इंदौर में मरीज की मौत के बाद हंगामा की घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन को पत्र भेजकर FIR दर्ज करने और प्रवेश व्यवस्था को सख्त करने की मांग की है।
मरीज की मौत के बाद अस्पताल में तनाव और हंगामा
इंदौर के एमवाय अस्पताल में 77 वर्षीय मरीज सोनी लाल की मौत के बाद उनके परिजनों और अटेंडेंट्स ने जूनियर डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और सुरक्षा कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया। उन्होंने अस्पताल के ICU क्षेत्र में तोड़-फोड़ की और कर्मचारियों के साथ मारपीट भी की। JDA ने बताया कि मरीज को पूरी चिकित्सा सुविधा दी गई थी, लेकिन उनकी हालत खराब थी और इलाज के बावजूद उनकी मृत्यु हो गई।
👉 यह भी पढ़ें:
- MP में मानसून का आखिरी दौर, इंदौर-भोपाल समेत कई इलाकों में बारिश का अलर्ट
- इंदौर में कार की टक्कर से बाइक सवार युवक की मौत, हादसे की जांच जारी
- इंदौर में राहुल के कार्यक्रम पर सवाल, बिना तैयारी पहुंचे नेता प्रतिपक्ष
- इंदौर में राहुल गांधी का लाइव कंसर्ट, भारत जोड़ो मैदान में 300 फीट पोस्टर
- इंदौर में 23 अक्टूबर को भारत-वेस्टइंडीज टी-20 मैच, टिकट 25 से ऑनलाइन उपलब्ध
- इंदौर में रिटायर्ड RBI अफसर से 50 के पुराने नोट के बदले 9 लाख की ठगी
JDA ने डीन को FIR दर्ज कराने का पत्र भेजा
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने डीन को लिखे पत्र में बताया कि इस घटना से डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। इसलिए उन्होंने तत्काल FIR दर्ज करने और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। इसके अलावा, अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की भी अपील की गई है।
अस्पताल में बाउंसर और ID आधारित प्रवेश व्यवस्था की मांग
JDA ने अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तीन प्रमुख मांगें रखीं हैं। पहली, इमरजेंसी, वार्ड, ICU सहित संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशिक्षित बाउंसर तैनात किए जाएं। दूसरी, मरीजों के अटेंडेंट्स का प्रवेश ID कार्ड आधारित और एक्सेस कंट्रोल सिस्टम से नियंत्रित किया जाए। तीसरी, डॉक्टरों और स्टाफ के साथ किसी भी अप्रिय घटना पर तेजी से कार्रवाई के लिए रैपिड रिस्पॉन्स मैकेनिज्म बनाया जाए।
मरीज की स्थिति और मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन
डॉक्टरों ने बताया कि सोनी लाल को सेल्युलाइटिस और फर्स्ट-डिग्री AV ब्लॉक सहित गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं थीं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कर पूरी चिकित्सा सुविधा प्रदान की गई। मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार किया गया, लेकिन उनकी स्थिति नाजुक थी। इस दौरान उनकी मृत्यु हो गई, जिस पर परिजनों का गुस्सा भड़क गया।
आम आदमी पर प्रभाव और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
ऐसे घटनाक्रम से अस्पताल की सामान्य सेवाओं पर भी असर पड़ता है। जब अस्पताल में हिंसा होती है, तो डॉक्टर और स्टाफ भयभीत हो जाते हैं। इससे मरीजों को मिलने वाली सेवाओं में बाधा आती है। इसके अलावा, अस्पताल की संपत्ति और उपकरणों को नुकसान पहुंचने से इलाज की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जो सीधे आम मरीजों पर बुरा प्रभाव डालता है।
आगे की संभावनाएं और सुरक्षा में सुधार की जरूरत
घटना के बाद प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करना होगा ताकि डॉक्टरों और स्टाफ को सुरक्षित माहौल मिल सके। JDA की मांगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। इसके अलावा, अस्पताल में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा उपाय किए जाने की जरूरत है। इससे भविष्य में इस तरह की हिंसा की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।



