबीर की नई पार्टी अभी से विवादों में आ गई है। तृणमूल कांग्रेस से बाहर किए गए कबीर ने जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) बनाई थी और 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए बॉलीगंज से सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर निशा चटर्जी को उम्मीदवार भी घोषित किया था। 24 घंटे में ही कबीर ने निशा की उम्मीदवारी यह कहते हुए वापस ले ली कि सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो पार्टी की छवि के लिए ठीक नहीं हैं। इससे नाराज निशा चटर्जी ने कहा कि हिंदू होने के कारण उनका टिकट काटा गया है।
निशा चटर्जी ने मीडिया से बातचीत के दौरान हुमायूं कबीर पर जमकर नाराजगी जाहिर की। निशा ने कहा कि कबीर ने मुझे इसलिए हटा दिया गया क्योंकि मैं हिंदू हूं। अगर उनकी पार्टी धर्मनिरपेक्ष थी, तो क्या ऐसा होता? मैं उनकी बाबरी मस्जिद योजना के साथ खड़ी थी। फिर उन्होंने मेरे साथ ऐसा क्यों किया?’ उन्होंने बताया कि वह जून में उनके कैफे के उद्घाटन के बाद से कबीर के संपर्क में थी। कबीर ने उन्हें 22 दिसंबर के कार्यक्रम में आमंत्रित किया था और पार्टी की राज्य समिति का सदस्य बनाने का वादा किया था।
निशा चटर्जी ने कहा कि सोमवार को उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि हुमायूं कबीर उनके नाम उम्मीदवार के तौर पर घोषित करने वाले हैं। वह इस पर हैरान रह गईं जब 24 घंटे के भीतर ही उनके सोशल मीडिया पोस्ट को आपत्तिजनक बता दिया। उन्होंने कहा कि कबीर को यह समझाना होगा कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से मेरी बदनामी क्यों की। अब वह बैलीगंज विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने पर विचार कर सकती हैं। संजना चटर्जी उर्फ निशा चटर्जी सोशल मीडिया पर काफी पॉपुलर हैं। इंस्टाग्राम पर उनके 72 हजार के करीब फॉलोअर्स हैं।
हुमायूं कबीर ने कहा-निर्णय का अधिकार मेरा
निशा का टिकट काटने पर कबीर ने कहा था कि मैंने सोशल मीडिया पर निशा की कुछ तस्वीरें और वीडियो देखे हैं। उन्हें देखने के बाद मुझे लगता है कि उन्हें हमारी पार्टी का उम्मीदवार नहीं होना चाहिए। इससे जनता को गलत संदेश जाएगा। मुझे यह निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।




