इंदौर स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट फर्जीवाड़ा एक गंभीर समस्या के रूप में सामने आया है। इस मामले में अफसरों से शपथ पत्र मांगा गया है ताकि अटैचमेंट की स्थिति स्पष्ट हो सके।
अटैचमेंट फर्जीवाड़ा की वजह और विभागीय आंकड़ों में विरोधाभास
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में एक ही स्थान पर मूल पदस्थापना होते हुए भी डॉक्टर और कर्मचारी दूसरे शहरों या केंद्रों में फर्जी अटैचमेंट कराते रहे हैं। ई-एचआरएमएस पोर्टल पर जो संभागवार आंकड़े दर्ज हैं, वे विभाग के फील्ड रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। इस वजह से डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं।
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आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 2558 अटैचमेंट दर्ज हैं, लेकिन जिलों से मिली अधूरी जानकारी से वास्तविक स्थिति अस्पष्ट है। इस कारण विभाग ने अफसरों से शपथ पत्र मांगकर सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की है।

अफसरों से शपथ पत्र मांगने का नया कदम
स्वास्थ्य विभाग ने पहली बार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों और अन्य वरिष्ठ अफसरों से अटैचमेंट की प्रमाणिक जानकारी के लिए शपथ पत्र मांगे हैं। यह कदम विभाग में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जीवाड़े की जांच के लिए उठाया गया है।
शपथ पत्र के माध्यम से अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी और भविष्य में गलत आंकड़े प्रस्तुत करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरी करने को कहा गया है।
संभागवार आंकड़ों में इंदौर का स्थान और स्थिति
ई-एचआरएमएस पोर्टल के अनुसार, प्रदेश में सबसे अधिक 560 अटैचमेंट उज्जैन संभाग में हैं। इसके बाद रीवा में 477, ग्वालियर में 411, भोपाल में 353, इंदौर में 317, जबलपुर में 261 और सागर में 206 अटैचमेंट दर्ज हैं।
इंदौर संभाग में 317 अटैचमेंट होने के बावजूद वास्तविक संख्या और स्थिति पर विभाग संतुष्ट नहीं है। इसलिए यहां विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इंदौर में स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक कार्रवाई
इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हासानी ने 175 डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारियों के फर्जी अटैचमेंट निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं। इससे व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
आदेश के अनुसार, प्रभावित कर्मचारियों को तत्काल अपनी मूल पदस्थापना पर लौटना होगा और वहां ड्यूटी जॉइन करनी होगी। यह कार्रवाई विभाग की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी मानी जा रही है।
मूल पदस्थापना पर वापसी के निर्देश और आगे की योजना
शासन ने सभी प्रभावित डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से अपनी मूल पदस्थापना वाले स्थानों पर लौटने के लिए निर्देशित किया है। इससे विभाग में कार्यप्रणाली नियमित होगी और संसाधनों का सही उपयोग संभव होगा।
इसके अलावा, विभाग आगे भी नियमित सत्यापन और निगरानी के लिए कड़े नियम लागू करेगा ताकि भविष्य में इस तरह के फर्जीवाड़े को रोका जा सके।
अटैचमेंट फर्जीवाड़ा का आम जनता पर असर
फर्जी अटैचमेंट की समस्या से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। जब डॉक्टर या कर्मचारी अपनी मूल जगह से हटकर किसी अन्य स्थान पर बिना उचित अनुमति काम करते हैं, तो स्वास्थ्य सेवा प्रभावित होती है।
इससे मरीजों को सही समय पर और उचित इलाज न मिल पाने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए विभाग की यह कार्रवाई स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए आवश्यक है।



