नई दिल्ली। देश में मानसून को लेकर एक तरफ चिंता बढ़ रही है तो दूसरी तरफ मौसम वैज्ञानिकों के नए आकलन से उम्मीद की किरण भी दिखाई दे रही है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन यानी WMO के ताजा मौसमी अपडेट के मुताबिक जुलाई-सितंबर 2026 के दौरान मजबूत El Nino विकसित होने की संभावना है। El Nino आमतौर पर भारतीय मानसून के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है और इससे कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि इसी दौरान Indian Ocean Dipole यानी IOD के Positive phase में जाने की संभावना को भारत के लिए राहत देने वाले कारक के रूप में देखा जा रहा है।
WMO के जुलाई-सितंबर 2026 के अपडेट के अनुसार बहु-मॉडल पूर्वानुमान में इस अवधि के दौरान El Nino के तेजी से मजबूत होने का संकेत है। WMO के मॉडल जुलाई से सितंबर के औसत के लिए Nino 3.4 क्षेत्र में करीब 2 डिग्री सेल्सियस तक की समुद्री सतह तापमान विसंगति का अनुमान लगा रहे हैं। इसी अवधि में Indian Ocean Dipole के Positive phase में विकसित होने की संभावना जताई गई है।
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El Nino का नाम आते ही भारत में मानसून को लेकर चिंता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान में बदलाव का असर दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ सकता है। भारत के संदर्भ में El Nino को अक्सर कमजोर मानसून और बारिश में कमी की संभावना से जोड़ा जाता है। हालांकि हर El Nino का प्रभाव एक जैसा नहीं होता और भारतीय मानसून पर कई अन्य समुद्री तथा वायुमंडलीय कारक भी असर डालते हैं।
इसी वजह से Positive IOD इस समय महत्वपूर्ण बन गया है। Indian Ocean Dipole हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्री तापमान में अंतर से जुड़ा जलवायु पैटर्न है। Positive IOD की स्थिति में भारत की ओर मानसूनी हवाओं को कुछ अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है। WMO ने भी कहा है कि विकसित हो रहा El Nino और संभावित Positive IOD आने वाले महीनों में दुनिया के कई हिस्सों के मौसम को प्रभावित कर सकते हैं।
हालिया रिपोर्ट के मुताबिक 1 अगस्त तक दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में संचयी बारिश की कमी 22 प्रतिशत तक बताई गई थी। ऐसे में Positive IOD का विकसित होना इस क्षेत्र के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर यह परिस्थिति मजबूत होती है तो देश के कुछ हिस्सों में बारिश की स्थिति में सुधार की संभावना बन सकती है।
हालांकि भारतीय मौसम विभाग यानी IMD की स्थिति को अलग से समझना जरूरी है। WMO के वैश्विक मौसमी मॉडल और IMD के राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय पूर्वानुमान एक ही चीज नहीं होते। किसी विशेष शहर या जिले में अगले कुछ दिनों की बारिश का अनुमान स्थानीय मौसम प्रणालियों, कम दबाव वाले क्षेत्रों, मानसूनी ट्रफ और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करता है। IMD अपने दैनिक और विस्तारित पूर्वानुमानों के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों के लिए बारिश की स्थिति की जानकारी देता है।
इसका सीधा असर किसानों, जलाशयों, बिजली उत्पादन, पेयजल व्यवस्था और खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है। अगर किसी बड़े कृषि क्षेत्र में लगातार बारिश कम रहती है तो फसलों की सिंचाई की जरूरत बढ़ सकती है। दूसरी तरफ किसी छोटे समय में अत्यधिक बारिश होने पर शहरी जलभराव, बाढ़ और फसल नुकसान जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। इसलिए केवल कुल बारिश का आंकड़ा ही नहीं, बल्कि बारिश का वितरण और समय भी बेहद महत्वपूर्ण है।
अगस्त की शुरुआत में सामने आया यह मौसम अपडेट बताता है कि इस साल मानसून की तस्वीर सीधी और एकतरफा नहीं है। एक ओर El Nino चिंता बढ़ा रहा है, तो दूसरी ओर Positive IOD संभावित संतुलनकारी कारक के रूप में सामने आया है। आने वाले हफ्तों में समुद्री परिस्थितियों और वास्तविक बारिश के आंकड़ों पर नजर रखना इसलिए बेहद जरूरी होगा।



