असदुद्दीन ओवैसी ने 4 अक्टूबर 2026 को बहराइच में समाजवादी पार्टी समेत अन्य विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्षी नहीं चाहते यूपी की सियासत में मुसलमानों की हिस्सेदारी बढ़े। उनका यह बयान उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक माहौल को गरमा रहा है।
ओवैसी का सपा पर निशाना और मुसलमानों की राजनीतिक हिस्सेदारी
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भिनगा विधानसभा क्षेत्र की जनसभा में समाजवादी पार्टी को कटघरे में रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल यूपी की राजनीति में मुसलमानों की भागीदारी को बढ़ने नहीं देना चाहते। ओवैसी ने कहा, “विपक्षी दल चाहते हैं कि मुसलमान केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल हों, लेकिन उनकी कोई बड़ी राजनीतिक ताकत न बने।” इस बयान में उन्होंने सपा और अन्य विपक्षी दलों की नीतियों पर सवाल उठाए।

भिनगा में जनसभा और ओवैसी का बहराइच में संबोधन
ओवैसी 4 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे बहराइच पहुंचे। उन्होंने रास्ते में एक होटल में पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इसके बाद वे भिनगा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित विशाल जनसभा में शामिल हुए। यह जनसभा पहले 27 सितंबर को होनी थी, लेकिन भारी बारिश के कारण 4 अक्टूबर के लिए स्थगित की गई थी। इस कार्यक्रम को AIMIM की चुनावी तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विपक्षी दलों पर ‘अब्दुल’ वाला तंज और वोट बैंक की राजनीति
ओवैसी ने सपा समेत अन्य विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि मुसलमान सिर्फ वोट देने वाले बने रहें। उन्होंने कहा, “अब्दुल केवल दरी बिछाए, भइया का जिंदाबाद करे, वोट दे और फिर अपने घर चला जाए।” यह बयान चुनावी राजनीति में मुसलमानों को वोट बैंक के रूप में उपयोग करने की आलोचना के रूप में देखा गया।

बी टीम के आरोपों को खारिज किया
ओवैसी ने भाजपा की ‘बी टीम’ होने के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ही इन आरोपों को गढ़ रहा है ताकि AIMIM को कमजोर किया जा सके। उनका कहना था कि AIMIM स्वतंत्र रूप से काम कर रही है और मुसलमानों के लिए सशक्त राजनीतिक विकल्प प्रस्तुत कर रही है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी
ओवैसी की यह रैली और उनके बयान यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के संकेत हैं। AIMIM उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। इसके अलावा, वे मुसलमानों की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की बात कर रहे हैं, जो सपा और अन्य विपक्षी दलों के लिए चुनौती हो सकती है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुसलमानों की भूमिका पर असर
ओवैसी के बयान से स्पष्ट होता है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुसलमानों की हिस्सेदारी पर विवाद जारी रहेगा। यदि AIMIM अपनी स्थिति मजबूत करता है, तो यह सपा और अन्य विपक्षी दलों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वहीं, आम जनता के लिए यह राजनीतिक बदलाओं का दौर है, जिसमें उनकी राजनीतिक भागीदारी और आवाज़ का महत्व बढ़ेगा।



